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किसे अपना कहें:शादी में पिता ने ही आयोना की राह में पत्थर रखा, जब राज खुला तो सच्चाई सामने आई

7 दिन पहले
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“क्यों नहीं? जरूर आऊंगी। हां, हां, रुकूंगी भी और धमाल भी करूंगी। ठीक है, दोस्त को भी ले आउंगी। और कुछ?” आयोना ने फोन रखा ही था कि सामने संभव को देखकर चौंक पड़ी।

“तुम अचानक से इतने करीब आकर चुपचाप खड़े हो जाते हो कि जब नजर पड़ती है, डर जाती हूं मैं,” वो नकली नाराजगी दिखाते हुए इठलाई।

संभव ने भी नाटकीय दुख में फरमाया, “मैं तो कबसे तुम्हारे इतने करीब चुपचाप खड़ा हूं, पर तुम्हारी नजर ही नहीं पड़ती।”

उसका मतलब समझते हुए आयोना मुस्कुरा दी, “मेरे साथ मेरी चचेरी बहन की शादी में चलोगे? चाचीजी ने तुम्हें भी बुलाया है।”

“इंडियन मैरिज? मतलब ढेर सारी मजेदार रस्में और हर रस्म में फ्लर्ट करने के हजारों बहाने। जरूर चलूंगा। पर कहीं तुम्हारी चाची ने मेरी पिटाई करने के लिए तो नहीं बुलाया है?”

“ये भी हो सकता है,” आयोना ने चहककर संभव के कंधों पर हाथ रख दिए।

“ठीक है, तुम्हारे इश्क में ये भी सहना है तो ये भी सही,” कहकर हंसते हुए संभव ने आयोना को बांहों में भर लिया। कुछ देर एक-दूसरे की भीनी छुअन की मदहोश बारिश में नहाने के बाद संभव ने गालों पर चुंबन देने शुरू किए तो आयोना ने खुद से कड़ी लड़ाई लड़ते हुए हौले से खुद को संभव से दूर कर लिया। दोनो की बांहें एक-दूसरे पर फिसलती हुई अलग हो रही थीं और एक-दूसरे की आंखों में दूर हो जाने की कसक दोनों महसूस कर सकते थे।

रेड कलर की क्रेप शिफॉन साड़ी में आयोना को इंडियन साज-सज्जा के साथ तैयार देख संभव एक पल को सम्मोहित सा खड़ा रह गया, “आज अपने ईमान पर कंट्रोल करना बड़ा मुश्किल लगता है।” भावुक निगाहों से उसे एकटक ताकता संभव उसके बिल्कुल पास से गुजरते हुए फुसफुसाया। आयोना के गाल सुर्ख हो गए।

तभी नीना हड़बड़ाई हुई आई और आयोना से बोली, “दीदी, एक गड़बड़ हो गई है। वेडिंग प्लानर का एंकर नहीं आ पाया है। प्रोगाम कैसे होगा?”

आयोना और संभव एक मल्टी नेशनल कंपनी में मार्केटिंग डिपार्टमेंट में अच्छी पोस्ट पर थे। “बेटा, तुम तो बात करने में माहिर हो। अगर तुम...” चाची ने कहा तो आयोना ने मुस्कुराकर हामी भर दी। संभव भी उसके साथ मंच पर पहुंच गया।

“तो ये कहानी है एक भारतीय लड़की और विदेश में पले-बढ़े लड़के के प्यार की...” संभव ने कहानी सुनाना शुरू किया और एक कपल ने डांस किया।

फिर आयोना ने कहानी आगे बढ़ाई- “दोनों के मन और आत्मा एक हो चुके थे। एक-दूसरे की छुअन उनमें मीठी पुलक भरती और एक-दूसरे से दूरी मन में कसक....” फिर एक डांस हुआ।

संभव ने फिर से कहानी आगे बढ़ाई- “पर लड़की के घर वालों को विदेश में पला दूसरे धर्म का लड़का विश्वास करने लायक नहीं लगता था...”

संभव और आयोना ने मिलकर समा बांध दिया। उनकी आंखों में एक-दूसरे के लिए बेइंतहा प्यार और सामंजस्य सबको साफ दिखाई दे रहा था। यही नहीं, उनके कपल डांस पर तो लोग तालियां बजाना ही भूल गए। बस सम्मोहित से उन्हें देखते रह गए।

पर आयोना के पापा के चेहरे पर मुस्कान का कोई रंग न उभरते देख दोनों मायूस हो गए। रात की रस्में शुरू हो गईं। संभव सारी मौज-मस्ती और हंसी-ठिठोली के बीच आयोना को एकटक ताक रहा था और आयोना के पापा की नजरें संभव पर टिकी थीं।

तभी संभव के प्रशंसा भरे चेहरे को इठलाती हंसी के साथ निहारती आयोना का पैर ऐसी जगह किसी चीज से टकराया जहां आगे कांच का शो-पीस रखा था। आयोना गिर पड़ी और उसका हाथ बुरी तरह छिल गया। सब उसकी ओर दौड़े, पर सबसे पहले संभव दौड़ा। आयोना की मरहम-पट्टी करने के बाद सब साथ बैठे थे।

आयोना की मां उसके पिता को घूर रही थीं, मानो बेटी की छोटी सी चोट पर आसमान सिर पर उठाने वाले उसके पिता आज तटस्थ क्यों हैं, पर पिता कुछ और ही देख रहे थे।

संभव अपने हाथों से आयोना को खाना खिला रहा था। हर कौर के साथ दो नजरें उसे देख रही थीं कि उसे आयोना की पसंद-नापसंद, उसके खाने के ढंग का कितना गहरा आइडिया है।

“अगले कुछ दिन कितने क्रूशियल हैं। मैंने इस प्रोजेक्ट पर कितनी मेहनत की है और क्यों की है, तुम जानते हो। मेरे तो हाथ-पैर दोनो घायल हो गए। कैसे होगा?” आयोना की पलकों पर ठहरे मोती अपनी उंगली पर लेते हुए संभव बोला, “तुम किसी बात की चिंता न करो। तुम ठीक होने तक ऑफिस नहीं जाओगी। तुम्हारा सारा काम होगा और तुम्हारे नाम से ही होगा।”

एक हफ्ते बाद संभव आयोना के प्रमोशन की मिठाई लेकर आया।

“पापा, ऑफिस के मेरे सारे पेंडिंग कामों से लेकर घर से वीडियो कॉल करके अपना प्रेज़ेंटेशन देने के लिए बॉस को मनाने तक सारे काम संभव ने किए। तभी...” पर पापा का मुस्कुराता चेहरा देख वो शरमा गई।

पापा भावुक हो गए। उन्होंने आयोना का हाथ अपने हाथों में ले लिया और बोले, “मुझे माफ करना बेटा। वो पत्थर, जिससे तुम टकराई थीं, मैंने ही तुम्हारी राह में रखा था।”

सबके चेहरे पर आश्चर्य और मां के चेहरे पर गुस्सा देख उन्होंने बात आगे बढ़ाई, “बचपन में जब एक बार डॉक्टर ने आयोना को कैंसर होने का शक जताया था और उसके लिए बड़ा दर्द देने वाला टेस्ट बताया था, तब पहली बार मैंने खुद अपने हाथों अपनी बेटी को दर्द दिया था। तुम टेस्ट न कराने पर अड़ी थीं, पर मैं जानता था कि निश्चिंत होने या इलाज शुरू करने के लिए ये जरूरी है। आज भी...” पापा की आवाज रुंध गई।

माहौल को समझते हुए मां बोल उठीं, “आप ठीक कहते हैं। अगर प्यार झूठा हो तो उससे बड़ा रोग कोई नहीं और सच्चा हो तो उससे बड़ी दवा कोई नहीं।”

माता-पिता की आंखों में स्वीकृति पढ़कर आयोना और संभव की आंखों में खुशी के आंसू आ गए।

- भावना प्रकाश

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