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बॉस के प्यार में डूबी वन्या:उसका मन था कि चीख-चीख कर सबके सामने कह दे ‘सर आई लव यू'

6 महीने पहले
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वन्या नए बॉस से फाइल पर साइन लेने पहुंची, लेकिन केबिन के अंदर जाने पर उसे हिचकिचाहट महसूस होने लगी। उसे समझ नहीं आ रहा था कि वह क्या करे। वन्या घबराई हुई थी। सहमी आवाज में उसने कहा, “मे आई कम इन सर?”

‘यस’ कहते हुए जयवर्धन ने सिर उठाया। जय के आकर्षक चेहरे को देखकर वन्या को लगा जैसे वह खुद को ही भूल गई। उसकी अपलक नजरें जैसे बॉस के चेहरे पर ठहर गईं। एसी की ठंडक में भी वह पसीने से तरबतर हो गई।

जय ने पानी का गिलास उसकी की ओर बढ़ाया। वन्या एक ही सांस में गिलास भर पानी पी गई। किसी को एक नजर देख लेने भर से ही कितना सुकून मिलता है, इसका एहसास आज उसे पहली बार हुआ।

वन्या ने फाइल जयवर्धन के सामने रख दी। बॉस फाइल को सरसरी नजरों से देखते हुए बोले, “एक्सेलेंट! पहले कहीं काम कर चुकी हो?” वन्या ने ‘नो’ कहते हुए सिर हिलाया।

बॉस के नाम पर उसके मन में 50 वर्ष के खड़ूस व्यक्ति की इमेज थी, लेकिन यहां 30-35 वर्ष के आकर्षक युवक को देखते ही उसके दिल में हलचल होने लगी। ‘क्या इसे ही लव ऐट फर्स्ट साइट कहते हैं..?’ वह मन ही मन सोचने लगी।

जयवर्धन उसके बॉस थे इसलिए मिलना-जुलना, थोड़ी-बहुत बातचीत नॉर्मल थी, लेकिन सुबह जब वह उसकी ओर देख कर गुडमॉर्निंग एवरीबॉडी कहते, तो उसका पूरा दिन ही बन जाता। वह उन्हें गुलाब देती, जिसे बॉस हाथ में लेने के बाद टेबल पर रख देते। मौका मिलते ही वन्या गुलाब उठा लाती और उसे चुपके से अपने होठों से लगाकर चुंबन की कल्पना में खो जाती। कभी सीने से लगा लेती और आलिंगन की ख्वाहिश करती। जय की आहट से ही वन्या के दिल की धड़कनें बढ़ जातीं, सांसें ऊपर नीचे होने लगतीं।

वन्या की चोरी एक दिन पकड़ी गई। उसकी फ्रेंड गार्गी ने उससे कहा, “पागल हो गई है क्या? बॉस 40 के और तुम 20 की…”

वन्या ने गार्गी की बात को बीच में ही काटते हुए कहा, “अरे, ऐसा कुछ भी नहीं है। लेकिन सच्चाई सुनते ही उसकी आवाज लड़खड़ा गई।

जय सर के लिए उसकी दीवानगी सिर चढ़ कर बोल रही थी। उसका मन होता कि वह चीख-चीख कर सबके सामने कह दे ‘सर आई लव यू!’ वह रोज ऑफिस सज-धजकर आती और किसी न किसी बहाने से बॉस के केबिन में बार-बार जाती, नजरें बचाकर उनके चेहरे को निहारती। जब वन्या की नजरें जय से मिलतीं, तो वह निगाहें फेर कर कहते, “वन्या, अपना काम ध्यान से किया करो। आजकल बहुत गलतियां कर रही हो।” लेकिन उसके सिर पर तो इश्क का भूत सवार था।

पहली सैलरी मिली तो वह जय सर के लिए एक महंगा पेन लेकर आई। अगले दिन जब बॉस जेब में वही पेन लगा कर आए, तो वन्या को महसूस हुआ, जैसे जय ने उसे अपने सीने से लगा लिया हो। इस सुखद एहसास से वह शर्मा कर मुस्कुरा दी।

लगभग छह महीने से वह उनके प्यार के एहसास में डूबी हुई थी। अब वह इस लुका छिपी से बाहर आना चाहती थी। सारी रात जाग कर चुने हुए प्यार के शब्दों से उसने प्रेमपत्र लिखा और होंठों की छाप से सजा कर अपने पर्स में रख लिया।

गोल्डन बॉर्डर की पिंक साड़ी में मैचिंग ज्वेलरी पहनकर जब वह सज-धज कर ऑफिस पहुंची, तो जय सर के केबिन के पास उसने चहल पहल देखी। उसकी निगाहें अपने प्रियतम की एक झलक पाने के लिए तड़प रही थीं।

उसने फैसला कर लिया था कि आज वह अपने प्यार का इजहार करके ही रहेगी। उसका चेहरा लाज से सुर्ख हो रहा था, लेकिन जय सर दिखे भी तो कई लोगों से घिरे हुए।

तभी कमल सर के शब्द उसके कानों में गर्म पिघले शीशे की तरह सुनाई पड़े, “जय, ऐसे कैसे मान लें कि सगाई हो गई, कुछ मिठाई-विठाई तो खिलाओ।” इन शब्दों को सुनते ही वन्या होश खो बैठी। सबसे नजरें बचाकर वह अपने आंसू पोंछ रही थी।

वन्या को देखते ही बॉस तेजी से बाहर निकले, लेकिन तब तक वह उस प्रेमपत्र को वहीं पर फेंक कर जा चुकी थी। जाते-जाते वन्या ने जय को लेटर उठाते हुए देख लिया था।

घर जाकर वह बहुत देर तक फूट-फूट कर रोती रही। तभी मोबाइल पर मैसेज की टोन सुनाई दी, देखा तो मैसेज जय का था। लिखा था, ‘ऐ दोस्त मिलने की उम्मीद तो नहीं है तुमसे, लेकिन कैसे कह दूं, इंतजार नहीं।’

“मेम साहब चाय!” रोहन की आवाज से वन्या की तंद्रा भंग हुई। वह प्यार से पति को देख कर मुस्कुराने लगी।

- पद्मा अग्रवाल

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