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E-इश्क:ऐसा नहीं था कि ऑफिस में उसे नया असाइनमेंट मिला था, पर एक हफ्ते से वह देर से घर जाने लगा था। ये सब कॉलीग भी नोटिस कर रहे थे।

8 दिन पहलेलेखक: भारत सिंह
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आज फिर ड्रॉअर खोलते ही उसे कंपनी का अग्रीमेंट रिन्यूअल लेटर दिख गया जिसे वो दो हफ्तों से अनदेखा कर रहा था। तीन बार एचआर से रिमाइंडर आ चुका था कि लेटर जल्द से जल्द साइन करके दो। तीन साल से इस ऑफिस में काम करते हुए उसे लगता था मानो वह यहां दस साल गुजार चुका है। ऑफिस के वॉशरूम मिरर में अपनी शक्ल कम, उम्र ज्यादा नजर आने लगी थी। उसे लगता था कि ऑफिस की दीवारें, ड्रॉअर, डेस्क, कैंटीन, वॉशरूम, मीटिंग रूम, सीलिंग्स, लाइट्स सब मुस्कुराते हुए उसे चिढ़ाते हैं। सिक्योरिटी गार्ड, लिफ्टमैन या पैंट्री बॉय जब भी उसका अच्छा मूड देखते तो उसे विश करते, लेकिन उसे लगता कि ये सब पूछ रहे हैं, सर और कितने दिन इसी ऑफिस में रहोगे? वह घर से ऑफिस के लिए बेमन निकलता और वापसी में उसकी हालत ऐसी होती थी जैसे बचपन में स्कूल की छुट्टी के बाद होती थी।

वह इसी कश्मकश में था कि नौकरी कैसे छोड़ी जाए। पहले तो यह भी सोचता था कि नौकरी छोड़ने के बाद क्या करेगा, पर अब उसकी सोच का दायरा इतना ही था कि रिजाइन कब देना है। ऐसा नहीं था कि बॉस ने उसका जीना हराम कर दिया हो या फिर काम में कोई परेशानी हो। बस उसके अंदर इस नौकरी की भूख नहीं रह गई थी। पांच साल के करियर में वह तीसरी जॉब कर रहा था। कहीं टिककर काम नहीं किया। शायद उसका नेचर ही ऐसा था कि किसी काम को अंजाम तक पहुंचाने से पहले किनारे खड़े होकर ऐसे देखना जैसे तमाशबीन होते हैं। उसे ऑफिस में टिकने या काम में मन लगाने की वजह नहीं मिल रही थी और जॉब के अलावा लाइफ में ऐसा कुछ था नहीं जो कहीं भी टिके रहने की एनर्जी दे सके।

मंडे था तो ट्रैफिक से बचने के लिए जल्दी ऑफिस पहुंच गया था। उसे अपनी से अगली डेस्क पर एक नई लड़की दिखाई थी। फेस मास्क था तो चेहरा नहीं देख सका, पर वह उसकी आंखों, माथे, बाल और कानों को देखकर उसकी तस्वीर अपने दिमाग में बनाता-बिगाड़ता रहा। दस बजते ही सन्न से एचआर डिपार्टमेंट का न्यू जॉइनी का मेल आया। उसने तुरंत उसे खोला, पर उसमें भी कई लड़कियां थीं और ज्यादातर एक जैसी ही। उसके दिमाग में और कई तस्वीरें बनने-बिगड़ने लगीं। इसी उधेड़बुन में कब लंच टाइम हो गया पता ही नहीं चला। लंच करने गया तो देखा, वही बगल की डेस्क वाली लड़की उसकी ओर पीठ करके बैठी खाना खा रही थी। वह उसके सामने से होता हुआ आया। उसने लड़की का चेहरा पढ़ने की कोशिश की, पर उसमें उसे चुपचाप खाना खत्म करती लड़की के अलावा कुछ नहीं दिखा। वह उसी टेबल पर आकर बैठ गया।

सामने की टेबल पर बैठकर उसने लड़की को हाय किया और बताया कि वे दोनों सेम डिपार्टमेंट में हैं। लड़की के रिएक्शन से लगा कि उसके पास दुनियाभर की बेमतलब जानकारियों में इजाफा भर हुआ है। लेकिन उसने मुस्कुराकर अपना नाम बताया। दोनों के बीच बातचीत शुरू हो चुकी थी। ऐसा नहीं था कि ऑफिस में उसे नया असाइनमेंट मिला था, पर एक हफ्ते से वह देर से घर जाने लगा था। ये सब कॉलीग भी नोटिस कर रहे थे। ऑफिस जल्दी आना और घर देर से जाना होने लगा था। कई बार तो घर बस सोने के लिए आता था। अक्सर वह और लड़की साथ ही आते-जाते थे। फोन पर ऑफिशियल रिपोर्ट और जोक्स शेयर होने लगे थे। वह कई बार सोचता कि आज साफ-साफ बात कर लूं, लेकिन फिर से मैसेज में कुछ लिखता और बाकी लड़की के डिकोड करने के लिए छोड़ देता।

आज फिर उसे लड़की को पिक करते हुए ऑफिस पहुंचना था। जैसे ही फ्लैट का गेट लॉक करके उसने मोबाइल में नोटिफिकेशन चेक किए तो पहला मैसेज लड़की का ही दिखा। लड़की ने वीकेंड पर होने वाली अपनी एंगेजमेंट का वॉट्सऐप इन्वाइट भेजा था। नीचे लिखा था कि जो पीटर इंग्लैंड की फ्रेंच ब्लू कलर की शर्ट और ट्राउजर अभी खरीदी है, वही पहनकर आना। लड़के के चेहरे पर हल्की सी मुस्कुराहट के बाद एक-एक करके कई भाव गुजर गए। उसे लगा कि अभी से ऑफिस के लिए निकला तो एक घंटा पहले पहुंच जाएगा। वह गेट खोलकर अंदर चला गया।

लड़की की एंगेजमेंट वाले दिन उसका ऑफिस में खास मन नहीं लगा। वैसे तो उसे केवल कपड़े चेंज करके एक गिफ्ट ही लेना था, पर आज वह लंच के बाद ही घर आ गया था। पार्टी के लिए तैयार होने से ज्यादा समय उसे खुद को तैयार करने में जो लगना था। वहां पहुंचकर उसे लड़की को ज्यादा नहीं तलाशना पड़ा। वह दूर से ही नजर आ गई थी। लड़के की ना-ना कहने के बावजूद लड़की ने उसे पापा और दादी से मिलवाया और कहा- "यहीं रुको, मैं सिर्फ कहने भर को अपनी स्टेप मॉम पर अपनी मां से भी तुम्हें मिलवाती हूं।" लेकिन वह स्नैक्स काउंटर की ओर बढ़ गया। दूर से उसने देखा, उसकी खट्ठी-मीठी यादों में बसा एक जाना-पहचाना चेहरा लड़की के साथ उसकी तरफ बढ़ रहा है। लड़के को नहीं पता था कि बीस साल पहले उसके पापा से अलग हुई उसकी मॉम आज भी इसी शहर में मौजूद है।

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