उप्र / बुद्ध पूर्णिमा पर आस्था की डुबकी लगा रहे श्रद्धालु, सुख शांति के लिए मंदिरों में कर रहे पूजा अर्चना

Dainik Bhaskar

May 18, 2019, 11:19 AM IST



संगम पर पूजा करती महिला श्रद्धालु। संगम पर पूजा करती महिला श्रद्धालु।
बनारस के सारनाथ में पहुंचे श्रद्धालु। बनारस के सारनाथ में पहुंचे श्रद्धालु।
People offer prayers at Sarnath temple near Varanasi on the occasion of budh purnima
People offer prayers at Sarnath temple near Varanasi on the occasion of budh purnima
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संगम पर पूजा करती महिला श्रद्धालु।संगम पर पूजा करती महिला श्रद्धालु।
बनारस के सारनाथ में पहुंचे श्रद्धालु।बनारस के सारनाथ में पहुंचे श्रद्धालु।
People offer prayers at Sarnath temple near Varanasi on the occasion of budh purnima
People offer prayers at Sarnath temple near Varanasi on the occasion of budh purnima

  • प्रयागराज और काशी में घाटों पर सुबह दिखी श्रद्धालुओं की भीड़
  • मंदिरों में पूजा अर्चना कर रह हैं लोग 

प्रयागराज/वाराणसी. उत्तर प्रदेश में तीर्थराज प्रयाग और धर्म की नगरी वाराणसी में बुद्ध पूर्णिमा के मौके पर लोग सुबह से ही आस्था की डुबकी लगाई और मंदिरों में पूजा-अर्चना की। श्रद्धालु मंदिरों में पूजा अर्चना कर परिवार की सुख शांति की कामना की।

 

वाराणसी और प्रयाग में सुबह से ही गंगा घाटों पर श्रद्धालु पवित्र स्नान करने पहुंचे। स्नान पर भीड़-भाड़ के चलते यातायात पुलिसकर्मी जगह जगह भीड़ नियंत्रित करते देखे गए। घाटों पर आम दिनों की अपेक्षा खासी चहल-पहल दिखी।

 

  • सनातन धर्म में वैशाख मास की पूर्णिमा को बुद्ध पूर्णिमा के रूप में मनाया जाता है। शास्त्रों में वैशाख पूर्णिमा का बड़ा महत्व है। इस दिन दान स्नान का पुण्य फल हजार गुना मिलता है। ज्योतिषाचार्य पंडित रामाकांत शर्मा शास्त्री के अनुसार बुद्ध पूर्णिमा पर समसप्तक संयोग बन रहा है। शनि केतु और मंगल राहु का 502 सालों के बाद दुर्लभ संयोग बन रहा है। 
  • उन्होंने बताया कि इससे पूर्व यह संयोग 16 मई 1517 में बना था और आगे ऐसा संयोग 205 वर्ष बाद 2 जून 2224 को बनेगा। इस दिन स्नान दान और पूजा पाठ करने से सारे कष्ट दूर हो जाते हैं। क्योंकि इस त्योहार को बहुत ही पवित्र और फलदाई माना गया है।
  • शास्त्री ने बताया कि कुछ मीठा दान करने से गोदान को दान करने के बराबर फल मिलता है। पूजा करने के लिए सबसे पहले विष्णु भगवान की प्रतिमा के सामने घी से भरा पात्र रखें इसके साथ ही तिल और चीनी भी रखें। 
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