E-इश्क:लड़का-लड़की कभी अच्छे दोस्त नहीं हो सकते, उनके बीच सिर्फ स्त्री-पुरुष का रिश्ता होता है

6 महीने पहले
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हाथ में पकड़ी मैगजीन टेबल पर रख कर कमरे की तरफ अंजना जी मुड़ ही रही थीं कि नजर बंगले में अंदर आती मोटर साइकिल पर पड़ी, "लो आ गया!" उनके मुंह से धीरे से निकला।

तेज बारिश में वह जब तेज रफ्तार से बाइक चलाकर बंगले के अंदर आया, तो अंजना जी का कलेजा धक्क से रह गया, बाइक दीवार से टकरा जाती या बारिश में फिसल जाती तो? हर दिन ऐसी ही दुर्घटनाओं की खबरें सुनाई देती रहती हैं, पर ये जवान लड़के समझते ही कहां हैं।

अंदर आए एक पल भी नहीं बीता कि वह एक सांस में बोल पड़ा, "आंटी, जरा जल्दी से नीना को बाहर भेज दीजिए।"

अंजना जी उसे एकटक देखती रह गयीं। वह कुछ कहतीं, इससे पहले वह फिर बोला, "क्या हुआ आंटी, नीना घर पर नहीं है क्या ?"

अगले ही पल उन्होंने नीना को पुकारा, "नीना बेटे, संभव आया है।"

"आती हूं मम्मा," अंदर कमरे से आवाज आई। जवाब सुनने के बाद अंजना जी बोलीं,

"आ रही है बेटे, शायद तैयार हो रही है।"

अंजना जी को याद आया, पिछले एक घंटे से नीना तैयार ही तो हो रही है। आखिर तैयार होने में देर ही कितनी लगती है? फिर अगले पल मुस्कुरा उठीं, क्योंकि युवा मन की चंचलता को वह भली-भांति समझ सकती थीं, कभी वह भी तो इसी उम्र से गुजरी थीं।

तभी नीना ने कमरे में प्रवेश किया, "कहां है संभव मम्मी?"

जब तक अंजना जी कोई जवाब देतीं, उससे पहले ही वो संभव के पास पहुंच चुकी थी।

संभव को देखते ही बोली, "हाय संभव!"

"पार्टी में छह बजे पहुंचना था और तुम सवा छह बजे तक तैयार ही हो रही हो"

"क्यों, तुम भी तो अभी आए हो?" नीना ठुनक कर बोली।

"अब जल्दी से चलो मेरे साथ।”

"पहले बताओ मैं कैसी लग रही हूं?"

"इतनी दूर खड़ी हो, पहले पास तो आओ...!"

"आती हूं..."

फिर वह अंजना जी की ओर मुड़कर बोली, "मम्मा, मैं रश्मि के यहां पार्टी में जा रही हूं, शायद देर हो जाए।"

और मां की प्रतिक्रिया की परवाह किए बगैर वो बाइक के पास जाकर खड़ी हो गई।

"बहुत सुंदर लग रही हो, पता नहीं आज कितने दिलों पर बिजलियां गिराओगी!" नीना के माथे पर लगी टेढ़ी बिंदी को भौंहों के बीच ठीक से लगाते हुए संभव ने कहा।

"तुम भी मेरी तरह स्मार्ट लगते अगर तुमने लाल की जगह काली टी शर्ट पहनी होती तो!”

युवावस्था की दहलीज पर खड़ी अपनी बेटी के तौर तरीकों को देख अंजना जी की आंखों की नींद उड़ी रहती। कितना परिवर्तन आ जाता है एक पीढ़ी से दूसरी पीढ़ी के अंतराल में! ये हर दिन की पार्टियां, कहकहे, डिस्को और संगीत की धुन पर थिरकते इनके युवा शरीर। बेटी के घर आने की चिंता में वह कुर्सी पर बैठे-बैठे ऊंघने लगी थीं।

रात ग्यारह बजे कोई गीत गुनगुनाते हुए नीना वापस लौटी। वह सीढ़ियां चढ़ ही रही थीं कि अंजना जी ने पुकारा, "नीना! रुको मुझे तुमसे कुछ कहना है।"

"मम्मा, आप अभी तक जग रही हैं?"

"हां बेटा, जब बच्चे बड़े हो जाते हैं तो मां-बाप को जागना ही पड़ता है कि कहीं बच्चों के कदम गलत रास्तों पर न पड़ जाएं?"

"मम्मा, रिलैक्स। मैं कभी भी कोई ऐसा काम नहीं करूंगी जिसके लिए आपको पछताना पड़े।"

"तो फिर ये बात सच-सच बताना कि तुम्हारे और संभव के बीच कैसे संबंध हैं?"

"वो मेरा बॉयफ्रेंड बस।"

कुछ देर तक अंजना जी चुप रहीं, फिर कहीं शून्य में ताकते हुए बोलीं,

"नीना, अब तुम्हारी उम्र शादी के लायक हो गई है। जल्दी ही मैं तेरा बायोडेटा मैरिज ब्यूरो और ऐप्स को भेजने के लिए सोच रही हूं, इसीलिए पूछ रही थी।"

"लेकिन इतनी जल्दी..?" नीना ने झुंझलाते हुए कहा।

"बेटी पराया धन होती है। एक न एक दिन तुझे पराए घर तो जाना ही है और ये काम समय पर हो जाय तो अच्छा ही है।"

कुछ दिन बाद उन्होंने एक साइट से नीना के लिए विनीत का चुनाव किया। सुंदर, सुदर्शन, शिक्षित होने के साथ ही वो एक बैंक में अच्छे पद पर था। परिवार भी अच्छा था। पूरी जांच पड़ताल के बाद मीटिंग का समय तय हो गया।

अब नीना और विनीत आमने सामने थे। बिल्कुल अकेले। दोनों के बीच गहरी चुप्पी थी। आखिर विनीत ने चुप्पी तोड़ी,

"शायद आप कुछ सोच रही हैं?"

"जी..नहीं तो.."

नीना को इस प्रकार चौंकते देखकर विनीत के चेहरे पर मुस्कुराहट दौड़ गयी, "तो फिर आप चौंकीं क्यों?"

"जी… वो…”

तभी संभव की आवाज गूंजी, "नी...ना..."

आवाज सुनते ही नीना सब कुछ छोड़ छाड़कर बाल्कनी की तरफ दौड़ी।

"क्यों, अब टाइम मिला है तुम्हें?"

"क्या बताऊं नीना, मुझे मम्मी को जरूरी शॉपिंग के लिए ले जाना पड़ा।"

"ओके, अब जल्दी से ऊपर आओ।"

ऊपर आने के बाद नीना ने विनीत से संभव का परिचय करवाया।

"इनसे मिलो, माई फ्रेंड।”

"फ्रेंड नहीं बेस्ट फ्रेंड।"

अगले दिन संभव और नीना पार्क की मखमली घास पर बैठे बातें कर रहे थे।

"संभव, जानते हो विनीत ने मुझसे शादी करने से इनकार कर दिया।"

"क्यों? आखिर उसे तुम में क्या कमी नजर आयी?"

"उसने तुम्हारी और मेरी दोस्ती को शक की निगाहों से देखा है।"

संभव को विनीत पर गुस्सा तो बहुत आया, लेकिन उसने नीना के सामने जाहिर नहीं किया, पर उसे नीना की आंखें गीलीं लगीं।

"ऐसे इंसान के लिए अपने आसुओं को जाया मत करो। चिंता मत करो, मैं विनीत से बात करता हूं।"

"नहीं, तुम्हें उससे बात करने की कोई जरूरत नहीं है। मैं खुद भी ऐसे इंसान से शादी नहीं करना चाहती जिसे मुझ पर विश्वास ही नहीं है।"

संभव ने कोई विरोध नहीं किया, क्योंकि वो जानता था, नीना अपनी जिद से हटने वाली नहीं है।

"अच्छा चलो, किसी कैफे में चल कर बैठते हैं। एक कप कॉफी पीने का मन कर रहा है।"

कैफे पहुंचते ही नीना की नजर कॉर्नर टेबल पर बैठे हुए एक जोड़े पर ठहर गई। दोनों बातों में इतने मशगूल थे कि उनका इस तरफ ध्यान ही नहीं गया कि कोई उन्हें देख रहा है।

"संभव, क्या तुम भी वही देख रहे हो जो मै देख पा रही हूं?"

"हां! तुम मेरे साथ आओ।"

संभव और नीना दोनों उस टेबल की ओर बढ़े जहां विनीत एक युवती के साथ बैठा था।

"हेलो विनीत!" संभव ने धीमे लहजे में विनीत का अभिवादन किया।

"अपनी मंगेतर से हमारा परिचय नहीं करवाओगे?"

"मंगेतर..? नहीं… ये तो मेरी फ्रेंड है… बेस्ट फ्रेंड।”

फ्रेंड शब्द सुनकर नीना को कुछ राहत तो हुई, लेकिन अभी बहुत कुछ बाकी था।

"लड़का-लड़की कभी अच्छे दोस्त नहीं हो सकते, उनके बीच सिर्फ स्त्री-पुरुष का रिश्ता होता है, है ना संभव?" नीना ने संभव की ओर देखकर तंज कसा।

"सॉरी…" विनीत की जुबान बुरी तरह लड़खड़ाने लगी।

"सॉरी-वॉरी छोड़ो, ये बताओ शादी कब कर रहे हो तुम दोनों? भई हम दोनों तो अपना रिश्ता दोस्ती से आगे बढ़ा ही नहीं पाए," संभव ने खिलखिलाते हुए कहा।

विनीत की फ्रेंड जो अब तक सारा माजरा समझ चुकी थी। बोली, "देखो संभव और नीना, अगर विनीत अपनी गलती समझ रहा है तो इसे माफ कर दो।"

संभव ने सहमति में सिर हिलाते हुए हामी भरी और नीना के साथ वह वहां से चला गया।

रास्ते में चलते हुए नीना अपनी बात संभव को समझा रही थी, "देखो, तुम मुझसे कभी जिद मत करना कि मैं विनीत से शादी करूंगी। जो इंसान मुझे शक की नजरों से देखता हो उसे मैं अपना जीवनसाथी कभी नहीं बनाउंगी। मैं उसे कभी माफ नहीं कर सकती!"

"नीना, सिर्फ इस बार माफ कर दो।"

"नहीं..!" नीना दृढ़ता से बोली।

वह संभव को घसीटते हुए ले जाते हुए बोले जा रही थी, “तुम्हारा दिमाग खराब है संभव? क्या मैं इतने तंग दिमाग आदमी से शादी करूंगी? क्या ऐसा हो सकता है?”

संभव उसे देखकर मुस्कुराए जा रहा था।

उस दिन नीना को घर छोड़ने के बाद संभव अंजना जी के साथ काफी देर तक बैठा रहा।

ठीक एक महीने बाद अंजना जी अपनी बेटी की शादी के कॉर्ड बंटवा रही थीं, शीर्ष पर लिखा था- ‘नीना वेड्स संभव’

- पुष्पा भाटिया

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