कथा / गणेशजी ने कैसे तोड़ा कुबेर का घमंड?

Sep 11,2019 11:08 AM IST

देवताओं के कोषाध्यक्ष कुबेरदेव को इस बात का घमंड हो गया था कि वे देवताओं के धन के अधिपति हैं। वो देवताओं का धन खुद के कामों में उपयोग करने लगे। एक दिन वे शिवजी के पास गए और कहा कि मैं आपको अपने घर खाने पर बुलाना चाहता हूं। मैं चाहता हूं कि आप सपरिवार आएं और मेरे यहां भोजन करके तृप्त हो जाएं। शिवजी समझ गए कि कुबेर को घमंड हो गया है। तब शिवजी ने कहा कि हम सभी तो नहीं आएंगे, आप गणेश को ले जाएं। कुबेरदेव ने गणेशजी को आमंत्रित किया।
गणेशजी कुबेरदेव के महल पहुंच गए और कहा कि मुझे जल्दी खाना दो, भूख लगी। कुबेरदेव गणेशजी के क्रोध को जानते थे। इसीलिए उन्होंने तुरंत ही भोजन की व्यवस्था कर दी। गणेशजी खाने बैठ गए। इसके बाद कुबेरदेव खाना खिलाते रहे, लेकिन गणेशजी तृप्त नहीं हुए। धीरे-धीरे कुबेरदेव के घर का संपूर्ण अनाज खत्म हो गया, लेकिन गणेशजी भूखे ही थे। कुबेर ने गणेशजी के अनाज खत्म होने की बात कही तो वे और क्रोधित हो गए। गणेशजी ने कहा कि आपने तो कहा था कि आप हमें तृप्त कर देंगे। कुबेरदेव तुरंत ही शिवजी के पास पहुंचे और पूरी बात बता दी। पीछे-पीछे गणेशजी भी पहुंच गए। गणेशजी ने शिवजी से कहा कि आपने मुझे किस दरिद्र यहां खाने के लिए भेज दिया? खुद के लिए दरिद्र शब्द सुनकर कुबेरदेव का घमंड टूट गया। कुबेर समझ गए कि शिवजी ने उनका घमंड तोड़ने के लिए ये सब लीला रची है। कुबेरदेव ने शिवजी और गणेशजी के अपने किए कर्मों के लिए क्षमा मांगी और घमंड न करने का संकल्प लिया।