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काशी में मुस्लिम महिलाओं ने खेली होली, ढोलक की थाप पर फगुआ गीतों से दिया एकता का संदेश

एक वर्ष पहले
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अबीर गुलाल व फूलों की होली खेलती मुस्लिम महिलाएं।
  • मुस्लिम महिला फाउंडेशन ने ‘चला होली खेलल जाय’ कार्यक्रम का किया आयोजन
  • 10 वर्षों से मुस्लिम महिलाएं होली खेलकर साम्प्रदायिक सौहार्द्र का दे रहीं सन्देश

वाराणसी. दुनिया भर में काशी की होली विख्यात है। सोमवार को लमही स्थित विशाल भारत संस्थान के सुभाष भवन में मुस्लिम फाउंडेशन ने 'चला होली खेलल जाय' कार्यक्रम का आयोजन किया गया। इसमें बड़ी संख्या में मुस्लिम महिलाओं ने होली का उत्सव मनाया। महिलाओं ने एक दूसरे को गुलाल लगाया, गीत गाया और एकता, शांति और भाईचारे का संदेश दिया। 

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मुस्लिम महिला फाउंडेशन की नेशनल सदर नाजनीन अंसारी ने कहा- होली समरसता, एकता, छूआछूत मुक्ति और मोहब्बत का त्यौहार है। जब हिंदू-मुसलमान मिलकर इस त्यौहार को मनाएंगे तो कट्टरपंथियों को नफरत फैलाने का मौका नहीं मिलेगा। रंगों में सराबोर होने से ही हम एक होते हैं वो चाहे राम के रंग में हो या अल्लाह की मोहब्बत में। इस्लामिक देशों में भी होली मनाने का चलन शुरू होना चाहिए।

भारत की साझा विरासत है सभी धर्मों का उत्सव मनाना
कार्यक्रम के मुख्य अतिथि विशाल भारत संस्थान के संस्थापक अध्यक्ष डॉ. राजीव श्रीवास्तव ने सुभाष मंदिर में गुलाल चढ़ाकर कार्यक्रम का शुभारम्भ किया। इस अवसर पर डॉ. राजीव श्रीवास्तव ने कहा कि मुस्लिम महिलाओं का यह प्रयास पूरी दुनिया को संदेश देने वाला है। धर्म के नाम पर हिंसा करने वालों को यह शांति का संदेश है। भारत की साझा विरासत तीज त्यौहारों को मिल जुलकर मनाने से बनी है।