E-इश्क:मैं कोई कॉलेज में पढ़ने वाली लड़की नहीं, बल्कि अधेड़ उम्र की एक शादीशुदा महिला हूं और मेरे पति आर्मी में हैं

13 दिन पहले
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कॉलेज से लौटकर अमित अपने कमरे में पलंग पर आंखें बंद कर के लेट गया l आज का दिन ही खराब था l ना कोई क्लास हुई और ना ही केंटीन में कोई दोस्त मिला l लगता है शाम भी यूं ही कमरे में पड़े हुए बीतेगी l लेकिन कमरे में बंद रह कर शाम बिताने के ख्याल ने ही उसी परेशान कर दिया इसलिए झट से उठकर बैठा और पास में पड़ा अपना मोबाइल उठा कर एक के बाद एक अपने दोस्तों के नंबर डायल करने लगा l आज का दिन शायद वाकई मनहूस था, क्योंकि एक भी दोस्त शाम को मूवी देखने जाने के लिए तैयार नहीं हुआ और अमित ने अपनी सारी झुंझलाहट अपने मोबाइल पर उतारते हुए यूं ही फालतू के नंबर डायल करने शुरू कर दिये, तो एक बार कोई नंबर लग गया और अमित ने भी तफ़्री के लिए फोन चालू रखाl कुछ ही देर में उधर से किसी ने बड़ी ही मीठी आवाज़ में हॅलो किया तो अमित के पूरे शरीर में जैसे बिजली सी दौड़ गई, पर चाहकर भी वो कोई बात न कर सका और ‘सॉरी रॉन्ग नंबर’ कह कर फोन बंद कर दिया पर l कानों में अभी तक वही सुरीली ‘हेलो’ गूंज रही थी l “एक बार फिर से ट्राई करूं?” अमित ने सोचा, लेकिन फिर रुक गया l पता नहीं वो कौन हैं, कहीं बुरा ना मान जाएं इस तरह बार बार फोन करने से l मन नहीं माना तो डायल किए गए नंबर को अपने फोन में फीड कर के फोन एक तरफ रख दिया पर मन में उस आवाज़ को दोबारा सुनने की इच्छा कुलबुलाती रही l बहुत रोकना चाहा लेकिन ‘दिल तो बच्चा है जी’ भला क्यों मानने लगा! आखिर हिम्मत जुटाकर नंबर दोबारा डायल कर ही दिया और जैसे ही उधर से वही मधुर आवाज़ सुनाई पड़ी तो झट से ‘सॉरी रॉन्ग नंबर’ तो कहा पर फोन नहीं काटा और हैरानी इस बात की थी कि दूसरी तरफ से भी फोन काटने का प्रयास नहीं किया गया, बल्कि उधर से खिलखिलाहट के मीठे घूंघरू बजने लगे l ‘अब तो बात करनी ही पड़ेगी’ यह सोच कर अमित ने फौरन पूछा ,“आप हंस क्यों रही हैं?”

उधर से तुरंत जवाब आया , “जनाब, पहली बार सॉरी बोला तो चल गया, क्योंकि तब गलती से ही नंबर डायल हुआ था, पर इस बार तो आपने जान बूझ कर फोन मिलाया था, तो फिर बात क्यों नहीं कर रहे हैं? आखिर पता तो चले कि आप मुझसे क्या कहना चाहते हैं l” और फिर से खिलखिलाहट के घूंघरू खनखनाने लगे l अब तक अमित की हिम्मत खुल चुकी थी इसलिए गला साफ करके बड़ी गहरी आवाज़ में बोला, “पहली बार जब आपकी आवाज़ सुनी थी तो बड़ी अच्छी लगी थी, पर आगे बात करने की हिम्मत नहीं पड़ी इसीलिए दोबारा फोन मिलाया था, आपकी आवाज़ सुनने के लिए l’’ उधर से आने वाली हंसी की खनक अब बंद हो गई थी और सपाट आवाज़ में एक ऑर्डर जारी हुआ कि ‘आवाज़ सुन ली, अब फोन रख दो l’ पर मज़े की बात यह थी कि उधर से फोन अभी भी नहीं काटा गया था l अमित ने हिम्मत जुटा कर पूछा , “अगर आप नाराज़ ना हों तो एक बात पूछूं?” उधर से ‘हूं’ में जवाब आया तो अमित ने पूरे आत्मविश्वास के साथ सवाल किया , “क्या मैं आपको कभी कभ, .यूं ही बात करने के लिए फोन कर सकता हूं? वैसे आप मना करेंगी तो आपको बिलकुल परेशान नहीं करूंगा, लेकिन प्लीज हां कह दीजिये l” अमित के बोलने के अंदाज़ पर शायद लड़की को तरस आगया और उसने अपनी संगीतमयी हंसी के घूंघरू बजाते हुए ‘हाँ’ कहा और फोन रख दिया l अमित को अपनी किस्मत पर यकीन नहीं हो रहा था l इतनी आसानी से कोई लड़की उससे फोन पर बात करने के लिए राज़ी हो जाएगी यह उसने कभी नहीं सोचा था l ‘लेकिन अब इस फोन की दोस्ती को पूरी ईमानदारी से निभाना होगा l बार बार फोन करके उस भली लड़की को परेशान करके खुद को एक लोफ़र की केटेगरी में नहीं रखना है बल्कि एक अच्छा दोस्त बन कर दिखाना है l’ अमित ने मन ही मन तय किया और कुछ दिनों तक उस आवाज़ को सुनने की कोशिश नहीं करी ,लेकिन एक दिन अचानक जब अमित के फोन की घंटी बजी और ‘हॅलो’ करते ही अमित ने जब उसी मीठी आवाज़ में किया गया सवाल सुना, “क्या बात है, तुमने तो दोबारा फोन ही नहीं किया? अब मेरी आवाज़ सुनने की इच्छा नहीं होती है?” तब अमित को लगा कि उसने कोई बहुत बड़ी लॉटरी जीत ली है और फिर तो फोन कौल्स का सिलसिला शुरू हो गया गया l

अमित चाहता था कि मीठी आवाज़ की मालकिन से उसका नाम पूछे लेकिन हिम्मत नहीं हुई और इधर उधर की बातें करते हुए, पढ़ाई और दोस्तों की बातें करते हुए ही कुछ दिन बीत गए l आखिर मीठी आवाज़ ने खुद ही पूछा लिया, “तुम्हारा कोई नाम वाम है या बेनाम हो?” अमित ने जवाब में अपना नाम बताते हुए जब उसका नाम पूछा तो वो बोली कि पहले अमित अपने बारे में पूरी जानकारी दे, तभी वो अपना नाम बताएगी l अमित ने गुस्से में जवाब दिया कि वो कोई गुंडा बदमाश नहीं है, बल्कि एक संभ्रांत परिवार का लड़का है और एक अच्छी दोस्ती का नाता जोड़ने के लिए ही उस लड़की को फोन करता है l “ अगर आपको मेरा फोन करना बुरा लगता है तो मेरा नंबर ब्लौक कर दीजिये, क्यों मेरी कौल का जवाब देती हैं?”

“ओहो! गुस्सा तो बड़ा तेज़ है जनाब का l खैर कोई बात नहीं, नाम बता ही देती हूं l” और अपना नाम बताकर वसुधा ने फोन काट दिया l नाम जान लेने के बाद अमित के हौसले और भी बुलंद होगए और अगली कौल करने पर उसने वसुधा से आमने सामने मिलने की अपनी इच्छा ज़ाहिर कर दी, मगर अमित की बात सुन कर दूसरी तरफ बिलकुल सन्नाटा छा गया l अमित को लगा शायद वसुधा नाराज़ हो गई है तो माफी मांगते हुए बोला कि अगर वो मिलना नहीं चाहती तो कोई बात नहीं l वसुधा ने अमित की बात सुनी तो हंसी बिखरते हुए बोली, “सॉरी अमित, माफी तो मुझे तुमसे मांगनी चाहिए, क्योंकि मैंने तुमसे एक बात छिपाई थी l दरअसल मैं कोई कॉलेज में पढ़ने वाली लड़की नहीं, बल्कि अधेड़ उम्र की एक शादीशुदा महिला हूं और मेरे पति आर्मी में हैं l क्या अब भी तुम मुझसे मिलना चाहोगे ?”

इस बार चुप्पी साधने की बारी अमित की थी l वो तो जैसे सकते में आ गया था और उसके मुंह से अब आवाज़ ही नहीं निकल रही थी l दिमाग कह रहा था कि आंटी जी को नमस्ते कह कर इस क़िस्से को यहीं खत्म कर दे, मगर दिल कह कह रहा था कि लड़की तुझे बेवकूफ बना रही है और उसने तय किया कि इस आवाज़ की सच्चाई को जान कर ही दम लेगा l अमित की तरफ से कोई जवाब ना मिलने पर वसुधा ने “बाय अमित” कह कर फोन बंद करना चाहा, तभी अमित कुछ सोच कर बोला, “कोई बात नहीं आंटी जी, उम्र से क्या फ़र्क पड़ता है! अब मुझे पता चल गया है कि आप बुजुर्ग हैं तो मैं आपको आंटी जी बुलाया करूंगा, मगर हम दोस्त तो रह सकते हैं ना?” वसुधा ने हड़बड़ाते हुए ‘हां’ कहा तो अमित बोला , “आंटी जी, तो फिर बताइये आप कब और कहां मिलना चाहेंगी l आप कहें तो मैं आपके घर पर आ जाऊँ l अंकल जी से भी इसी बहाने मुलाक़ात हो जाएगी l”

वसुधा, जो कि वास्तव में एक युवा छात्रा है और स्वभाव से बहुत ज्यादा शैतान और फितरती है, अमित के जवाब से अब अपने ही जाल में फंस गई थी l उसने सोचा था कि खुद को बड़ी उम्र की स्त्री बताने पर अमित उससे बात करने के बारे में सोचना छोड़ देगा और यह किस्सा खत्म हो जाएगा, मगर कहानी ने तो अलग ही ट्विस्ट ले लिया था और इस ढीठ लड़के की बात ने वसुधा को चक्कर में डाल दिया था l लेकिन इस किस्से को यूंही खत्म करने की भी इच्छा नहीं हो रही थी इसलिए ड्रामा चालू रखने के लिए मिलने की जगह तो बतानी ही पड़ेगी, पर मुश्किल यह थी कि अमित से मिलने की जगह तय करने से पहले किसी आंटी को भी तो इस ड्रामे में हिस्सा लेने के लिए तैयार करना पड़ेगा l यह सोच कर उसने अमित से कहा कि वो अपने पति से बात करके मिलने की जगह के बारे में उसे बताएगी l फोन बंद करने के बाद अब वो अपने ड्रामे में शामिल करने के लिये किसी योग्य महिला के बारे में सोचने लगी l ‘मम्मी से तो इस बारे में बात करना ही बेकार है, क्योंकि मदद करने के बजाय वो तो पापा से मेरी शिकायत कर देंगी और फिर पापा का एक लंबा लेक्चर सुनना पड़ेगा l फिर किससे मदद मांगूं?’ और दिमाग में सहसा एक नाम बिजली की तरह चमका l ‘स्वीटी आंटी! यस, वो मेरी हेल्प ज़रूर करेंगीl अभी जाकर आंटी से बात करती हूं l’

नाम सूझते ही वसुधा सीधी स्वीटी आंटी के घर की तरफ भागी l स्वीटी आंटी यानि मिसिज स्वीटी मंचन्दा जो कि वसुधा की बिल्डिंग में ही रहती है और बिल्डिंग के हर उम्र के बच्चों के साथ उनकी बड़ी अच्छी दोस्ती है, क्योंकि बच्चों की हर शरारत में आंटी बराबर की पार्टनर रहती हैं और कई बार उन लोगों को डांट और सज़ा से भी बचाती हैं l इसीलिए वसुधा भी पूरे कॉन्फिडेंस के साथ उनके पास पंहुच गई और अपने नाटक में उनकी मदद मांगने लगी l लेकिन यह मामला बच्चों का खेल नहीं, बल्कि एक शरारती ड्रामा था इसलिए वसुधा की इस शैतानी में हिस्सेदारी करने से पहले किसी भी समझदार महिला की तरह स्वीटी ने इस ड्रामे की शुरुआत के बारे में पूछा और यह जानकर कि पूरा ड्रामा एक रॉन्ग नंबर से शुरू हुआ है, स्वीटी ने वसुधा को इतनी बात बढ़ाने के लिए डांट लगाई और इस तरह फोन पर दोस्त बना कर धोखा उठाने के कई किस्से उसे सुना डाले तब वसुधा ने कहा, “आंटी , मैं मानती हूं कि मुझे अमित को इतना बढ़ावा नहीं देना चाहिए था, लेकिन उसकी बातों से कभी यह नहीं लगा कि वो कोई चालू या बदमाश लड़का है l हमेशा बहुत तमीज़ से और लिमिट में रह कर बात करता है और जब उसने मुझे आंटी कहते हुए मिलने की बात करी तो मेरा मन हुआ कि उसकी नीयत को पूरी तरह टटोल लूं l”

स्वीटी एक बहुत अनुभवी और समझदार महिला है l वसुधा की बातों से उसे अंदाज़ हो गया था कि वो उस फोन वाले लड़के को पसंद करने लगी है इसलिए उसने सच्चाई जानने के इरादे से वसुधा से पूछा, “कुड़ी, तू एक गल मैनु सच्ची सच्ची दसां, तू मुंडे नूँ पसंद करदी है?”

स्वीटी के इस सवाल ने खुद वसुधा के मन में भी यही सवाल खड़ा कर दिया, ‘क्या तू अमित को पसंद करने लगी है वसुधा?’ और उसने स्वीटी को जवाब दिया, “आंटी, अभी तक इस बारे में मैंने सोचा ही नहीं था पर... मुझे लगता है... आप शायद ठीक कह रही हैं, मैं शायद उसे पसंद करने लगी हूं और इसी लिए इस ड्रामे के जरिये से उसकी सच्चाई जानना चाहती हूं l अगर वो मेरी आवाज़ को ही चाहता होगा तो आपसे मिल कर समझ जाएगा कि आप वसुधा नहीं हैं और अगर फिर भी वो मुझसे बात करने की कोशिश करेगा तब सोचूंगी आगे क्या करना है l इसी लिए आपकी मदद मांग रही हूं आंटी, प्लीज़ हेल्प मी l’’

आखिर थोड़ी ना नुकुर के बाद श्रीमती मंचन्दा, वसुधा बनने के लिए राज़ी हो गई और बोली कि ‘लड़के को मेरे घर पर आने को बोल दे ‘ लेकिन पहली ही मुलाकत में किसी अनजान व्यक्ति को वसुधा घर पर नहीं बुलाना चाहती थी इसलिए आंटी के घर से ही उसने सेंट्रल मार्केट के चाट भवन में अगले दिन शाम को छ्ह बजे मिलने के बारे में अमित को ‘व्हाट्सएप’ पर सूचित कर दिया और स्वीटी को खूब खूब धन्यवाद करके वहां से वापिस आ ही रही थी कि अमित का व्हाट्सएप संदेश आया जिसमें उसने अपनी फोटो भेजी थी और लिखा था कि यह मैं हूं और आप अपनी फोटो भेज दीजिये आंटी जी ताकि मैं आपको चाट की दूकान पर पहचान सकूंl वसुधा ने स्वीटी से उसकी फोटो मांगी तो उसने कहा, “ मुंडे नु कै दे कि उसे वेख के मैं आपी सामने आजावेंगी l”

अगले दिन सुबह से ही वसुधा से ज़्यादा स्वीटी की हवाइयां उड़ी हुई थीं l ‘कैसा होगा वो लड़का, क्या वो समझ जाएगा कि मैं वसुधा नहीं हूं? यही उधेड़बुन दिमाग में चलती रही और शाम आ पंहुची l भगवान को याद करके स्वीटी जी जब ठीक समय पर चाट भवन पंहुचीं और अमित को वहां बेचैनी से चक्कर लगाते हुए पाया तो झट से उसके पास जाकर ‘हेलो’ करते हुए कहा, “हेलो अमित, मैं आ गई” स्वीटी को देखते ही अमित ने झट से झुक कर आंटी जी के पांवों को हाथ लगाया और उसे लेकर एक टेबल के पास आते हुए बोला, “आंटी जी, क्या आपका गला खराब है?” स्वीटी ने कम बोलने के इरादे से अपने हाथ से ही बताने की कोशिश करी कि वो ठीक है l लेकिन अमित बोला , “नहीं आंटी जी, मैं शर्त लगा कर कह सकता हूं कि आपका गला खराब है फिर भी आपने चाट कोर्नर पर ही मिलने की बात क्यों कही? मुझे कह देतीं तो मैं आपके घर ही आ जाता l” अमित बोल रहा था लेकिन स्वीटी मन ही मन खुद को कोस रही थी कि क्यों वो वसुधा की बातों में आकर इस शरीफ और प्यारे से लड़के को बेवकूफ बनाने के लिये यहां आ गई l

स्वीटी को गुमसुम देख कर अमित बोला, “क्या बात है आंटी जी, आप कुछ परेशान लग रही हैं l”

‘’नहीं” कहते हुए स्वीटी ने हंसने की कोशिश करी तो अमित के कान खड़े हो गए , ‘यह तो वो हंसी है ही नहीं है जो इतने महीनों से कानों में खनकती रही है l’ और उसने अपना शक ज़ाहिर करते हुए कहा, “आंटीजी, या तो आपका गला खराब है या फिर आप वसुधा हैं ही नहीं l बताइए सच क्या है आंटी जी “ अमित की बात सुनते ही स्वीटी के पसीने छूट गए l किसी तरह खुद को सम्हाला और गला खराब होने का बहाना करके ज़ोर से खांसते हुए वहां से उठ कर स्वीटी बाहर आ गई और झट से एक ऑटो रोक कर घर की तरफ रुख किया l अमित भी उसके पीछे पीछे आवाज़ देता हुआ आया पर स्वीटी ने सुन कर भी उसकी आवाज़ पर कान नहीं दिये l

अमित समझ तो गया था कि यह आंटी जी वो फोन पर बात करने वाली वसुधा नहीं हैं और उस घूंघरू सी बजने वाली आवाज़ ने उसे बेवकूफ बनाया है l‘लगता है मैडम वसुधा मुझे पसंद करने लगी हैं और इसी लिए मेरा इम्तहान ले रही हैं l कोई बात नहीं वसुधा जी, मैं एक दिन साबित कर दूंगा कि मैं आपकी आवाज़ का सच्चा आशिक हूं l’ और वसुधा को फोन करने के इरादे से उसने जेब में से अपना मोबाइल निकाल कर उसका नंबर मिलाया तो वसुधा ने फोन काट दिया क्योंकि वो पहले स्वीटी आंटी से पूरी रिपोर्ट ले लेना चाहती थी l

घर पंहुचते ही स्वीटी ने फोन करके वसुधा को फौरन अपने घर आने को कहा तो वसुधा आंटी की टोन सुन कर थोड़ी घबरा गई और जब तक वो आंटी के घर पंहुच नहीं गई तब तक उसके मन में सैंकड़ों सवाल उठते रहे और वो स्वीटी आंटी को अपने प्लान में शामिल करने के अपने इरादे पर पछताती रही l दरवाजा खोलते ही स्वीटी ने जब गुस्से भरी नज़रों से उसे ऊपर से नीचे तक देखते हुए उसे डांटना शुरू कर दिया तब तो वसुधा के होश ही उड़ गए, “सौरी आंटी, क्या हुआ बताइये ना प्लीज़, अमित ने कोई बदतमीजी करी आपके साथ या कुछ कहा?”

स्वीटी ने गुस्से से जवाब दिया, “ बेवकूफ लड़की ! तेनु जरा भी अक्कल नहीं थी जो मैनु उस मुंडे से मिलने भेज दिया l इतने प्यारे और शरीफ मुंडे के सामने झूठ बोलने में भी मैनु शरम आ रही सी l तू अपने आप को वड्डी चालाक समझती है ना अरे अमित तुझसे ज़्यादा स्मार्ट है मेरी आवाज़ सुनते ही जान गया के उसके साथ तूने मज़ाक किया है और मैं वसुधा नहीं हूं l” और स्वीटी आंटी मुंह फुलाकर सोफ़े पर बैठ गईं l वसुधा ने हाथ जोड़ कर अपनी बेवकूफी के लिए माफी मांगी तब स्वीटी का मूड तो ठीक हुआ लेकिन उसने वसुधा को अल्टिमेटम दे दिया कि आगे से वसुधा उससे इस मामले में किसी किस्म की मदद की उम्मीद ना करे l

वसुधा ने आंटी को मनाने के लिए कहा कि अब वो इस किस्से को खत्म ही कर देगी और अमित से कभी भी फोन पर बात नहीं करेगी l तभी वसुधा का फोन बजने लगा और देखा तो अमित कौल कर रहा था l वसुधा की हिम्मत नहीं हुई बात करने की l “अमित का फोन है?” स्वीटी ने पूछा तो वसुधा ने सिर हिलाकर ‘हां’ कहा l “तो बात कर उससे और मांग माफी अपने इस ड्रामे के लिए l” वसुधा ने इंकार करना चाहा तो आंटी ने फोन सोफ़े से उठा कर वसुधा के हाथ में पकड़ाया और बात करने को कहा l मजबूरन वसुधा ने हेलो किया तो अमित हंस कर बोला, “अरे वाह! वसुधा आंटी घर पंहुचते ही आपका गला तो एकदम ठीक हो गया!” उसकी बात सुनकर ना चाहते हुए भी वसुधा को हंसी आ गई और अपनी हरकत के लिए माफी मांगते हुए उसने कहा , “सॉरी अमित, तुम्हें मैंने बहुत परेशान किया l मुझे माफ करना l जानते हो, मेरी जो आंटी तुमसे मिलने आई थीं वो तुमसे इतनी इम्प्रेस्ड हैं कि तब से मुझे डांट रही हैं कि तूने इतने अच्छे लड़के को क्यों बेवकूफ बनाया l”

अमित ने फौरन उन आंटी जी से बात करने की इच्छा व्यक्त करी तो वसुधा ने फोन श्रीमती मंचन्दा को पकड़ा दिया l स्वीटी ने वसुधा के प्लान में शामिल होने की अपनी बचकानी हरकत के लिए अमित से माफी मांगी तो वो झट से बोला ,”आंटी जी, अगर आप मुझसे मिलने ना आतीं तो मेरी आपसे पहचान कैसे होती? अब कम से कम उस झूठी वसुधा आंटी की जगह मुझे एक प्यारी सी आंटी जी मिल गईं l वैसे आंटी जी आप एक बात ज़रा अपनी उस लाड़ली को समझा दीजिएगा कि मैंने उसकी आवाज़ को दिल से प्यार किया है, उसे चाहा है और मैं सैंकड़ों आवाज़ों में से भी उसकी आवाज़ को पहचान सकता हूँ इसलिए दोबारा ऐसी कोई हरकत करने की कोशिश ना करे l एक बात और आंटी जी, वसुधा से कह दीजिएगा कि मैं उसका पीछा छोड़ने वाला नहीं हूं , क्योंकि मैं उसे अपने आप से भी ज्यादा चाहता हूं l उसकी आवाज़ मेरी ज़िंदगी है, अगर नहीं सुनूंगा तो ज़िंदा नहीं रह पाउंगा l” मिसिज मंचन्दा ने उसे इस तरह की इमोशनल बातें करने के लिए डांटते हुए कहा कि कभी वो अपनी आंटी से मिलने उनके घर आए तो स्वीटी को अच्छा लगेगा l अमित ने एक शर्त पर आने का वादा किया कि आंटी जी असली वसुधा से उसकी मुलाक़ात करवाएंगीl

अमित की बात सुनकर स्वीटी ने मज़ाक में कहा ‘बेटा, तुम तो कह रहे थे कि हजारों आवाज़ों में भी तुम वसुधा को पहचान सकते हो तो फिर ढूंढ लो अपनी वसुधा को उसकी आवाज़ से l” और स्वीटी आंटी ने फोन काट दिया l अमित की बेचैनी बढ़ गई l ‘ अब क्या करूं?’ यह सवाल रह रह कर उसे परेशान कर रहा था l इच्छा हुई कि वसुधा से बात करे मगर फिर रुक गया l ‘ मैं ही क्यों हमेशा फोन करूं? उसे भी तो कभी कौल करना चाहिए l’ और फिर कई दिन गुज़र गए, ना अमित ने फोन किया और ना ही वसुधा ने बात करने की कोशिश करी l दोनों ही एक दूसरे की आवाज़ सुनने को तरस रहे थे पर दोनों का ही अहम आड़े आ रहा था l

इसी बीच परीक्षाएं सिर पर आ गईं और फोन से हट कर दोनों का ध्यान अपनी अपनी पढ़ाई की तरफ लग गया l अमित का पहला पर्चा था और वो अपने परीक्षा केंद्र में अपनी सीट का पता करने के लिए लिए गया था l परीक्षा केंद्र के दफ्तर के बाहर नोटिस बोर्ड के पास छात्र और छात्राओं की भीड़ लगी हुई थी और सभी अपने सीट नंबर जानने के लिए बेचैन हो रहे थे l कुछ दूर पर कुछ लड़कियां भी खड़ी होकर भीड़ छंटने का इंतज़ार कर रही थीं l अमित भीड़ में घुस कर नोटिस बोर्ड तक पंहुचने की कोशिश कर रहा था तभी एक परिचित हंसी सुनाई पड़ी और वो नोटिस बोर्ड पर अपना नंबर देखने के बजाय भीड़ से बाहर आकर उस हंसी को ढूँढने के लिए इधर उधर देखने लगा l फिर से वही चिर परिचित हंसी के घुँघरू खनखनाए तो अमित ‘वसुधा’ कह कर उसी दिशा में दौड़ गया l आवाज़ लड़कियों के झुंड से ही आई थी और अब अमित अपनी खोई हुई आवाज़ के पास पंहुच चुका था l वसुधा किसी लड़की से बात कर रही थी तो आवाज़ पहचान कर अमित ने उसके पास जाकर धीरे से पुकारा,”वसुधा “ वसुधा ने चौंककर उसकी तरफ देखा और जब अमित ने अपना नाम बताया तो वसुधा का मुंह खुशी और हैरानी से खुला का खुला रह गया l

अपने इस फोन वाले दोस्त को आज अपने सामने देख कर वसुधा तुरंत अपनी सहेलियों की भीड़ से निकल कर अमित के पास आकर खड़ी हो गई l “तुम यहां... यहां क्या कर रहे हो? और तुमने मुझे पहचाना कैसे अमित?”

वसुधा के सवाल पर अमित ने मुस्कुरा कर जवाब दिया , “तुम्हारे पहले सवाल का जवाब यह है कि किसी कौलेज में कोई डाका डालने तो आएगा नहीं l इन सारे स्टूडेंट्स की तरह ही मैं भी अपनी सीट के बारे में पता करने आया हूं, क्योंकि मेरा सेंटर इसी कौलेज में पड़ा है l अब जवाब नंबर दो, मैंने कहा था न कि तुम्हारी आवाज़ मेरे दिलो दिमाग में इस तरह बसी हुई है कि उसे मैं हजारों आवाज़ों के बीच में भी पहचान सकता हूँ l अब कोई और सवाल पूछना चाहती हो तो वह भी पूछ लो l” वसुधा ने झेंप कर नज़रें चुराने की कोशिश करते हुए कहा, “सॉरी वंस अगेन, उस दिन के लिए l” बातें करते हुए दोनों बाहर आगए और फिर एक दूसरे से संपर्क में रहने का वादा करके अपने अपने घर चले गए l एक बार फिर से फोन पर बात चीत का सिलसिला शुरू हो गया और अब पिछली मुलाक़ात का अपनापन बातचीत में झलकने लगा था l लेकिन पढ़ाई और परीक्षा के बोझ तले दबे दोनों मित्रों की बात चीत कम ही हो पाती थी l वसुधा के पेपर्स खत्म हो चुके थे इसलिए उसने एक दिन अमित को फोन किया तो पता चला कि अभी उसके दो पर्चे बाकी हैं और अगले पंद्रह दिनों तक उसे फुर्सत नहीं है l

वसुधा ने उसे परीक्षा के बाद मिलने को कहा लेकिन मन ही मन अमित के प्रति अपने खिंचाव के बारे में सोचने लगी l ‘कुछ बात तो है जो पहले कभी किसी के लिए महसूस नहीं की थी l उससे मिलने के बाद अक्सर उसके बारे में सोचते रहना , उसके फोन का इंतज़ार करना... यह सब क्या है? क्या वो अमित को पसंद करने लगी है?’

लेकिन अगले ही पल वसुधा ने इन ख़यालों को झटकते हुए खुद को समझाया कि अभी उसे अपनी पढ़ाई पर ध्यान देना है ना कि इन फालतू बातों पर l मगर फिर भी मुलाकातों और बातों का सिलसिला चलता रहा और इस बीच में परीक्षा के नतीजे भी आ गए l वसुधा और अमित दोनों ही अच्छे अंकों से उत्तीर्ण हो गए थे और अब आगे की पढ़ाई के लिए अच्छे कौलेजों में एडमिशन लेने की भाग दौड़ शुरू हो गई थी l कभी कभी ऐसे ही एडमिशन के सिलसिले में किसी कौलेज में भटकते हुए दोनों टकरा जाते थे, लेकिन मुलाकातों का वक्त दोनों में से किसी के पास नहीं था l

वसुधा की मां ने तो ग्रेजुयेशन पूरा होते ही उसकी शादी करवाने की रट पकड़ ली थी, जिससे परेशान हो कर वसुधा ने शहर से बाहर के किसी कॉलेज से एमबीए करने के इरादे से पुणे के एक अच्छे कौलेज में एडमिशन ले लिया l माँ को अच्छा नहीं लगा लेकिन पापा ने अपनी लाड़ली के पक्ष में वोट डाल कर अपनी पत्नी की ज़िद को नाकाम कर दिया l इस बीच में अमित से कोई बात नहीं हो पाई थी इसलिए पुणे जाने से पहले वसुधा ने उसे फोन करके अपने जाने की खबर दी तो अमित ने बताया कि वो भी आगे की पढ़ाई करने के लिए आस्ट्रेलिया जा रहा है और दो साल बाद ही वापिस आएगा l दोनों ने एक दूसरे से वादा किया कि ई मेल और वाट्सएप के जरिये एक दूसरे के संपर्क में रहेंगे l शुरू शुरू में तो वादा निभा लेकिन धीरे धीरे व्यस्तताएं बढ़ने लगीं और संपर्क टूटने लगा l जब वसुधा का एमबीए पूरा हुआ और केम्पस सलेक्शन के अंदर उसे एक अच्छी कंपनी में नौकरी मिल गई तो वो दिल्ली चली गई और इस बात की सूचना उसने अमित को दे दी l अमित ने उसे बताया था कि कुछ महीनों बाद उसकी पढ़ाई भी पूरी हो जाएगी और वो वापिस मुंबई आकर अपने पापा का बिज़नस जॉइन कर लेगा l

वसुधा को दिल्ली आए हुए छ्ह महीने हो गए थे और अब वो नए शहर और अपनी कंपनी में हिलमिल गई थी , कई नए दोस्त भी बने थे पर अमित अक्सर याद आता था और तब वो उसे फोन मिला लेती थी l एक बार बातों बातों में पूछ भी लिया था कि अब क्या उसे वसुधा की आवाज़ सुनने की इच्छा नहीं होती है जो वो फोन ही नहीं करता है ? तब जवाब में अमित ने हँस कर कहा था कि अब उसके पास वसुधा की रिकोर्डेड आवाज़ है उसके फोन में , उसी को सुनकर वो तसल्ली कर लेता है l वसुधा ने चिढ़ कर पूछा था , ‘’मिलने का मन नहीं होता क्या ? अब तो तुम मुंबई वापिस आगए हो , तो कभी दिल्ली आजाओ l” जवाब में अमित ने कहा कि अब तो वो वसुधा से उसकी शादी में ही मिलेगा l यह सुन कर वसुधा ने कुछ परेशान सी आवाज़ में पूछा , “तुम कब शादी कर रहे हो ?” जिसके जवाब में अमित ने फोन ही काट दिया था और उसकी इस हरकत ने वसुधा को बहुत चोट पन्हुचाई थी l ‘ लगता है अमित शादी कर चुका है l’ और अपनी इसी सोच में उलझी वसुधा ने अमित से संपर्क बिलकुल तोड़ दिया l

कुछ दिनों बाद वसुधा की मां का फोन आया और उन्होने एक रिश्ते के बारे में बताते हुए उसकी राय पूछी तो अमित की चुप्पी से खीजी हुई वसुधा ने माँ से रिश्ता तय करने को कह दिया l माँ ने बताया कि लड़का एक बार उससे मिलना चाहता है इस लिए वो छुट्टी लेकर मुंबई आजाये l वसुधा ने कहा कि उसे किसी से नहीं मिलना है तब उसके पापा ने समझाकर कहा कि लड़का और परिवार बहुत अच्छा है और मुंबई के ही लोग हैं l उन लोगों को रिश्ता पसन्द है पर लड़का एक बार वसुधा से मिलना चाहता है इसलिए वसुधा एक हफ्ते के लिए घर आ जाए तो अच्छा है l

आखिर वसुधा छुट्टी लेकर घर आ आगई और अगले दिन लड़के से मिलने की बात तय हुई l पापा ने बताया कि लड़का मिसिज मंचन्दा के घर पर मिलेगा क्योंकि वो लड़के की आंटी हैं और वो ही यह रिश्ता लेकर भी आईं थीं l वसुधा ने मन ही मन लड़के की अकड़ पर कुछ उच्च कोटि के शब्दों का प्रयोग करके उसके प्रति अपने गुस्से को शांत किया और फिर स्वीटी के यहाँ जाने के लिए तैयार होने लगी l जब माँ ने उसे जींस और टी शर्ट पहन कर चलते हुए देखा तो आजकल की लड़कियों की अक्ल पर कसीदे पढ़ते हुए बेटी को ढंग से तैयार होकर चलने को कहा l वसुधा बोली ,” माँ , मैं जैसी हूँ वैसे ही जिसे पसंद करना है तो करे वरना मुझे यह शादी वादी नहीं करनी है” l “ माँ बेटी के बीच के विवाद को रोकते हुए वसुधा के पापा ने पत्नी को आज कल के बच्चों की पसंद को ध्यान में रखने को कहा और फिर वे लोग स्वीटी के घर चल दिये l

मिसिज मंचन्दा ने मुसकुराते हुए उन लोगों का स्वागत किया तो वसुधा की माँ ने बेटी की शिकायत करते हुए कहा , ‘’स्वीटी बहन , इस लड़की को बहुत समझाया था कि ठीक से कपड़े पहन कर चल मगर यह सुनती ही कहाँ है l” स्वीटी जी ने वसुधा को घूर कर कहा ,” चल कोई नई , साडा मंटू भोत खुले दिमाग का मुंडा है तेरे इन कपड़ों पर कुछ नईं बोलने वाला l” अंदर लेजाकर मिसिज मंचन्दा ने उनलोगों को बैठने को कहा और बताया कि लड़का अपने मम्मी पापा के साथ कुछ देर में पंहुचने ही वाला होगा फिर उन्होने वसुधा को अंदर कमरे में जाने को कहा और बोलीं कि जब लड़के वाले आजाएंगे तब वो उसको बाहर बुला लेंगी l

कुछ देर बाद बाहर के कमरे से कुछ बात चीत की आवाज़ें आने लगीं तो वसुधा ने कमरे से झांककर देखा और कुछ नए चेहरे देख कर समझ गई कि मेहमान आगए हैं l लड़के को देखने की कोशिश करनी चाही तभी स्वीटी आंटी अंदर आईं और उसे बाहर चलने को कहते हुए समझाने लगीं कि जाकर लड़के के माँ बाप के चरण स्पर्श कर लेना ताकि उनको लगे कि विदेशी कपड़े पहनने वाली लड़की के संस्कार भारतीय ही हैं l बाहर के कमरे में पंहुची तो देखा लड़का तो बालकनी में ऐसे खड़ा है जैसे उसे लड़की से मिलने में कोई रुचि ही नहीं है पर उसके माता पिता लड़की पर ही नज़र गड़ाए बैठे थे l वसुधा को यह सारा ड्रामा बड़ा ही अटपटा लग रहा था लेकिन वो चुपचाप आई और आंटी के कहने के अनुसार लड़के के माता और पिता के पाँव छूने को झुकी तो लड़के की माँ ने उसे उठा कर अपने पास बैठाते हुए अपने बेटे की पसंद की तारीफ़ों के पुल बांधने शुरू कर दिये l वसुधा को बड़ा अजीब लग रहा था इस तरह अपनी तारीफ सुनना l तभी लड़के की माँ बोलीं , “ बेटा हमारे मंटू ने तुम्हारी आवाज़ की इतनी तारीफ करी है कि हम तो तुम्हारी आवाज़ सुनने के लिए तड़प रहे हैं l कुछ तो बोलो , हम भी तो सुने वह आवाज़ जिसने हमारे बेटे को दीवाना बना दिया है l” अब तो वसुधा को कांटो तो खून नहीं रहा l ‘अमित के अलावा यह दूसरा कौन सा मेरी आवाज़ का दीवाना पैदा हो गया ?’ और फिर उसने पलट कर बालकनी में खड़े लड़के की तरफ देखा तो सामने अमित उसको देख कर मुस्कुरा रहा था l

“हैरान वसुधा कभी अमित को तो कभी स्वीटी को देखने लगी मगर उसकी नज़र में हैरानी से ज़्यादा किसी खोई हुई बड़ी प्यारी चीज़ के अचानक मिल जाने की खुशी झलक रही थी जो किसी की भी निगाह से बच नहीं सकी l वसुधा की माँ ने पास आकर धीरे से वसुधा से पूछा , “ तू इसे पहले से जानती है ?” वसुधा ने सिर हिलाते हुए हाँ में जवाब दिया तब अमित सबके पास आकर बोला, “आंटी अंकल , आप की बेटी को नाटक करना बहुत पसंद है इसी लिए मैंने भी स्वीटी आंटी के साथ मिल कर यह नाटक किया l”

वसुधा बेचारी शर्म से गड़ी जारही थी और अमित उसे अपनी बातों से परेशान किए जा रहा था यह देख कर उसकी मम्मी ने उठकर वसुधा का हाथ पकड़ कर अपने पास बैठाते हुए कहा , “अमित खबरदार जो वसुधा को ज़्यादा परेशान किया l चुपचाप आकर यहाँ बैठ जा और हम लोगों को आगे की प्लानिंग करने दे l”

- आरती पंड्या

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