विज्ञापन

इस शख्स ने Big B के लिए लिखा था गाना, मुंबई में नहीं थी रहने के लिए छत

Dainik Bhaskar

Jun 02, 2017, 09:35 AM IST

गीतकार 'अंजान' के स्ट्रगल की कहानी ऐसी थी कि मुंबई में उन्होंने रात काटने के लिए लोकल ट्रेनों का सफर तो कभी अपार्टमेंट की सीढ़ियों के नीचे कई दिनों तक रातें काटी।

गीतकार अंजान का जन्म वाराणसी में हुआ था। 13 सितंबर 1997 उनका निधन हो गया था। गीतकार अंजान का जन्म वाराणसी में हुआ था। 13 सितंबर 1997 उनका निधन हो गया था।
  • comment
वाराणसी. गीतकार 'अंजान' के स्ट्रगल की कहानी ऐसी थी कि मुंबई में उन्होंने रात काटने के लिए लोकल ट्रेनों का सफर तो कभी अपार्टमेंट की सीढ़ियों के नीचे कई दिनों तक रातें काटी। बड़े बेटे शेखर पांडेय ने पिता की लाइफ की पर्सनल बातों को dainikbhaskar.com से शेयर किया। उन्होंने बताया, ''1970 से 80 के बीच अमिताभ बच्चन सुपर स्टार बनने की राह पर थे, तब हेरा फेरी, खून-पसीना, लावारिस, मुकद्दर का सिकंदर फिल्म के लिए उन्होंने गीत लिखा। फि‍ल्म डॉन के डॉयरेक्टर चंद्र बरोट को ऐसा गीत चाहिए था जो लोगों की जुबान पर हो। तब पिताजी ने 20 मिनट में 'खइके पान बनारस वाला' गीत लिखा, जो सुपरहिट हुआ।''

बनारस में हुई मशहूर सिंगर मुकेश से मुलाकात
- बनारस के ओदार गांव में स्व. शिवनाथ पांडेय के घर 28 अक्टूबर 1930 को अंजान का जन्म हुआ था। मां का नाम इंदिरा देवी था।
- अंजान का पूरा नाम लालजी पांडेय था। इन्होंने मुफलिसी में जीकर बीएचयू से एम कॉम किया। दो बेटे शेखर पांडेय और शीतला पांडेय हैं।
- शेखर ने बताया, ''पिताजी को पढ़ाई के दौरान से ही कविता और गीत लिखने का शौक था। धीरे-धीरे वे इसी शौक से दोस्तों में काफी लोकप्रिय हो गए और दोस्तों ने उन्हें 'अंजान' नाम दे दिया।
- एक बार उनके एक मित्र शशी बाबू (डी पेरिस होटल के मालिक) क्लार्क होटल के एक संगीत के कार्यक्रम में ले गए, जहां मशहूर गायक मुकेश आए थे। शशी बाबू ने मुकेश से उनकी मुलाकात करवाई। मुकेश ने कहा, 'आप यहां क्या कर रहे, आपको मुंबई में होना चाहिए।'
- इसके बाद पिता जी पर मुंबई जाने की धुन सवार हो गई। दोस्तों से पैसे लेकर 1953 में पहली बार मुंबई पहुंचे। उस समय उनके पास बहुत पैसे नहीं थे। इस खर्च को पूरा करने लिए वे वहां बच्चों को ट्यूशन पढ़ाने लगे।
लोकल ट्रेनों में काटी रातें
- पिताजी समय निकालकर फिल्मों के म्यूजिक डायरेक्टरों के पास जाया करते थे, लेकिन काम नहीं मिल पा रहा था।
- उनके पास रहने की जगह भी नहीं थी। कुछ दिनों तक वे अपने चार दोस्तों के साथ एरोमा गेस्ट हाउस का एक रूम लेकर रहते थे। बाद में उन दोस्तों के चले जाने बाद अकेले रह गए।
- बहुत दिनों तक रात में लोकल ट्रेनों में गुजारते रहे। इसके लिए उन्होंने रेलवे का पास बनवा रखा था, जो कम पैसे में बनता था। फिर अपार्टमेंट्स की सीढ़ियों के नीचे अपना बिस्तर लगा लिया करते थे।

500 रुपए थी पहली कमाई
- इसी दौरान 1962 में उनकी मुलाकात प्रेमनाथ से हुयी। जो उस समय एक फिल्म गोलकुंडा का कैदी बना रहे थे। उन्होंने गीत लिखने मौका दिया। जिसके लिए उन्होंने "प्यार की राह दिखा दुनिया को रोके जो नफ़रत आंधी ,तुममे ही कोई गौतम होगा तुममे ही कोई गांधी "इसके लिए इन्हे 500 रुपया मिला।
- स्ट्रगल के दौर में पिताजी के पास दो जोड़ी पैंट-शर्ट थे, जिनको धोकर बारी-बारी पहना करते थे। उन्हें सफेद शर्ट, सफेद पैंट और सफेद चप्पल या जूता बहुत पसंद था।
ऐसे मिली पहचान
- इसके बाद छोटी-छोटी फिल्मों में काम मिलने लगा, लेकिन स्ट्रगल जारी रहा। इसी दौरान डायरेक्टर नरेंद्र बेदी से मुलाकात हुई। उन्होंने प्रोड्यूसर जीपी शिप्पी से मुलाकात करवाई। शिप्पी, राजेश खन्ना और मुमताज को लेकर एक फिल्म 'बंधन' बना रहे थे।
- फिल्म का संगीत कल्याण और आनंद जी के जिम्मे था। इसके लिए पिताजी ने पहला गीत लिखा- 'बिन बदरा के बिजुरिया कैसे चमकी' और दूसरा 'आ जाओ आ भी जाओ, हमको यू न सताओ।' ये गीत बहुत चर्चित हुआ और यहीं से पिताजी को पहचान मिली।

मुकद्दर का सिकंदर, डॉन के लिए लिखा गीत
- कुछ दिनों बाद प्रकाश मेहरा से मुलाकात हुई। उन्होंने अपनी फिल्म हेराफेरी के लिए गीत लिखने के लिए कहा।
- इसके बाद खून-पसीना, मुकद्दर का सिकंदर, डॉन जैसी सुपरहिट फिल्मों के गीत से पिताजी को वो पहचान मिली, जिसकी उन्हें ख्वाइश थी।
- इसके बाद फिल्म इंड्रस्टी में प्रकाश मेहरा, अमिताभ, कल्याण, आनंद और अंजान की सफल टीम मानी जाने लगी। धीरे-धीरे उनकी दोस्ती आनंद से गहरी होती गई। कभी देर हो जाती तो उन्हीं के यहां खाना खाते और वे उन्हें छोड़ने भी आ जाते।
गीतों में छलकता है दर्द
- शेखर ने बताया, पिताजी स्वाभिमानी थे। उन्होंने कभी किसी से मदद नहीं ली, चाहें उनका सगा भाई गोपाल जी ही क्यों न हो। उस समय गोपाल जी बड़े-बड़े प्रोड्यूसरों और डायरेक्टरों के पीआरओ हुआ करते थे और काफी अमीर भी थे।
- उनके कुछ गीतों में दिल का दर्द साफ झलकता है, जैसे- 'काहे पैसे पर इतना गुरुर करे है, यही पैसा तो अपनों से दूर करे है' और 'अपनी तो जैसे-तैसे कट जाएगी, आपका क्या होगा जनाबे अली।'
धर्मेंद्र से कही थी दिल का छू लेने वाली बात
- डायरेक्टर के. विश्वनाथ पिता जी को बहुत मानते थे। उन्होंने अपनी फिल्म संजोग और ईश्वर के गीत लिखवाए, जो सुपरहिट हुई। एक बार डायरेक्टर अर्जुन हिरानी, धर्मेंद्र और पिताजी के साथ बैठे हुए थे। कान से थोड़ा कम सुनाई देता था, इसलिए उन्होंने हिरानी से कहा, 'आप मुझे एक कान की मशीन दिलवा दीजिए, मेरे पैसे में से काट लीजिएगा।' यह बात धर्मेंद्र जी के दिल को छू गई, जिसका जिक्र धर्मेंद्र ने अपने एक प्रमोशन के दौरान किया था।
आगे की स्लाइड्स में देखें अंजान की 7 रेयर फोटोज...

आशा भोंसले, किशोर और बप्पी लहरी के साथ अंजान। आशा भोंसले, किशोर और बप्पी लहरी के साथ अंजान।
  • comment
बेटे समीर के साथ अंजान। बेटे समीर के साथ अंजान।
  • comment
अपने पिता के साथ अंजान की रेयर फोटो। अपने पिता के साथ अंजान की रेयर फोटो।
  • comment
lyricist Anjaan life story
  • comment
lyricist Anjaan life story
  • comment
lyricist Anjaan life story
  • comment
अंजान के बड़े बेटे शेखर और उनकी पत्नी। अंजान के बड़े बेटे शेखर और उनकी पत्नी।
  • comment
X
गीतकार अंजान का जन्म वाराणसी में हुआ था। 13 सितंबर 1997 उनका निधन हो गया था।गीतकार अंजान का जन्म वाराणसी में हुआ था। 13 सितंबर 1997 उनका निधन हो गया था।
आशा भोंसले, किशोर और बप्पी लहरी के साथ अंजान।आशा भोंसले, किशोर और बप्पी लहरी के साथ अंजान।
बेटे समीर के साथ अंजान।बेटे समीर के साथ अंजान।
अपने पिता के साथ अंजान की रेयर फोटो।अपने पिता के साथ अंजान की रेयर फोटो।
lyricist Anjaan life story
lyricist Anjaan life story
lyricist Anjaan life story
अंजान के बड़े बेटे शेखर और उनकी पत्नी।अंजान के बड़े बेटे शेखर और उनकी पत्नी।
COMMENT
Astrology

Recommended

Click to listen..
विज्ञापन
विज्ञापन
एप में पढ़ें