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सराहनीय / सीने व पेट से जुड़ी जुड़वा बहनों को मिली नई जिंदगी, साढ़े तीन घंटे के ऑपरेशन के बाद दोनों अलग-अलग



जुड़वा नवजात बहनें। जुड़वा नवजात बहनें।
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जुड़वा नवजात बहनें।जुड़वा नवजात बहनें।

  • बीते रविवार को जन्मी थीं जुड़वा बहनें
  • साढ़ तीन घंटे के ऑपरेशन के बाद डॉक्टरों ने बच्चियों की दी नई जिंदगी
  • बीएचयू के सर सुंदरलाल अस्पताल में हुआ ऑपरेशन

Dainik Bhaskar

Dec 07, 2018, 01:00 PM IST

वाराणसी. सीने व पेट से जुड़ी महज चार दिन आयु की जुड़वा बहनों को बीएचयू के डॉक्टरों ने ऑपरेशन कर अलग कर दिया है। 12 डॉक्टरों की टीम को इस ट्विंस सेपरेशन ऑपरेशन में करीब साढ़े तीन घंटे लगे। अब दोनों स्वस्थ्य हैं। दोनों बच्चियों की किलकारियां सुनकर माता-पिता भी गदगद हैं। इलाज के लिए बच्चियों को एनआईसीयू वार्ड में भर्ती किया गया है।

 

जौनपुर का रहने वाला है परिवार
जौनपुर जिले के गांव मड़ही चंदवक निवासी राजेश प्रजाति की पत्नी निशा देवी को पांच दिन पहले सैदपुर के एक अस्पताल में आपरेशन से जुड़वा बच्चियां पैदा हुई थीं। लेकिन बच्चियों के शरीर आपस में जुड़े थे। जन्मते ही बच्चियों की तकलीफें बढ़ने लगी। डॉक्टरों ने बताया कि दोनों बच्चियों के लीवर का बायां हिस्सा आपस में जुड़ा है। डॉक्टरों ने बीएचयू रेफर कर दिया। परिजनों ने बीएचयू के सर सुंदरलाल अस्पताल स्थित बाल शल्य वार्ड में चार दिसंबर को भर्ती कराया। यहां डॉक्टर वैभव पांडेय की टीम ने जांच के बाद आपरेशन किया है। 


चेस्ट और लिवर का एक हिस्सा आपस में जुड़ा था 
डॉक्टर वैभव ने बताया कि बच्च्यिां कंज्वाइन ट्विंस नामक बीमारी से ग्रसित थीं। पेट व छाती से जुड़ी हुई थी। लीवर का बायां हिस्सा एक ही था। बाकी अंग दोनों के अलग-अलग हैं। आपरेशन कर लेफ्ट पोर्टल बेन को बनाया गया। छाती की हड्डी भी काटी गई। फिर अगल-बगल की हड्डियों से इस गैप को पूरा किया गया। रेडियोलॉजी, एनेस्थीसिया और ओटी एक्सपर्टों की दो टीमें बनानी पड़ी थी। जिसमें 12 सदस्य शामिल थे। मात्र चार दिन की बच्ची होने के कारण इनको आपरेशन के लिए तैयार करना और बेहोश करना बहुत ही जटिल था। कारण कि दोनों को एक साथ बेहोश और उनका बीपी, शुगर आदि को भी मेंटेन रखना चुनौती थी। लीवर का कॉमन हिस्सा निकाल दिया गया। 

 

दो थे हार्ट, इसलिए आसान बनी राह; डॉक्टर वैभव ने बताया कि अगर हार्ट एक होता तो फिर एक को ही बचाया जा सकता था। लिवर दोनों का अलग होने के साथ एक हिस्सा कॉमन जुड़ा था। जिसे हटा दिया गया। सबसे क्रिटिकल इतने छोटे बच्चो की ब्लीडिंग कंट्रोल करना था। ऐसे ऑपरेशन का खर्च प्राइवेट अस्पतालों में करीब 6 लाख रुपए आता है। यहां मुफ्त में किया गया है।  
 

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