E-इश्क:महंगी चीजों का फितूर तुम्हें मुसीबत में न डाल दे जूही, चादर जितने पैर फैलाने में हर्ज क्या है?

6 महीने पहले
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वैभव ने जैसे ही अपनी सगाई की डेट अनाउंस की सभी उससे एडवांस में पार्टी की डिमांड करने लगे और वैभव ने पार्टी दी। वैभव ने पार्टी में दिल खोलकर खर्च किया।

सपना अब सगाई की अंगूठी देखना चाहती थी। उसके वैभव से कहा, "सगाई की अंगूठी खरीद ली है क्या?"

"नहीं, अभी सिर्फ डिजाइन पसंद किया है।"

सपना ने उत्सुकता से कहा, "तो डिजाइन दिखा दो।"

वैभव के मोबाइल पर अंगूठी का डिजाइन और कीमत देखकर सपना चौंक गई। "तुम अपनी मंगेतर के लिए एक लाख की अंगूठी खरीद रहे हो?"

अंगूठी की कीमत जानकर सब हौरान थे, लेकिन मुझे आश्चर्य नहीं हुआ। मुझे जूही की याद आ गई, जिसे हम सभी ‘प्राइस टैग’ के नाम से बुलाते थे।

कॉलेज में हर कोई जूही की महंगी चीजें खरीदने और उनका शो ऑफ करने की आदत से वाकिफ था। वह कुछ भी खरीदती तो सबसे पहले उसकी कीमत बताती। सस्ती चीजें खरीदना जैसे उसकी शान के खिलाफ था, उसके वश में होता तो कैंटीन से समोसे भी पांच सौ रुपए प्लेट खरीदती।

वो मुझे पसंद करती थी और अक्सर सबके सामने अपने दिल की बात कह देती थी।

मुझे उससे डर लगता, क्योंकि जैसा लाइफस्टाइल वह चाहती थी, वो मेरे बस की बात नहीं थी।

मैं उससे दूर ही रहता, क्योंकि मैं ऐसे घर से था, जहां कॉलेज की फीस जुटाने के लिए पार्ट टाइम नौकरी करनी पड़ती थी। जितना मैं कमाता था, उससे ज्यादा उसका जेबखर्च था।

मुझे उससे चिढ़ इसलिए होती थी, क्योंकि वह ये सब दिखावे के लिए करती थी। मेरी तरह वो भी कॉलेज के बाद पार्ट टाइम जॉब करती, लेकिन अपनी सारी कमाई महंगी चीजें खरीदने में खर्च कर देती।

एक दिन मैंने जूही को डांटते हुए कहा, "तुम इतनी भी अमीर नहीं हो कि इस तरह पैसे बर्बाद करो, फिर इतनी महंगी चीजें क्यों खरीदती हो? ये सब दिखावा करके तुम्हें क्या खुशी मिलती है? क्यों करती हो ये सब? इन पैसों को बचाकर रखोगी, तो कितनी सेविंग हो जाएगी।"

"अविनाश, मैं ऐसा इसलिए करती हूं, ताकि खुद को इतना काबिल बना सकूं कि किसी चीज को खरीदने से पहले उसकी कीमत न देखनी पड़े। मैंने अपने मम्मी-पापा को हमेशा कटौती करते देखा है। वे हमेशा पैसे बचाने के बारे में सोचते हैं, कमाने के बारे में नहीं, इसीलिए आज भी हम वहीं हैं जहां 20 साल पहले थे। वे मुझे भी जॉब करने से रोकते हैं, उनका मानना है कि अभी मैं सिर्फ पढ़ाई पर ध्यान दूं, लेकिन मैं ऐसा नहीं कर सकती। आगे बढ़ना है तो एक्स्ट्रा मेहनत करनी पड़ेगी।"

"आगे बढ़ने के लिए क्या अपनी कमाई को भी महंगी चीजें खरीदने में फूंक देना चाहिए?" मेरा गुस्सा और बढ़ गया।

"नहीं, महंगी चीजें इसलिए खरीदनी चाहिए, ताकि उन्हें खरीदने के लिए आप और ज्यादा मेहनत करें और अपनी लाइफस्टाइल अपग्रेड करें।"

"लेकिन इसका फायदा क्या है जूही?"

"ये प्राइज टैग हमें बताते हैं कि हम इतने सक्षम हैं कि जो भी चीज पसंद आ जाए, उसे खरीद सकते हैं, हम कीमत देखकर तय नहीं करते कि वो चीज खरीदनी है या नहीं।"

"महंगी चीजों का ये फितूर तुम्हें किसी दिन मुसीबत में न डाल दे जूही, अपनी चादर जितने पैर फैलाने में हर्ज क्या है?"

"एक दिन तुम मेरे इसी फितूर की तारीफ करोगे। अगले साल मैं अपनी मौसी के पास कनाडा जा रही हूं। वहां पढ़ाई के साथ-साथ नौकरी भी करूंगी।"

"क्या वहां भी महंगी चीजें खरीदने जा रही हो?"

"ये जानने के लिए तुम्हें भी कनाडा आना होगा।" उसने मुझे छेड़ते हुए कहा।

"मैं यहीं ठीक हूं मैडम जी, आप जाइए और महंगी चीजों से अपनी दुनिया सजाइए।"

"इतनी आसानी से तुम्हारा पीछा नहीं छोडूंगी मिस्टर अविनाश। मैं कनाडा से तुम्हें अपनी शॉपिंग की पिक्चर्स भेजूंगी।"

"तुम और तुम्हारी शॉपिंग!" मैं वहां से उठकर लायब्रेरी चला गया।

जैसा कि जूही ने बताया, वो इस समय कनाडा में है। पढ़ाई के साथ दो-दो पार्ट टाइम जॉब करती है, लेकिन अपनी लाइफस्टाइल में कोई कमी नहीं आने देती। नियम से हर वीकेंड पर मुझे वीडियो कॉल करती है और मेरे साथ जिंदगी बिताने के सपने देखती है।

कभी अकेले में सोचता हूं, तो समझ नहीं पाता कि जूही सही है या मैं। क्या हम दो तरह से सोचने वाले लोग जिंदगीभर साथ रह पाएंगे? जिंदगी में आगे बढ़ने के लिए क्या मुझे भी अपने खर्चे बढ़ाने होंगे? वो क्या चीज है जो जूही और मुझे अलग बनाती है?

मैं अपनी सोच में डूबा था कि वैभव की फोटो दिखाने की सभी की मांग पर मैं चौंका। सपना चिल्लाकर कह रही थी कि अंगूठी की फोटो दिखा दी, अब अंगूठी पहनने वाली की भी फोटो दिखाओ। वैभव काफी देर तक ना नुकुर करता रहा, लेकिन सपना की जिद पर उसने फोटो दिखा दी। सबके हाथों से होते हुए जब वैभव का मोबाइल मेरे हाथों में आया, तो फोटो देखते ही मेरे हाथ से मोबाइल छूटकर गिर गया। फोटो में प्राइस टैग वाली जूही मुस्कुरा रही थी। मैं समझ नहीं पाया कि मेरा दिल खुश हुआ या टूटा है।

- कमला बडोनी

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