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यहां शैम्पेन से मनाया गया भगवान का B'Day, कुछ ऐसा था अरेंजमेंट

भैरव अष्टमी पर काशी काल भैरव का बर्थ डे बड़े धूमधाम से मनाया गया। इस अवसर पर 551 KG का काटा केक।

DainikBhaskar.com | Last Modified - Nov 12, 2017, 11:08 AM IST

वाराणसी.शनिवार को भैरव अष्टमी पर काशी के कोतवाल काल भैरव का बर्थ डे मनाया गया। 551 किलो का केक काटने के साथ भक्तों ने शैम्पेन की बोतल खोलकर जश्न मनाया। केक की मार्केट वैल्यू ढाई लाख रु. से ऊपर बताई जा रही है।
551 KG का काटा केक...

- 551 केजी का केक काटने वाले प्रिंस गुप्ता ने कहा, ''मेरी खुद की ब्रेकरी शॉप है। 11 साल पहले मैंने 5 किलो का केक खरीद कर चढ़ाया था। कुछ ही दिनों बाद बाबा के आशीर्वाद से मैंने शॉप खोला जो चल पड़ा। मैंने खुद 2 दिन में इस केक को बनाया है। यह ब्लैक वाइन बोतल का डिजाइन, जो बाबा को बहुत प्रिय है।
एक मात्र काशी में है ये मंदिर
- पुजारी प्रकाश महराज ने कहा, ''मार्ग शीर्ष के कृष्ण पक्ष की अष्टमी को स्कन्द महापुराण के अनुसार न्याय के देवता भैरव की उत्त्पति हुई थी। इस पर्व को भैरव अष्टमी के रूप में मनाने की परंपरा है।''
- ''काशी एक मात्र ऐसी नगरी है, जहां अष्ट भैरव विराजमान हैं। भगवान ब्रह्मा को खुद पर एक बार अभिमान हो गया। पुराणों में उल्लेख मिलता है कि ब्रह्मा ने पंच मुखी के एक मुख से शिव की निंदा की थी।''
- ''इससे नाराज कालभैरव ने ब्रह्मा का मुख अपने नाख़ून से काट दिया था। कालभैरव के नाख़ून में ब्रह्मा का मुख अंश चिपका रह गया था, जो हट नहीं रही था। भैरव ने परेशान होकर सारे लोको की यात्रा कर ली मगर ब्रह्म हत्या से मुक्ति नहीं मिली।''
- ''ऐसे में भगवान विष्णु ने कालभैरव को काशी भेजा। काशी पहुंच कर उन्हें ब्रह्म हत्या के दोष से मुक्ति मिली और उसके बाद वे यहीं स्थापित हो गए। भैरव अष्टमी के बाबा को मदिरा का भोग तामसी रूप में लगाया जाता है। जो मदिरा न चढ़ा पाए वो डाब का जल चढ़ा सकता है।''
- ''ये किसी को नहीं पता कि बाबा इस शहर में कब से स्थापित हैं। वर्तमान मंदिर 1715 में बाजीराव पेशवा ने जीर्णोद्वार कर बनवाया था। वास्तुशास्त्र के अनुसार बना यह मंदिर आज तक वैसा ही है।''
- ''इसकी बनावट में कभी कोई बदलाव नहीं किया गया। तंत्र शैली के आधार पर मंदिर की बनावट है।''
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