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दिव्यांगों के लिए दिव्य पहल:IIT की प्रोफेसर ने स्टूडेंट के साथ मिलकर बनाई स्मार्ट व्हीलचेयर, ऊबड़-खाबड़ रास्तों पर भी नहीं थमेगी रफ्तार

नई दिल्ली5 दिन पहले
  • 3 लाख व्हीलचेयर बिक जाती हैं भारत में हर साल
  • 2.5 लाख व्हीलचेयर आयात की जाती हैं हर साल
  • 95 फीसदी ऐसी जो सभी के लिए आरामदेह नहीं

देश में बहुत से लोग ऐसे हैं, जो दूसरों के बारे में भी सोचते हैं और उनके लिए कुछ कर गुजरते हैं। ऐसी ही बदलाव लाने की एक कहानी भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान (आईआईटी) मद्रास की प्रोफेसर सुजाता श्रीनिवासन ने अपने स्टूडेंट स्वास्तिक सौरव दास की मदद से लिखी है। इन लोगों ने चलने-फिरने में लाचार दिव्यांगों की मुश्किलों को आसान बनाने के लिए ऐसी व्हीलचेयर बनाई, जो ज्यादा आरामदेह और आत्मनिर्भर बनाने में अहम है। दरअसल, दिव्यांगों को सबसे ज्यादा दिक्कत आती है, बाजारों में, सड़कों पर या फिर खेतों में, जहां वे आसानी से घूम-फिर नहीं सकते। उनके पास व्हीलचेयर तो होती है, मगर अक्सर कई मौकों पर उन्हें दूसरों की जरूरत पड़ती है। सुजाता और उनकी टीम की बनाई व्हीलचेयर ऐसे दिव्यांगों को आत्मनिर्भर बनाती हैं और एक नई तरह की आजादी महसूस कराते हैं। दरअसल, एक रिपोर्ट कहती है कि भारत में हर साल करीब 3 लाख व्हीलचेयर बिकती हैं। इसमें से 2.5 लाख व्हीलचेयर आयात की जाती हैं। इन व्हीलचेयर में 95% एक ही साइज की होती हैं, जो सभी के लिए आरामदेह भी नहीं होती हैं। ऐसे में सुजाता के स्टार्टअप का मकसद 2025 तक एक लाख जरूरतमंद लोगों तक व्हीलचेयर पहुंचाने की है।

इस व्हीलचेयर की मदद से कहीं भी जाया जा सकता है।
इस व्हीलचेयर की मदद से कहीं भी जाया जा सकता है।

सुजाता के विजन ने दिखाई औरों को राह, खड़ा किया स्टार्टअप
आईआईटी मद्रास की प्रोफेसर सुजाता और उनके स्टूडेंट रहे स्वास्तिक की टीम ने अपने विजन को साकार करने के लिए साल 2020 में एक नए स्टार्टअप नियोमोशन की शुरुआत की। इस स्टार्टअप की मदद से कोई भी अपनी जरूरत के मुताबिक व्हीलचेयर बनवा सकता है। सुजाता की टीम में अलग-अलग बैकग्राउंड और फील्ड के लोगों को जोड़ा गया है। इसमें दो दर्जन से ज्यादा लोग काम करते हैं। सुजाता अपनी पूरी टीम को प्रेरित करती रही हैं।

बिजली से चार्ज होती है व्हीलचेयर, पथरीली राहों पर भी आसान
नियोमोशन के तहत बिजली से चार्ज होने वाली व्हीलचेयर बनाई जाती है। यह पहली स्वदेशी मोटर व्हीलचेयर है, जो ऊबड़-खाबड़, पथरीली या सपाट राहों पर आसानी से चल सकती है। वह भी बिना किसी की मदद लिए। 25 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से चलने वाली यह व्हीलचेयर दिव्यांगों की जिंदगी आसान बनाती है। इस स्टार्टअप के जरिये देशभर में 600 से ज्यादा लोगों को व्हीलचेयर बेची जा चुकी है। वहीं, 150 जरूरतमंद लोगों को फ्री में व्हीलचेयर दी गई है।

स्टार्टअप की टीम।
स्टार्टअप की टीम।

सुजाता की अगुवाई में की रिसर्च, 40 शहरों के दिव्यांगों से की मुलाकात
अपनी प्रोफेसर सुजाता के नेतृत्व में ओडिशा निवासी 30 साल के स्वास्तिक ने ग्रेजुएशन और पोस्ट ग्रेजुएशन की पढ़ाई आईआईटी मद्रास से की। स्वास्तिक फाइनल ईयर में आईआईटी मद्रास के रिहैबिलिटेशन रिसर्च डिजाइन एंड डिसेबिलिटी सेंटर में अपनी प्रोफेसर के अंडर रिसर्च के दौरान कुछ नया करने के लिए प्रेरित हुए। इस दौरान उन्होंने देश के 40 शहरों में 200 ऐसे दिव्यांगों से मुलाकात की, जो व्हीलचेयर इस्तेमाल करते थे। स्वास्तिक ने इन सभी की मुश्किलें जानीं और उसी आधार पर पूरी टीम ने व्हीलचेयर का नया मॉडल बनाया। ज्यादातर ने कहा कि देर तक व्हीलचेयर पर बैठे रहने से कमर, पीठ और कंधे में दर्द हो जाता है और कई कामों के लिए दूसरों की मदद लेनी पड़ती है।

ये है नियोमोशन के व्हीलचेयर की खासियत
सुजाता के स्टार्टअप नियोमोशन की ओर से बनाए गए व्हीलचेयर दो तरह के नियोफ्लाई और नियोबोल्ट हैं। नियोफ्लाई व्हीलचेयर सेहत और जीवनशैली के मुताबिक 18 तरीकों से मॉडिफाई की जा सकती है। वहीं, मोटर से लैस नियोबोल्ट व्हीलचेयर स्कूटर में बदला जा सकती है, जो एक बार चार्ज करने पर 25 किमी तक चलेगी। इसमें सेफ्टी फीचर्स जैसे ब्रेक, हॉर्न, लाइट और मिरर भी लगे हैं।

नियोफ्लाई की कीमत 40 हजार तो नियोबोल्ट 55 हजार
नियोफ्लाई व्हीलचेयर की कीमत 39,900 रुपये, जबकि नियोबोल्ट की कीमत 55,000 रुपये है। इसे स्टार्टअप की वेबसाइट पर एक हजार रुपये का पेमेंट कर ऑर्डर बुक किया जा सकता है। जल्द ही भारत के बाहर भी इन व्हीलचेयर की मार्केटिंग की जाएगी। सोशल मीडिया पर इसे प्रमोट किया जा रहा है।