E-इश्क:'चिड़ियों से ज्यादा मुझे घोंसले अच्छे लगते हैं, उनमें सपना जो रखा रहता है'

नई दिल्ली4 महीने पहले
E-इश्क

मेरा और आलाप का रिश्ता अजीब सा है। हम दोनों ही बहुत कोशिशों के बावजूद एक दूसरे को नहीं समझते। हर छोटी बात झगड़े में ही खत्म होती है। इस झगड़े को ही शायद इश्क कहते हैं...अगर ये इश्क है तो मेरी समझ से परे है। लेकिन आलाप से लड़ने और जीत जाने के बाद भी जीत का जश्न मनाने का मन नहीं करता...क्यों? अब आपसे क्या छुपाना कल की बात है। हम मिले और हमारा झगड़ा चाय और आइस्ड लेमन टी जैसी छोटी सी बात पर हो गया, नाराजगी बड़ी हो गई। पीजी के गेट पर उसने मुझे ड्रॉप किया और मैं खामोशी की पुड़िया को मुट्ठी में दबाए चुपचाप कार से उतर गई। पता नहीं कैसे मन का नेटवर्क फिर भी आलाप से कनेक्टेड रहा। शायद इसीलिए आलाप का मैसेज आ गया। लिखा था, ‘सच तो ये है कि मुझे चोट लगती है।’ ‘मुझे डर लगता है…’ तान्या, मैं जीना चाहता हूं... मैं रोज मर रही हूं… पर जवाब देना तो बनता है… आलाप, मैं खुद को जवाब देने के मूड में नहीं हूं... लेकिन तुम्हारी आवाज तो सुदंर आ रही है… टी जैसे तुम्हारे मैसेज सुंदर होते हैं, वैसी, मैंने देखा वो तान्या से ‘टी’ पर उतर आया था तो सिर्फ मैसेज करूं…. बात न करूं नहीं नहीं...बात भी करो मतलब बात भी करूं और मैसेज भी, टी तुम बहुत डिमांडिंग हो मैं मन ही मन मुस्कुरा उठी हां हां... दोनों क्यों? वो इसलिए कि आलाप बात करने के बाद मैसेज करने का मन करता है और मैसेज के बाद बात करने का। वो क्यों…? कभी कुछ अनकहा, तो कभी कुछ अधलिखा छूट जाता है। तुम्हारा मन दोनों तरफ दौड़ता है टी पर किसी दोराहे पर नहीं है आलाप वाह… मतलब? कुछ नहीं… कुछ तो मतलब होगा, आलाप पूछकर क्या करोगी? फिर वही सवाल...तुम सवाल बहुत पूछती हो? ‘जाओ नहीं पूछती।’ फोन बंद कर मैं खामोश हो जाती हूं अब खामोश क्यों हो गईं? आलाप का मैसेज आता है ‘लफ्ज पास नहीं हैं’...मैं मैसेज का जवाब देती हूं ‘जो लफ्ज पास हैं वही कह दो।’ तुम्हें कैसे पता, आलाप, मेरे पास कहने को कुछ है? बस पता है पर कैसे? आलाप, क्या जवाब देना जरूरी है? तुम्हें लगता है मुझमें ग्रे मैटर की कमी है? शायद... ये ग्रे शेड बड़ा बेवफा होता है, बुद्धि से जुड़ जाए तो बौड़म बना देता है। कैरेक्टर से चिपक जाए तो तबाह कर देता है। टी, तुम दोनों नहीं हो तुम्हें कैसे पता... बस पता है... तुम्हारी नाराजगी मुझे चुभती है, अंदर तक उतर जाती है झूठ के साथ उड़ रही हो टी तुम क्यों लैंडिंग का सोच रहे हो, तुम चाहो तो तुम भी मेरे साथ उड़ सकते हो उड़कर जाना कहां है? तुम बताओ? वीकेंड है, चाय पीने चलते हैं। चाय...? बटरखारी और चाशनी चाय व्हॉट…? चलो तो टेस्ट बाद में डिस्कस कर लेना, मैं तुम्हें लेने आ रहा हूं

मैंग्नोलिया गार्डन, पीपली का चबूतरा और रहीम चाचा की चाय... मैं और आलाप चाय के आने का इंतजार कर रहे हैं। आलाप की सिगरेट जलती है, उसका धुआं अंधेरे में दूर तक उड़ता नजर आता है और पेड़ पर चिड़िया की आवाज सुनाई देती है। आलाप, तुम्हारे इस धुएं ने घोंसले में सोते चिड़िया के बच्चों को जगा दिया है

टी, तुम्हें चिड़ियों से प्यार है... 'चिड़ियों से ज्यादा मुझे घोंसले अच्छे लगते हैं। उनमें सपना जो रखा लगता है, जो अंदर तक महसूस होता है। कभी सहलाता है और कभी छूकर गुजर जाता है…' आलाप, मुझे देखकर मुस्कुराता है, ‘ये क्यों नहीं कहतीं, घोंसले में रखा सपना मीठा भी होता है। चाशनी चाय और तुम्हारी तरह।'

-रश्मि

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