सहेली का प्रेमी:अतुल और मनन के प्यार में आंचल ऐसी उलझी कि जब सच सामने आया तो वह हैरान रह गई

21 दिन पहले
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आंचल, सोनम की पक्की सहेली थी। बचपन से ही दोनों साथ रहे, साथ खेले, इसीलिए दोनों एक दूसरे को बखूबी जानते थे। बचपन से एक ही स्कूल में पढ़े और अब बड़े होकर एक ही कॉलेज में पढ़ रहे थे।

सोनम सीधे स्वभाव की थी और आंचल उसकी बिल्कुल उलट, तेज-तर्रार और थोड़ा नटखट स्वभाव की थी।

एक दिन सोनम ने आंचल को बताया कि उसे कॉलेज में एक मनन नाम का लड़का बहुत पसंद है, पर उसे समझ नहीं आ रहा कि बात को आगे कैसे बढ़ाए। आंचल ने सोनम की मदद करने का फैसला लिया।

अगले दिन जब आंचल बस से कॉलेज जा रही थी तो उसने देखा एक लड़का उसके बगल में खड़ा है, उसके हाथ में कुछ किताबें हैं जो उससे संभल नहीं रहीं। आंचल को सीट मिलते ही उसने उस लड़के की किताबें पकड़ लीं और उस पर लिखा नाम पढ़ना चाहा। वो नाम पढ़कर हैरान हो गई, नाम था 'मनन अहूजा।'

आंचल ने सोनम की बात आगे बढ़ाने के लिए उस लड़के से दोस्ती करना सही समझा और उससे बातें करने के इरादे से पूछ बैठीम "विच ईयर एंड कोर्स?"

लड़के ने बस का खंभा पकड़ते हुए जवाब दिया, “जी मैं ट्रांसफर स्टूडेंट हूं, थर्ड ईयर, सोशियोलोजी।"

आंचल हैरान थी कि वो लड़का उसी की क्लास में था, उसने बिना समय गंवाए बोल दिया,"सेम पिंच!"

क्लास के बाद आंचल ने सोनम को बताया कि वो लड़का उसी की क्लास में है और मौका देख कर वो उसे सोनम के बारे में बताएगी।

धीरे-धीरे आंचल की दोस्ती मनन से होती गई और उसे आंचल का चंचल और बेबाक स्वभाव बहुत भाने लगा। यहीं दूसरी ओर आंचल को भी मनन बहुत पसंद था, पर वो सोनम को धोखा नहीं देना चाहती थी।

एक दिन मनन ने आंचल को बड़ी हिम्मत कर के कह दिया कि वो उसे बहुत पसंद करता है और कल उसके साथ फिल्म देखने जाना चाहता है।

आंचल का दिल मचल गया, आंखें भर आईं, वो कुछ कहे बिना ही वहां से चली गई।

अगले दिन आंचल ने सोनम को फिल्म देखने भेज दिया और खुद कॉलेज चली गई।

जैसे ही सोनम फिल्म हॉल के पास पहुंची वहां मनन की जगह कोई और ही खड़ा था इसलिए वो वापस आ गई।

वापस आ कर उसने आंचल को बताया के जिसे वो मनन समझ रही थी वो तो कोई और है।

आंचल यह सुन कर बहुत हैरान हुई और भागती हुई उस जगह पहुंच गई जहां उसे मनन ने बुलाया था। आंचल को आता देख वो लड़का बहुत खुश हुआ और उसे गले लगाते हुए बोला, "थैंक गॉड! तुम आ गई, मुझे लगा तुम नहीं आओगी।"

"तुम्हारा नाम मनन नहीं है? कौन हो तुम? "आंचल ने उसे झिड़कते हुए कहा।

"मनन! वो तो मेरा करीबी दोस्त है, मैं अतुल हूं। तुम मुझे इतने समय से मनन समझ रही थी? " अतुल ने बड़ी हैरानी से आंचल को देखते हुए कहा।

"उस दिन उन किताबों पर मनन लिखा था, मैंने अपनी आंखों से देखा था।" आंचल ने कहा।

"अरे पगली! वो किताबें तो मैंने मनन से ली थीं, मेरा बहुत सा सिलेबस पीछे रह गया था इसलिए" अतुल ने जवाब दिया।

इस पर आंचल बोली, “तो तुमने कभी मुझे बताया क्यों नहीं, मैं तो तुम्हें मनन ही समझती रही।”

“ओह! तो इसलिए तुम मुझे मन्नू बुलाती थी? मुझे तो लगता था कि प्यार से कहती हो।”

आंचल ने बात को संभालते हुए कहा, “खैर, जाने दो, नाम में क्या रखा है। मुझे तुम वाकई पसंद हो?

"ठीक कहा तुमने, सच तो ये है कि मैं भी तुम्हे चाहने लगा हूं," अतुल ने कहा।

आंचल ने यह सुन कर चैन की सांस ली। वो मन ही मन भगवान का शुक्रिया अदा कर रही थी कि ये वो लड़का नहीं है जो उसकी दोस्त को पसंद है।

"अब मूवी तो खत्म होने वाली होगी, तुम कहो तो अगला शो बुक कर लूं?” अतुल ने आंचल से पूछा।

"नहीं, चलो पार्क में चलते हैं, मुझे तुम से बहुत सी बातें करनी हैं।" यह कहते हुए आंचल ने अतुल का हाथ पकड़ लिया और उसे खींचती हुई पार्क की तरफ चल दी।

वहीं एक बैंच पर बैठ कर आंचल ने अतुल को सारी बात बता दी कि कैसे उसने सोनम के लिए उससे बात करना शुरू किया था और बाद में खुद ही उसे चाहने लगी।

उसकी बातें सुन कर अतुल हंसने लगा और बोला, “चलो अच्छा है, तुम्हारी गलतफहमी तो दूर हुई।"

आंचल ने अतुल को गले से लगा लिया और बोली, “अब तुम सिर्फ मेरे हो अतुल।"

अतुल ने उसके सिर पर प्यार से हाथ फेरते हुए बस इतना कहा, “हां, पगली, अब मैं सिर्फ तुम्हारा हूं!"

- हेमा काण्डपाल

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