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E-इश्क:मेरी इस मोहब्बत पर समाज और परिवार की कयामत भी बरसी, लेकिन मेरे सपनों का राजकुमार ढाल बन खड़ा हो गया

4 दिन पहलेलेखक: प्रेरणा झा
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सुबह उठने के बाद हर दिन मैं शख्स को गुड मॉर्निंग का मैसेज भेजती हूं, लेकिन उधर से कभी जवाब नहीं आता। जानती हूं, वो मुझे जवाब नहीं देगा। मेरा साथ नहीं देगा। फिर भी मैं उसको खुद में जिंदा रखती हूं, उससे बेइंतहा मोहब्बत करती हूं।

मुझे आज भी याद है कि कॉलेज का पहला दिन था। थोड़ा सहमी और सकुचाती हुई मैं क्लास में पहुंची। अपने आसपास बैठे सहपाठियों पर नजर डाली। सहपाठियों से बात करने के लिए खड़ी हुई ही थी, तभी तीन-चार लड़के-लड़कियां दनदनाते हुए क्लास में आ धमके। हम लोग कुछ समझ पाते, इससे पहले ही उन्होंने अपना फरमान सुनाया- 'क्लास के बाद सभी को हॉल में आना है। सारी कलाकारी वहीं देखी जाएगी।' लेकिन उनमें से एक की नजरें मुझे पर ठहर गईं थीं। हालांकि, जैसे ही मैंने देखने की कोशिश की, उसने हेकड़ी दिखाते हुए घोषणा की सबको टाइम पर पहुंचना है। दरअसल, मैंने कॉलेज ऑफ आर्ट एंड क्राफ्ट, पटना में फाइन आर्ट की डिग्री के लिए दाखिला लिया था और ये लोग मेरे सीनियर थे, जान-पहचान के नाम पर रैगिंग के कार्यक्रम का न्योता देने आए थे।

अपने सभी सहपाठियों के साथ मैं भी हॉल में पहुंच गई। रैगिंग का कार्यक्रम शुरू हुआ। मेरे साथियों को एक से बढ़कर एक ऊटपटांग टास्क दिए गए, लेकिन जैसे ही मेरा नंबर आया, तभी क्लास में मुझे गौर से देखने वाले उस लड़के ने हाथ से इशारा कर अपने साथियों से रुकने को कहा। फिर मुझसे कहा, तो तुम आर्टिस्ट बनोगी, चलो मेरा पोर्ट्रेट बनाओ। फिर देखते हैं कि तुम आर्टिस्ट बनोगी या पेंटर बाबू..उसकी इस लाइन पर सब हंस पड़े, लेकिन मैं अंदर तक किलस गई। खैर, मैंने पोर्ट्रेट बनाया। जैसे ही सबने देखा, इस बार जूनियर-सीनियर सब हंस पड़े, मैंने उस लड़के की जगह बंदर का पोर्ट्रेट बनाया था। उसने मेरी और गौर से देखा और मैं कुटिल मुस्कुराहट के साथ हॉल से बाहर निकल गई।

खैर, रैगिंग के दौरान जो मैंने किया, उसके बाद सीनियर्स के प्रकोप के लिए मैंने खुद को तैयार कर लिया था, लेकिन हुआ मेरी कल्पना के एकदम उलट। कोई दो-तीन रोज बाद उस लड़के ने मुझे प्रपोज कर दिया। मुझे लगा कि वह बदला लेने की एक चाल हो सकती है और मैं बिना कुछ कहे निकल गई। दिन महीनों में बदलते गए, लेकिन मेरी बेरुखी से वो तंग नहीं आया। जहां जरूरत होती, वहां वो मेरी मदद को खड़ा मिलता। आखिरकार मुझे भी उसके प्यार से प्यार हो गया।

मेरी जिंदगी बिल्कुल परियों की कहानी जैसी हो गई। मेरी इस मोहब्बत पर समाज और परिवार की कयामत भी बरसी, लेकिन मेरे सपनों का राजकुमार ढाल बन खड़ा हो गया। उसने मुझे ऊंची उड़ान के लिए हुनर के पंख थमा दिए। मेरे सपनों को आसमान दिया। वो मेरी छोटी-बड़ी हर ख्वाहिश पूरी करता और इस तरह 24 साल गुजर गए और उसने मेरी जिंदगी से शॉर्ट कट ले लिया। अब वो इस दुनिया में नहीं है, लेकिन मेरे मोबाइल में उसका नंबर है, जिससे मैं उसको अपनी सारी बातें कहती हूं..बस जवाब की उम्मीद नहीं रखती।

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