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जानिए एक रुपए सैलरी पाने वाले काशी के पहले सांसद की दिलचस्प कहानी

Dainik Bhaskar

Apr 10, 2014, 11:21 AM IST

1952 के पहले आम चुनाव में जंसा गांव के रहने वाले डॉ. रघुनाथ सिंह कांग्रेस के टिकट पर वाराणसी से पहले सांसद चुने गए थे।

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वाराणसी. आज पूरी दुनिया की नजरें वाराणसी लोकसभा सीट पर टिकी हुई हैं। चुनावी बिसातें बिछ चुकी हैं। इस सीट से नरेंद्र मोदी और केजरीवाल जैसे दिग्गज मैदान में हैं। वहीं, वाराणसी की जनता अपने पहले सांसद डॉ. रघुनाथ प्रसाद की त्याग की भावना को आज भी याद करती है।
1952 के पहले आम चुनाव में कांग्रेस ने जंसा गांव के रहने वाले डॉ. रघुनाथ सिंह को मैदान में उतारा था। उन्‍होंने अपनी सादगी से वाराणसी के पहले सांसद बनने का गौरव प्राप्त किया। उनमें त्याग और बलिदान की ऐसी भावना थी कि मात्र 1 रुपए की तनख्वाह पर काम किया, कभी सरकारी गाड़ी का इस्तेमाल नहीं किया। रिक्‍शे की सवारी कर जनता के दुखों को सुनते थे।
बनारस के पहले सांसद की दिलचस्प कहानी
डॉ. रघुनाथ सिंह 1968 में 1 रुपए तनख्वाह लेकर जिंक लिमिटेड के चेयरमैन बने थे। वे 1977 में शिपिंग कॉरपोरेशन के भी चेयरमैन रहे और वहां भी सिर्फ 1 रुपए वेतन में लिया। उनका मानना था कि बाकी पैसा देश के विकास में काम आएगा। गर्मी के दिनों में अपने कमरे का पंखा बंद कर देते थे। परिजनों से कहते थे, 'जो कुछ देश के लि‍ए कर सकता हूं, जरूर करूंगा'। डॉ. रघुनाथ सिंह 1952, 1957 और 1962 तक लगातार तीन बार सांसद रहे। 26 अप्रैल 1992 को उनका देहांत हुआ।
तीन बार ठुकराया मंत्री पद
डॉ. रघुनाथ सिंह को संतान नहीं थी। औरंगाबाद के पुश्तैनी मकान में उनके भतीजे अकबाल नारायण सिंह परिवार के साथ रहते हैं। पुरानी बातों की बाबत अकबाल बताते हैं कि पं. नेहरू बेनियाबाग में केवल एक बार सभा करने पहुंचे थे। इसके बाद डॉ. रघुनाथ सिंह लगातार तीन बार जीते।
तीनों बार उन्‍हें मंत्री पद दिया गया, लेकि‍न उन्‍होंने ठुकरा दिया। मंत्री पद उनको सरकारी नौकरी की तरह लगती थी। वह आम आदमी की भावनाओं को समझकर उनकी सेवा करना चाहते थे। उन्होंने कभी सरकारी चीजों का इस्तेमाल नहीं किया।
आगे पढ़िए, हमेशा पैदल या रिक्‍शा से चलते थे वाराणसी के पहले सांसद...

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अकबाल ने बताया कि पहले चुनाव में कुछ लोगों ने उन्हें गाड़ी से चलने का ऑफर दिया था पर उन्होंने मना कर दिया। उनका कहना था कि साधारण इंसान कभी गाड़ी से नहीं चल सकता। वह पैदल ही लोगों से मिलने निकल पड़ते थे। 
 
कभी-कभी तो अकेले ही प्रचार के लिए निकल जाते थे जबकि आज का प्रत्याशी बिना समर्थकों के बाहर ही नहीं निकलता। चुनाव प्रचार के दौरान वह इलाकों की समस्याओं को डायरी में लिखते थे। चुनाव जीतने के बाद सबसे पहले डायरी में लिखी समस्याओं का समाधान करते थे। 
 
 
11 साल की उम्र में जेल गए, कभी पेंशन नहीं ली  
 
स्वतंत्रता सेनानी डॉ. रघुनाथ सिंह 11 साल की उम्र में जेल जाना पड़ा था। 1930 में उन्होंने रायबरेली में नमक सत्याग्रह किया था। इसके कारण उन्हें 34 दिनों तक जेल में रहना पड़ा। स्वतंत्रता सेनानी होने के बावजूद उन्होंने कभी भी पेंशन नहीं ली। उनका मानना था कि यह पैसा किसी जरुरतमंद के काम आएगा।
 
आगे पढ़िए, वह हमेशा क्षेत्रवाद का विरोध करते थे... 
 
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लाल बहादुर शास्त्री जब देश के दूसरे प्रधानमंत्री बने थे। उन्होंने डॉ. रघुनाथ सिंह को मंत्रिमंडल में शामिल करना चाहा पर वह इसके लिए तैयार नहीं हुए। उनका कहना था कि उनके मंत्रिमंडल में शामिल होने से लोग शास्त्री जी और उनपर क्षेत्रवाद को लेकर उंगली उठा सकते हैं। 
 
उन्होंने बीएचयू से एमए और एलएलबी की पढ़ाई की। इसके बाद बीएचयू से पीएचडी भी किया था। इसके अलावा वह एक लेखक भी थे। उन्होंने पचास से ज्यादा किताबें भी लिखी। 26 अप्रैल 1992 को उनका देहांत हुआ।
 
क्या कहते है जानकार 
 
कांग्रेस के जोनल प्रवक्ता अनिल श्रीवास्तव के मुताबिक आज युग परिवर्तन का दौर चल रहा है। डॉ. रघुनाथ सिंह के जमाने में लोग पैदल चलकर लोगों से मिलते थे। आज लग्जरी गाड़ियों के काफिले का जमाना है। उस समय राजनीति में सादगी और त्याग ही प्रत्याशी की जीत की कुंजी होती थी। 
 
आज धनबल और बाहुबल को ही प्रत्याशी की ताकत माना जाता है। पहले कार्यकर्ता हाथों से तख्तियां और वॉल राइटिंग के जरिए चुनाव प्रचार करते थे। अब प्रत्याशी इवेंट प्लॉनरों को यह जिम्मेदारी दे देते हैं। 
 
आगे पढ़िए, क्या कहते है वरिष्ठ पत्रकार... 

 

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वरिष्ठ पत्रकार नचिकेता देसाई के मुताबिक आज चुनावी मुद्दे बदल गए हैं। अब चुनाव हुंकार और चीत्कार का है। पहले चुनाव गली-मोहल्लों के मुद्दों पर लड़ा जाता था। प्रत्याशी खुद जनता से राय मांगता था जबकि आज प्रत्याशी अपने घोषणापत्र के जरिए बताता है कि वह जीतने के बाद क्या करेगा? आज के युग में हवाई जहाज के जरिए नेता एक ही दिन में कई रैलियां करता है, जबकि पहले प्रत्याशी खुद ही अपना प्रचारक हुआ करता था।
 
उनका ये भी कहना था कि आज टेलीविजन के जरिए राजनीति की दिशा तय हो रही है। जनता भी अपना नजरिया टीवी के माध्यम से ही तय कर रही है। आज मुद्दों के बजाए नेता आरोप और प्रत्यारोप की राजनीति कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि पहले राजनीति में एक-दूसरे पर जुबानी जंग नहीं होती थी और न ही सोशल साइटों का कोई दौर उस समय था।
 
आगे देखिए, डॉ. रघुनाथ सिंह से अन्य तस्वीरें...
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