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E-इश्क:गरिमा ने भड़ास निकालते हुए कहा कि यदि कुंडली मिलाने से ही शादी सफल होती, तो आज डिवोर्स की गिनती लाखों तक नहीं पहुंचती

10 दिन पहले
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फाइनली गरिमा और हेमंत की शादी हो गई। आजकल दोनों हनीमून ट्रिप पर स्विट्ज़रलैंड में ऐश कर रहे हैं। उनके घर बालों का तो पता नहीं, पर मैं बहुत खुश हूं, क्योंकि अभी थोड़ी ही देर पहले गरिमा ने दो मिनट के लिए स्विट्ज़रलैंड से बात करते हुए कहा, “थैंक यू आंटी, इतने अच्छे लाइफ पार्टनर से मिलवाने के लिए।” हेमंत का स्वर पीछे से उभरा, “मेरी तरफ़ से भी आंटी को थैंक यू कह देना।” और फिर दोनों की मिलीजुली हंसी हवा में तैर गई। दोनों कितने खुश लग रहे थे। मैंने राहत की सांस ली, क्योंकि दोनों को जोडने वाली बीच की कड़ी मैं ही थी। मेरी यादों में कुछ महीनों पहले गुजरी सारी घटनाएं एक साथ तैर गईं।

आज से तीन साल पहले गरिमा को मैंने अपनी फ्रेंड विनीता के घर हुई किटी पार्टी में देखा था। लंबी-छरहरी गरिमा रूप लावण्य की धनी तो थी ही, नाम के अनुरूप व्यक्तित्व में संस्कारी छाप भी साफ दिखाई देती थी। उसको देखते ही मुझे लगा कि काश, मेरा कोई बेटा होता तो मैं गरिमा का हाथ झट से उसकी मां से मांग लेती। मुझे गरिमा की तरफ यूं ताकते देख विनीता ने मुझसे उसका परिचय करवाया। “बेटे, ये कृष्णा आंटी हैं, हमारी किटी पार्टी की मेंबर। गरिमा ने पूरे सम्मान के साथ मुझे ‘हेलो’ कहा और कुछ देर मेरे पास बैठी रही। उसके जॉब के बारे में बातचीत हुई, तभी मुझे पता चला कि वह एक बड़ी लॉ फर्म में बतौर कोर्पोरेट लॉयर काम कर रही है।

मेरी फ्रेंड सुमन ने भी जब गरिमा को देखा तो उसकी नज़रों से लग रहा था कि वह भी गरिमा के व्यक्तित्व से प्रभावित है। विनीता के घर से निकलते ही सुमन ने गरिमा की तारीफ शुरू कर दी। “सच में विनीता की बेटी कितनी प्यारी है। तुम उससे बात करो।मेरे हेमंत के लिए मुझे गरिमा पसंद हैं।” सुमन को गरिमा इतनी पसंद आई कि वह लगातार उसी की बातें करती रही।

“कृष्णा, जब तुम विनीता से बात करो, तो हेमंत के बारे में सबकुछ बता देना। हेमंत ने एमबीए किया है और आजकल एमएनसी में डायरेक्टर के पद पर है। मेरे बेटे को तुम देख ही चुकी हो, उसे लंबी लड़की चाहिए और गरिमा की हाइट भी अच्छी है, दोनों की उम्र भी मेल खाती है।” सुमन अपनी ही रौ में बोलती जा रही थी कि मैंने उसे टोकते हुए कहा, “सुन मैं विनीता से बात करके देखती हूं, फिर जोड़ियां तो ऊपर से ही बनकर आती हैं।”

कुछ दिनों बाद जब मैं विनीता से मिलने उसके घर गई तो देखा विनीता किसी की जन्मकुंडली लेकर बैठी हुई थी। लैपटॉप सामने खुला पड़ा था। मुझे देखकर लैपटॉप बंद करते हुए बोली, “आ बैठ, अच्छा हुआ तू आ गई. हम लोग कुछ देर गप्पें मारेंगे। मेरा सारा वक्त गरिमा का भाग्य संवारने में ही गुजर जाता है।”

दरअसल, जब से विनीता ने ज्योतिषाचार्य का डिप्लोमा किया था, तभी से वह जन्मकुंडली देखने और मिलाने में लगी रहती। किटी पार्टी की सहेलियों के बच्चों की कुण्डलियों का ढेर भी उसके पास रहता। विनीता का कुण्डली मिलाने में विश्वास कुछ अधिक ही गहरा हो चला गया था। गरिमा के रिश्ते की बात जहां भी चलती सबसे पहले विनीता कुण्डली मिलाने बैठ जाती, बिना लड़के को मिले देखे। अब तक वह 365 लड़कों को रिजेक्ट कर चुकी थी और गरिमा की उम्र 30 पार करने को थी।

उम्र बढ़ने से गरिमा के चेहरे की मुस्कराहट धीरे-धीरे गायब हो रही थी। स्वयं विनीता भी कभी-कभी तनाव और चिड़चिड़ेपन से घिरी रहती। एक बार मेरे सामने गरिमा ने भड़ास निकालते हुए यहां तक कह दिया था कि अगर कुण्डली मिलाने से सभी की शादी सफल होती, तो आज डिवोर्स की गिनती लाखों तक नहीं पहुंचती। शादी में कुंडली के अलावा स्वभाव रुचियों व आदतों की साझेदारी भी बहुत मायने रखती है। अब मैं अपने हिसाब से अपने लिए लाइफ पार्टनर ढूंढूंगी,” गरिमा ने कहा था।

“बेटा, भावावेश में आकर कहीं कुछ गलती न कर बैठना। मैं सुखद भविष्य के लिए ही तो ये सब कर रही हूं।”

“उस सुखद भविष्य के इंतज़ार में चाहे मेरी उम्र ही क्यों न बढ़ती जाए।” गरिमा के शब्द सुनकर विनीता हक्की बक्की रह गई थी और मां-बेटी की इस बहस की मैं गवाह थी।

एक दिन अचानक हफ्ते मार्केट में अचानक गरिमा मिल गई। मैंने उसे विलेटेड हैप्पी बर्थडे विश किया और उसने मुझे छोटा-सा ‘थैंक यू’ बोला। उसके चेहरे पर एक उदासी थी। काम के बारे में पूछने पर वह बड़े उखड़े मन से बोली, “अब मैं अपना खुद का केस सुलझाना चाहती हूं,” फीकी मुस्कराहट बिखेरते हुए वह आगे निकल गई।

कुछ दिन बाद सुमन का फोन आया। उसके बेटे हेमंत को किसी ने झूठे फ्रॉड के केस में उलझा दिया था, जिसकी वजह से उसके विदेश जाने में रुकावट आ रही थी। उसे किसी अच्छे कोरपरेट लॉयर की ज़रूरत थी। मैंने अपना दिमाग दौड़ाया और सुमन से विनीता की बेटी गरिमा से मिलने की बात कही। “गरिमा टॉप क्लास की कॉर्पोरेटर लॉयर है, हमारी सहेली की बेटी है। वह किस दिन काम आएगी, उसकी मदद लेते हैं। तुम कहो तो मैं हेमंत को गरिमा का नंबर दे देती हूं और गरिमा से भी बात कर लूंगी। दोनों आपस में केस से संबंधित बातचीत करके मामला सुलझा लेंगे।”

हेमंत ने फोन पर गरिमा को अपना संक्षिप्त परिचय देते हुए अपने केस की सारी डिटेल बता दी। गरिमा ने हेमंत को आश्वासन देते हुए कहा, “डोंट वरी, केस हम ही जीतेंगे। मुझे आपकी ईमानदारी और अपनी क़ाबिलीयत पर पूरा भरोसा है। केस के सिलसिले में हेमंत और गरिमा की मुलाकातें होती रहीं, जो विनीता के बर्दाश्त के बाहर थी। उसे बेटी का झुकाव हेमंत की तरफ दिख रहा था, लेकिन हेमंत की कुंडली उसके हाथ में नहीं थी और न ही वह सुमन से मंगाना ही चाहती थी। उसकी नजर में सुमन का स्टेंडर्ड उससे कम था।

केस की हियरिंग शुरू हुई। गरिमा अपनी धुआंधार दलीलों से प्रतिद्वंदी पक्ष के वकील की धज्जियां उड़ाती रही। केस में दम नहीं था और जज साहब की फैसला सुनाने की तारीख जल्दी ही आ गई। इस बीच वे दोनों केस से इतर एक दूसरे की रुचियों, स्वभाव व आदतों के बारे में जानने-समझने लगे। दोनों की दिलचस्पी एक दूसरे में बढ़ रही है ये सबको नजर आ रहा था और जहां सब मन ही मन मुस्कुरा रहे थे, विनीता कलप रही थी। फाइनल हीयरिंग के दिन गरिमा उदास थी, उसे अपनी जीत तो पक्की लग रही थी, फिर भी कुछ होने का डर था।

फैसला हेमंत के पक्ष में आया, फैसला सुनकर गरिमा व हेमंत दोनों ही बहुत खुश थे। हेमंत ने कहा, “इस जीत पर एक अच्छी सी ट्रीट तो बनती है।” गरिमा ने आइडिया दिया, “पास में ही कॉफ़ी पीने चलते हैं।”

कॉफ़ी पीते हुए हेमंत ने पहली बार उससे पूछा, “तुमने अभी तक शादी क्यों नहीं?” गरिमा ने हेमंत की आंखों में आंखें डालते हुए जवाब दिया, “कुंडली नहीं मिली।” जीत की खुशी में डूबा हेमंत शरारत के मूड में था। “अच्छा हुआ कुंडली नहीं मिली। चलो दोनों मिलकर अपनी कुंडली मिला लेते हैं। बस इतना बता दो, तुम्हें लाइफ पार्टनर कैसा चाहिए।”

“बिल्कुल, तुम्हारे जैसा,” गरिमा ने हेमंत की आंखों में आंखें डालते हुए शरारत का जवाब शरारत से दिया। जिस पर हेमंत ने आगे बढ़कर कॉफी शॉप में ही उसे गले लगा लिया।

घर पहुंचकर गरिमा चहकते हुए अपने पापा से बोली, “पापा, आज मैंने दो केस एक साथ जीते हैं, एक हेमंत का, दूसरा अपना लाइफ पार्टनर चुनने का।” उसके पापा ने खुशी के साथ पूछा, “अच्छा वो कौन है और कब मिलवा रही हो?”

“पापा, उसका नाम हेमंत है और वह मेरी पहली और आखिरी पसंद है।”

हेमंत का नाम सुनते ही विनीता सिर्फ इतना कह पाई, “मैंने कुंडली तो अभी मिलाई ही नहीं।”

गरिमा का जवाब था, “हमारी शादी के बाद आप कुंडली मिला लेना।”

- माधुरी गुप्ता

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