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रिंग में उतरे भाई-बहन, दादा ने इसलिए तोड़ दी 25 साल पुरानी परंपरा

वाराणसी. यहां स्व. अमरनाथ मिश्रा के स्मृति में 3 दिन तक चलने वाले रेसलिंग कॉम्पटीशन की शुरुआत मंगलवार को हुई।

Danik Bhaskar | Nov 28, 2017, 04:21 PM IST
25 साल पहले नागपंचमी पर इस कॉम्पटीशन का आयोजन किया गया था। 25 साल पहले नागपंचमी पर इस कॉम्पटीशन का आयोजन किया गया था।

वाराणसी. यहां स्व. अमरनाथ मिश्रा के स्मृति में 3 दिन तक चलने वाले रेसलिंग कॉम्पटीशन की शुरुआत मंगलवार को अस्सी घाट पर हुई। अखाड़ा गोस्वामी तुलसीदास की ओर से 28 से 30 नवंबर के बीच पूर्वांचल से महिला और पुरुष रेसलर यहां पहुंचेंगे। पुरुष रेसलरों की कैटेगरी 57 से 125 किलोग्राम और लड़कियों की 48 से 75 किलोग्राम रखी गई है।

25 साल में पहली बार तोड़ी गई परंपरा

- आयोजक कल्लू पहलवान ने बताया, ''मंगलवार को कम्पटीशन की शुरुआत हुई। इसमें एक कैटेगरी लड़का और लड़कियों के बीच रेसलिंग का रखा गया। लेकिन कोई लड़का और लड़की साथ लड़ने को तैयार नहीं हुए।''

- ''फिर मैंने सगे भाई-बहन मेरे पौत्र-पौत्री करन और खुशी को मैदान में उतार दिया। 25 साल पहले नागपंचमी पर इस कॉम्पटीशन की शुरुआत की गई थी। लेकिन आज पहली बार लड़का-लड़की मैदान में आमने-सामने उतरे।''

- ''मेरा मानना है कि लड़कियां लड़कों से कमजोर नहीं होतीं। सिर्फ उन्हें सही सपोर्ट और डाइट मिलना चाहिए। आज मैंने रूढ़िवादी परंपरा को तोड़ते हुए अपने पौत्र और पौत्री को लड़ाया, जिसमे मेरी पौत्री खुशी ने बाजी मारी।''

- खुशी ने बताया, ''मैं तो किसी के भी साथ लड़ने को तैयार थी। लेकिन जब कोई मुझसे लड़ने नहीं आया, तो दादा ने भाई को रिंग में उतार दिया।''

- गोस्वामी तुलसीदास अखाड़े और संकटमोचन मंदिर के महंत प्रो. विश्वम्भरनाथ मिश्र ने बताया, ''इस कॉम्पटीशन में 'बनारस कुमार' और 'बनारस केशरी' होंगे। बनारस केशरी के विजेता को मोटरसाइकल, तो कुमार के विजेता को साइकिल और चांदी का गदा दिया जाएगा।''