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1 से 900 रुपए के मास्क बाजार में, लेकिन सबसे जरूरी एन-95 मास्क गायब; ब्रांडेड सैनिटाइजर मांगने पर लोकल थमा रहे दुकानदार

एक वर्ष पहले
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वाराणसी में दुकान से मास्क की खरीददारी करते लोग। - Dainik Bhaskar
वाराणसी में दुकान से मास्क की खरीददारी करते लोग।
  • कालाबाजारी शिकायतों के बीच 3-4 रुपए कम में बेच रहे लोकल सैनिटाइजर, हालांकि इनकी मार्केट वेल्यू काफी कम
  • प्रशासन ने मास्क व सैनिटाइजर की कालाबाजारी रोकने के लिए चार टीमें बनाई, लेकिन एक्शन अब तक नहीं हुआ

वाराणसी. कोरोनावायरस का खतरा बढ़ते ही मास्क और सैनिटाइजर की डिमांड एकाएक बढ़ गई है। ऐसे में इनकी कालाबाजारी भी हो रही है। वाराणसी के बाजार में 1 रुपए से 900 रुपए तक के मास्क बिक रहे हैं, लेकिन सबसे जरूरी एन-95 लेबल का मास्क बाजार से गायब है। यह मास्क कोरोना व अन्य संक्रमण रोकने में सबसे कारगर माना जाता है। इसलिए इस मास्क की स्टाॅक इसे ज्यादा मांग वाले शहरों में ऊंचे दामों में बेचा जा रहा है। शहर में मास्क और सैनिटाइजर की स्थिति जानने के लिए हमने ग्राउंड पर रिपोर्ट ली।


हमारी टीम सबसे पहली रथयात्रा इलाके की एक मेडिकल स्टोर पर पहुंचे। यहां एक लोकल हलका मास्क था, जिसकी कीमत 40 रुपए बताई गई। दुकानदार से और मास्क दिखाने को कहा तो उसने कहा- यही है। इसके बाद हम वहां से सिगरा स्थित छोटा माल शॉप पर पहुंचे जहां 1 से 900 रुपए तक के मास्क बिक रहे थे। यहां दुकान के मालिक ऐसे लोगों को भी मास्क बांटते दिखाई दिए जिन्हें संक्रमण नहीं था। वो सस्ता मास्क फ्री में देकर लोगों को जागरूक कर रहे थे। उन्होंने बताया- बाजार में वही मास्क उपलब्ध हैं जो संक्रमण फैलने से पहले बने थे। 900 रुपए का मास्क पूरी तरह से संक्रमण से लोगों को बचाएगा। यह मास्क उसी को बेचा जा रहा है, जिसमें कोरोना के लक्षण हों।

ब्रांडेड मांगने पर लोकल सैनिटाइजर दे रहे दुकानदार
मास्क जैसी स्थिति सैनिटाइजर की भी है। हम एक मेडिकल स्टोर पर सैनिटाइजर लेने गए। दुकानदार से एक नामी कंपनी का सैनिटाइजर मांगा तो उसने लोकल कंपनी का क्लीनर हैंडरब लिक्विड लिखा सैनिटाइजर दिया गया। इस पर कीमत 99 रुपए दर्ज थी, लेकिन उसने 95 रुपए में बिल काट कर दिया गया। हमने पूछा कि सब जगह सैनिटाइजर की डिमांड होने के बावजूद आप इसे सस्ते में क्यों दे रहे हैं तो उसने कोई जवाब नहीं दिया। हमने पड़ताल की तो पता चल कि इस सैनिटाइजर की वेल्यू ब्रांडेड की तुलना में काफी कम है। इसमें कीटाणु मारने की क्षमता भी काफी कम है। जानकारों का दावा है- ऐसे सैनिटाइजर सिर्फ खुशबू देते हैं, सुरक्षा नहीं।

प्रशासन का दावा- टीमें बनाईं, पर कार्रवाई के सवाल पर मौन
बाजार से गुणवत्ता वाले मास्क और ब्रांडेड सैनिटाइजर गायब हैं। लोग इसकी कालाबाजारी का आरोप लगा रहे हैं। डीएम कौशल राज का कहना है- अस्पताल व ड्रग इंस्पेक्टर को 25 प्रतिशत मास्क रिजर्व में रखने के लिए कहा गया है। कालाबाजारी रोकने के लिए चार टीमें बनाई हैं। यह टीमें ज्यादा कीमतों पर मास्क और सैनिटाइजर बेचने वालों पर कार्रवाई करेगी। लेकिन, शहर में अब तक कालाबाजारी करने वालों पर एक भी कार्रवाई नहीं हुई। जिम्मेदार इस पर कुछ नहीं बोलते।

तीन लेयर का होता है एन-95 मास्क
एन 95 तीन लेयर का मास्क होता है। बीएचयू चेस्ट डिपार्टमेंट से रिटायर सीनियर डॉक्टर एके अग्रवाल ने बताया कि एन-95 मास्क 95 प्रतिशत धूल के कणों को रोकता है। इन कणों में कई बार बुखार, खांसी से संक्रमित लोगों के कण भी मिश्रित हो जाते है, जो इन कणों से आपको बचाते है। दूसरे मास्क इन कणों को कम रिफाइंड करते है। सबसे जरूरी है कि अपने हाथों को स्वच्छ रखें, क्योंकि कोरोना के वायरस ज्यादातर स्थानों पर हैंड टू हैंड फैले है।

जानिए अन्य मास्क के बारे में
एक रुपये वाले मास्क नार्मल कपड़े के होते है, जो धूल के कुछ कणों से बचाते है। यह सिंगल यूज के बाद बेकार हो जाता है। 10 रुपये वाला मास्क थोड़ा मोटे कपड़े का होता है। ये भी धूल से ही बचाता है। 40 से 100 रुपए वाले मास्क वातावरण में फैले डस्ट के छोटे कणों से सुरक्षित रखता है। 900 रुपये का जो मास्क बाजार में आया है वो दो लेयर का होता है और पूरे चेहरे को ढंक लेता है। अगर कोई संक्रमित व्यक्ति, जिसे सर्दी खांसी हो पास में छींकता या खांसता है और कोई बैक्टीरिया निकलता हैं, तो कवर्ड होने के कारण रोकता है। लेकिन, जानकर इसे कोरोना से पूर्णतः सुरक्षित नहीं मानते। ऊपरी हिस्सा चेहरे को ढंकता है और निचला हिस्सा जालीदार होता हैं, जो धूल के कणों से सेफ रखता हैं।