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E-इश्क:नयन के लिए ये जीवन की सबसे रोमांचकारी रात थी, पहला प्यार, पहली मुलाकात, पूरी रात आंखों में कटी

2 महीने पहले
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शादी की धूमधाम से वातावरण गूंज रहा था। नयन दौड़ दौड़ कर सारा काम देख रहा था। सब कुछ पूरी शिद्दत से निपटाते हुए भी उसकी आंखें बार बार उसी पर अटक जाती। वो इस दुनिया की नहीं लगती थी। लॉन की भव्यता से बेखबर अपनी धुन में मगन, अपनी लेस बुनने में खोई वो किसी अप्सरा से कम नहीं थी। उसके चेहरे पर एक दिव्यता थी। नयन स्नैक्स सर्व करवाने के बहाने उसके पास गया। उसने मना कर दिया और दूसरी तरफ मुड़ गई। तभी उसका दुपटटा कांटों में फंस गया। नयन ने बड़ी नज़ाकत से उसे छुड़ा दिया तो वो मुस्कुरा दी। अब वो उसकी ओर देखकर मुस्कुराता तो वो भी मुस्कुरा देती। उसकी मुस्कान में एक अनोखी मासूमियत थी।

नौकरी लगने के बाद से पिछले चार सालों से मां ने दर्जनों लड़कियों से उसकी मुलाकात करा दी थी, पर उसे कभी कोई ऐसी नहीं लगी जो उसके ख्यालों के अनुरूप पर इसे देखकर लगा कि शायद पहली नज़र का प्यार इसी को कहते हैं।

वो अचानक बेचैन हो गई और उसे बेचैन देखकर नयन भी बेचैन हो गया।

“कोई परेशानी?” नयन ने पास जाकर पूछा। “मेरे मम्मी पापा नहीं दिख रहे।” वो नीचे देखते हुए ऐसे बोली जैसे शरमा रही हो। आज के जमाने में ये सकुचाहट बड़ी अनोखी लगी नयन को। वो दिल मे उमड़ते प्रेम से सराबोर स्वर में बोला, “आइए, आपको उनके पास ले चलूं।” उसने खुशी से हाथ आगे बढ़ा दिया। नयन कीखुशी का ठिकाना न रहा।

वो परिवार के नहीं थे। परिचितों में से थे। वे जा रहे थे तो सब बाहर उन्हें छोड़ने निकले थे। नयन की निगाहें एकटक उसे देख रही थीं, पर वो अपनी लेस बुनते हुए उसकी ओर नजर उठाकर भी नहीं देख रही थी। उसकी मां ने देखा और मुस्कुरा कर बोलीं, “बेटा, आना कभी हमारे यहां।”

नयन के लिए इतना काफी था। दो दिन बाद ही बहाना मिल गया। बैना लेकर पहुंचा तो वो लॉन में झूले पर ही बैठी अपनी लेस बुन रही थी। साथ ही रोती जा रही थी। नयन ने हेलो किया, पर उसने कोई जवाब नहीं दिया। नयन उसके बगल में बैठ गया। वो अचकचा गई और सुई उसके हाथ में चुभ गई। अब नयन से न रह गया। उसने झट उसकी उंगली सहानुभूति से पकड़ अपने होंठों से दबा दी। वो उससे बातें करने लगा। तभी नौकरानी चाय नाश्ता ले आई और बताया कि साहब मेमसाहब उसकी बड़ी बहन की तबियत ज्यादा खराब होने के कारण दूसरे शहर गए हैं। बात करते करते रात हो गई। नयन को लगा तो की उसकी उदासी दूर हो गई है, पर वो कुछ बोली नहीं। आखिर नयन ने हाथ जोड़ दिए, “अब चलता हूं।”

उसने आगे बढ़कर नयन का हाथ पकड़ लिया, “मुझे छोड़कर मत जाओ। “

नयन के लिए ये जीवन की सबसे रोमांचकारी रात थी। पहला प्यार, पहली एकांत मुलाकात। पूरी रात आंखों में कटी।

उसे नींद आने लगी तो वो नजदीक आई और नयन का हाथ पकड़ लिया और बड़े प्यार से उसके बगल में उसका हाथ पकड़े ही लेट गई और मिनटों में सो गई।

अब वो नयन के लिए जिंदगी की सबसे बड़ी पहेली बन गई थी। क्या दुख था उसे? क्यों इतना असुरक्षित से महसूस करती प्रतीत होती थी वो? क्या उसे भी नयन से...

सुबह उसकी मां ने आकर जगाया।

तो अचकचाया से नयन हकला गया। “वो आंटी... मैं आपकी बेटी से प्यार करता हूं।”

नयन एक झटके में बोल गया।

उन्होंने नयन को इशारे से बुलाकर ड्राईंग रूम में बैठाया और गंभीर हो गईं, “ऑटिज़्म के बारे में जानते हो?”

आंटी बोल रहीं थीं और वो सुनता जा रहा था। “मुझे लगता है तुम समझ सकोगे वो शादी के योग्य नहीं है।”

नयन का दिमाग घूम रहा था। वो जाने लगा तभी वो भागकर आई और उसका हाथ पकड़कर बोली, “तुम बहुत अच्छे हो। यहीं रुक जाओ।”

“मैं शाम को आऊंगा।” कहकर नयन लौट लिया।

फिर तो ये रोज का क्रम बन गया। नयन उसे समझने लगा था और वो नयन की संगत खुश रहने लगी थी।

नयन के लिए उसके माता-पिता ने एक जगह बात लगभग पक्की कर दी थी और नयन का दिमाग भी उसके दिल को समझा ही चुका था कि तभी नियति ने अपनी गज गिराई। एक सड़क दुर्घटना में उसने अपने माता-पिता को खो दिया।

“आज फिर मम्मी-पापा कहीं चले गए। तुम तो मुझे छोड़कर नहीं जाओगे?” उसने पूछा और उसी रात की तरह उसका हाथ पकड़कर लेट गई।

नयन की पलकें भर आईं और धुंधली आंखों से अपने दिल का हाल बिल्कुल साफ पढ़ने में आने लगा उसे। उसने मां को फोन लगाया, “लड़की वालों को मन कर दो।” फिर फोन रखकर मुस्कुराकर उससे बोला, “मैं तुम्हें छोड़कर कभी कहीं नहीं जाऊंगा। आओ, सो जाएं।”

- भावना प्रकाश

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