काका ने कमजोर निगाहों से देखा:मानों उम्र के आखिरी पड़ाव में फिर मिलने का वादा कर रहे हों, काकी एक दूसरे की आंखो से...

5 महीने पहले
  • कॉपी लिंक

कितनी उम्र है दोनों की, शादी कब हुई, उन्हें कहां पता है वो ठहरे अनपढ़ छोटे किसान,वे दोनों बस इतना जानते हैं कि जीवन में अब ईश्वर का बुलावा आने के अलावा कोई काम नहीं रह गया है। उन्होंने एक दूसरे से प्रेम का इजहार भी कभी नहीं किया, न ही उस छोटे से गांव के अलावा उन्होंने आधुनिक दुनिया को देखा है। जब से होश संभाला है एक दूसरे का साथ पाया है, जो भी उनके साथ होता है उसे नियति का खेल मानकर स्वीकार कर लेते हैं। उन दोनों के नाम भी आज कोई नहीं जानता सभी काका-काकी कहकर ही पुकारते हैं।

आज सुबह-सुबह ही काकी उसे दूर खेत की तरफ से आती दिखीं, तो वो भी अपने घुटनों का दर्द भूलकर उसकी तरफ बढ़ चला। करीब पहुंचे तो काकी ने कहा, मैं आ रही हूं, तुम रुक जाओ पैर दर्द करेंगे बाद में, पर वो बिना रुके ही कहने लगा “दर्द तो तुम्हारें घुटने में भी है, फिर भी इतनी दूर से चली आ रही हो” दोनों खेत की मेड़ पर बैठ गए।

काकी ने धीरे से पूछा कल अमावस थी खीर बनाई होगी, छोटी बहु ने तुम्हें भी दी, क्या? “खीर बनी या नहीं मुझे तो नहीं पता खिचड़ी खाने को मिली मुझे” “तुमने तो खीर खाई होगी बड़ी बहू के यहां” वहां तो भैंस दूध दे रही है? काका ने भी सवाल दाग दिया। “हां खाई थी एक कटोरी” आंसू छिपाते हुए काकी ने कहा।

दोनों की बीच मौन पसर गया, चुप्पी तोड़ते हुए काकी ने कहा “ठीक है मैं चलती हूं, पेट दर्द रुकमा को दिखाने का बहाना करके घर से आयी थी, चौके में बर्तन पड़े हैं,बहु खेत में जाने की जल्दी में धो नहीं पायेगी,तुम भी जाओ पोता रोयेगा, तो छोटी बहु संभाल नहीं पायेगी। न चाहते हुए भी दोनों अपनी-अपनी राह की ओर चल पड़े।

कितने अरमानों से दो खेत खरीदे थे, दोनों ने कर्ज लेकर,दोनों खेत गांव के दोनों छोर पर थे,लेना तो वो पास में ही चाहते थे पर मिल नहीं सके, सोचा खुद की जमीन तो होगी दूर ही सही, किस्मत का क्या पता था ऐसा दिन दिखायेगी, बंटवारा घर और खेतों का ही नहीं पति-पत्नी का भी होगा। घुटनों के दर्द से कराहते दोनों जीवों के बीच दूरी बढ़ रही थी, कि विपरीत दिशा में जाते हुए दोनों ने कमजोर होती निगाहों से एक दूसरे को मुड़कर देखा मानों फिर मिलने का वादा कर रहे हो,उम्र के आखिरी पड़ाव में आई विरह वेदना के बोझ तले दबे काका-काकी एक दूसरे की आंखो से थोड़ी देर बाद ओझल हो गए।

- सन्नी डांगी चौधरी

E-इश्क के लिए अपनी कहानी इस आईडी पर भेजें: db.women@dbcorp.in

सब्जेक्ट लाइन में E-इश्क लिखना न भूलें