वाराणसी / मणिकर्णिका घाट पर मृत्यु और मोक्ष का अनूठा उत्सव, चिता भस्म से खेली होली

Dainik Bhaskar

Mar 18, 2019, 05:49 PM IST



holi 2019 varanasi manikarnika ghat bhasma holi played to please lord shiva
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holi 2019 varanasi manikarnika ghat bhasma holi played to please lord shiva

  • भोले भक्तों ने जलती चिताओं के बीच खेली भस्म होली
  • देश विदेश से आए लोगों ने अनूठी होली में की शिरकत

वाराणसी. महाश्मशान मणिकर्णिका घाट। जहां मृत्यु और मोक्ष का अनूठा उत्सव देखने को मिलता है। सोमवार को भोलेनाथ के भक्तों ने चिता भस्म होली खेली। सैकड़ों सालों से यह अनूठी परंपरा चली आ रही है। डमरुओं की गूंज में पहले भक्तों ने मणिकर्णिका घाट स्थित मशान नाथ मंदिर में आरती, पूजा कर भष्म अर्पित की।

 

मंदिर व्यवस्थापक गुलशन कपूर ने बताया कि ये उत्सव औघड़दानी, मशान नाथ के साथ होली का है। मान्यता है कि रंगभरी एकादशी के दूसरे दिन भोलेनाथ अपने भक्‍तों को महाश्‍मशान से आशीर्वाद देते हैं। बाबा अपने गणों के साथ महाश्मशान मणिकर्णिका पहुंचते हैं और गुलाल के साथ ही चिता भस्‍म से होली खेलते हैं। मंदिर व्यवस्थापक गुलशन कपूर ने बताया ये उत्सव औघड़दानी, मशान नाथ के साथ होली का होता है। बाबा को भष्म बहुत प्रिय है। भक्‍तों के बीच 'खेलैं मसाने में होरी दिगंबर...खेलैं मसाने में होरी के गीत संग फाग के गीत भी जुबान पर चढ़े नजर आए।

 

मणिकर्णिका में चिताओं की आग कभी बुझती नहीं

16 शताब्दी में राजा मान सिंह ने मसान मंदिर का निर्माण करवाया था। मान्यता है कि रंग भरी एकादशी के दिन बाबा मां गौरा का गौना कराकर अपने धाम लेकर आते हैं। बाबा देवी देवताओं और मनुष्यों संग होली खेलते हैं। लेकिन उनके प्रिय गण भूत प्रेत पिशाच, अदृश्य शक्तियां शामिल नहीं हो पाती, इसलिए बाबा दूसरे दिन मशान पर उनके साथ होली खेलते हैं। 

 

यहां हर दिन 100 शरीरों का होता है दहन

दाह संस्कार यहां 9, 5, 7, 11 मन लकड़ी से किया जाता है। एक मन में चालीस किलो होता है। बिषम अंक को शुभ माना जाता है। पंच पल्लव आम, नीम, पीपल, बरगद और पाकड़ की लकड़ियों से चिता जलती है। ऊपर से छोटा चन्दन का लकड़ी भी रखा जाता है। एक अनुमान के अनुसार हर दिन यहां 80 से 100 शवों की चिता सजती है। 4000 किलो लकड़ियां तीर्थ पर जलती है। 
  

जिसने भी पहली बार देखा ,बोला अद्भुत दृश्य 

बक्सर से शव लेकर आए मनोज भारती ने बताया उनके बड़े पिता जी का संस्कार हो रहा है। उनकी चिता पर बाबा को अर्पित भष्म उन्हें मोक्ष प्रदान करेगी। अलौकिक दृश्य है। जीवन में कभी नहीं देखा था। इजराइल से आए एमिट लुइ ने बताया कि, भगवन के साथ शवों के बीच कलर और बजता हुआ डमरू एक एनर्जी देता है। जिसे सिर्फ महसूस किया जा सकता है।

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