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  • My Sex Worker Mother Has The Right To Say 'no' While Married Women Are Being Victims Of Marital Rape.

सेक्सवर्कर की बोल्ड बेटी जयश्री:मेरी सेक्सवर्कर मां 'नो' कहने का अधिकार रखती है जबकि शादीशुदा औरतें मैरिटल रेप का शिकार हो रही हैं।

एक महीने पहलेलेखक: निशा सिन्हा
  • मैंने जिंदगी से हार मानना नहीं सीखा
  • मुझे ढेरों मांओं का प्यार मिला

मेरे हाथों से खिलौना छूट कर छोटे-बड़े कई टुकड़ों में टूट गया। उतने ही टुकड़ों में दिल। केवल नौ साल की थी मैं, जब बीएमसी स्कूल में साथ पढ़नेवाले मेरे दोस्त ने बताया आज तेरी मां को 'वहां' खड़ा देखा। मेरा छोटा सा दिमाग 'वहां' शब्द को टटोलने लगा। क्योंकि मेरे लिए इसका मतलब उस जगह से था, जहां धंधेवालियां कस्टमर के लिए खड़ी रहती हैं। तो क्या मेरी मां भी सेक्सवर्कर है? जो अजीब भावभंगिमाएं बना कर मर्दों को लुभाती है, अपने शरीर के खास अंगों की नुमाइश करती है। मेरी मासूमियत खुद से जिद करते हुए मन में बोली, नहीं मेरी मां ऐसा नहीं कर सकती...। पर जल्दी ही मेरे छोटे साइज के दिमाग ने जिंदगी के इस गणित को हल कर लिया। फिर जो परिणाम निकाला, उसके बाद मुझे स्थायी और सच्ची पहचान मिली मैं जयश्री, एक सेक्सवर्कर की बेटी हूं।

अब्यूज की पृष्ठभूमि पर तैयार नुक्कड़ नाटक की प्रैक्टिस करती बहादुर बालिकाएं
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डरा सहमा सा मेरा बचपन : असली पहचान पाते ही खुद से शर्म आने लगी, मुझे डर लगने लगा। कहीं यह भेद सभी दोस्तों पर खुल गया तो क्या होगा ? पिता की मौत के दिन ही मां रात तक नए पापा को घर ले आयी। उनकी दूसरी शादी ने तो जैसे मेरे बचपन से बची-खुची मासूमियत भी छीन ली। शुरुआत में मेरे नए पिता का व्यवहार बहुत बुरा था, वो अकसर हम भाई-बहनों पीटा करते। मेरा बचपन अब पहले की तरह नहीं था, बचपन के ताबूत पर आखिर कील, तो उस दिन ठुक गयी, जब मेरे रिश्ते के भाई ने मेरा बलात्कार किया। एक साथ इतने सारे मेंटल ट्रॉमा ने मुझे खामोश कर दिया। मां से तो उसी दिन से नफरत हो गयी थी जिस दिन नए पापा ने मुझ पर हाथ उठाया था। मुझे लगा मां मेरे लिए उनसे झगड़ा करेगी, पर वह खामोश खड़ी देखती रही। उस दिन मान लिया कि पिता के साथ-साथ मां भी चल बसी है। और फिर मां से सदीद नफरत हो गयी। मैं उनको देखना भी नहीं चाहती थी। घटनाएं पूरी तरह से मेरे बचपन का दम घोंट चुकी थी। यही वह समय था, जब मैं क्रांति संस्था के संपर्क में आयी। काफी सीटिंग के बाद एक दिन मेरी काउंसलर ने मुझसे पूछा, "क्या तुमने अपनी मां से बात की है।"

हार शब्द मेरी डिक्शनरी में नहीं
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नाना ने ही बेचा मां को : सालों की नफरत और खामोशी को तोड़ने की हिम्मत करते हुए मैंने मां से बात की, तो एक और कड़वा और नया सच सामने था। मां ने बताया कि केवल 13 साल की उम्र में उनके पिता ने उनको पहली बार बेचा। तब से वह बार-बार बिकी और बिकती ही रही। शादी के बाद भी मां का बिकना जारी रहा। अंतर बस यही था कि शादी के पहले उसकी कमाई से भाई-बहन पल रहे थे, तो शादी के बाद उसके दो बेटे और एक बेटी मैं।

अंधेरा कितना भी घना हो उजाले की तलाश जारी रखनी चाहिए
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बॉस की गंदी नजर मां पर : एक बार मैंने उनसे पूछा, "आई, तुमने कुछ और नौकरी क्यों नहीं की?" मां ने बताया, "जब भी वह कोई नया काम शुरू करने की कोशिश करती, उनके साथ काम करनेवालों की गंदी नजरें उनके शरीर को टटोलने में लगी रहती। कई मर्दाना हाथ उनके शरीर को छूने को बढ़ते।" एक और भी कसैला सच था कि मां को इन कामों में उतना पैसा नहीं मिलता था, जिससे वह पूरे परिवार को पाल सकती। अंत में वह लौट कर फिर उन्हीं बदनाम गलियों में आ गयी। यहां वह खुद को ज्यादा सुरक्षित महसूस करती। उन्हें पता था कि यहां उसे पहचान छिपाने की जरूरत नहीं है।

जमाने की दकियानूसी सोच इन्हें डिगा नहीं सकी
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मां के साथ दोबारा दोस्ती : मां को जब मैंने जानना और समझना शुरू किया, तो यह अहसास हुआ कि मेरी मां उन तमाम औरतों जैसी मजबूर नहीं, जो मैरिटल रेप से गुजरती हैं। शादी के सिंदूर लगाने के बावजूद लातों और घूसों से पिटती हैं और कई बार पति की तरक्की के लिए आगे परोसी तक जाती हैं। मेरी मां का उसके शरीर पर पूरा हक है। वह मर्जी से शरीर का सौदा करती है। जबकि तमाम पढ़ी-लिखी महिलाओं को ना चाहते हुए भी पति के साथ हमबिस्तर होना पड़ता है। इन औरतों को अपने ही घर में 'नो' कहने का अधिकार नहीं है।

जोश जिसने बदल डाला: क्रांति से जुड़ने के बाद मेरे आसपास की दुनिया उजली बनने लगी। मुझे इस बदलते बैकग्रांउड के कारण मुझे स्कॉलरशिप मिली, इसकी वजह से आज मैं बेहद नामी यूनिवर्सिटि में ...... पढ़ रही हूं, जहां अमीर घरों के बच्चे पढ़ते हैं। यहां मुझे 3 साल गुजारने हैं। शुरुआत में हमेशा इस डर के साये में जीती रही कि अगर मेरा भेद खुल गया तो क्या होगा ? किसी को पता चल गया कि मेरी मां सेक्सवर्कर है, तो मैं कहां जा कर मुंह छुपाऊंगी ? क्या मेरा डर वाजिब नहीं। मैंने बहुत मेहनत से सब पाया है। क्रांति से जुड़ने के बाद मैंने अंग्रेजी माध्यम के स्कूल में पढ़ना शुरू किया। बहुत वक्त काउंसलिंग को देने के बाद बचपन की कुंठाओं से बाहर निकल पायी। लेकिन ऐसा कुछ नहीं हुआ, जब दोस्तों को मेरी असलियत पता चली। उनकी उनकी प्रतिक्रिया मेरे लिए चौंकानेवाली थी। मेरे सभी दोस्तों की सोच मेरी तरफ पॉजिटव रही है। मैं जानती हूं कि कई बार तो मुझे सहज दिखाने के लिए वह मेरे दुखों पर अफसोस भी नहीं जताते। इससे बहुत हिम्मत मिलती हैं। हां, आज भी एक बहुत बड़ा माइंडसेट ऐसा है, जो सेक्सवर्क को प्रोफेशनल नहीं समझता। मुझे ऐसे लोगों पर तरस आता है, उनकी छोटी सोच पर दुख होता है। सेक्सवर्कर को भी सेक्स प्रोफेशनल को देखने के लिए दिमाग को बहुत ऊंचे स्तर तक ले जाने की जरूरत पड़ती है, जो हर किसी के पास नहीं होता और समाज से इसकी उम्मीद लगाना बेवकूफी है। ऐसे लोगों के प्रति मैं खुद को जवाबदेह ही नहीं मानती।

कठिन डगर के राही
कठिन डगर के राही

जिंदगी का नया पन्ना : संस्था का एक थिएटर ग्रुप है 'लालबत्ती एक्सप्रेस'। इससे प्रस्तुत होनेवाले नाटक अलग-अलग तरह के मानसिक कष्टों से गुजरे बच्चों को इससे उबरने में मदद करता है। एक नाटक में सेक्सुअल अब्यूज का सीन को करने के बाद मैं खुद ही फूट फूट कर रोने लगी। ऐसे सीन को करने से मैं हमेशा बचती थी। यह सीन मुझे अपने साथ हुए अब्यूज की याद दिलाता था। लेकिन 6 बाद साल तक हिम्मत जुटाने के बाद मैंने इस एक्ट किया। उस दिन से मेरा साहस और बढ़ गया। संस्था की कोफाउंडर बानी दास ने मेरी खूब मदद की। कई दूसरी लड़कियां जो रेडलाइट एरिया से रेस्क्यू करा कर लायी थी। हम सब एक-दूसरे के साथी थे। बानी मैम जब भी हमें रखने के लिए किराए का मकान ढूढ़ती, लोग इनकार कर देते। एक बार तो किसी ने उनसे किराए के हजारों रुपए ले भी लिए और घर से बाहर भी कर दिया। उनकी वजह से हमारे बीच की कई लड़कियां विदेशों मे पढ़ रही हैं

रेडलाइट में मेरी ढेरों माएं : मैंने अपने उस कजन से भी बात की, जिसने मेरे साथ रेप किया था। शायद उसे ऐसा लगा होगा कि चूंकि मेरी मां एक सेक्सवर्कर है, तो मेरे साथ भी ऐसा किया जा सकता है। जबकि लोगों को यह जान कर आश्चर्य होगा कि मैं खुद को रेडलाइट एरिया में बहुत सेफ महसूस करती रही हूं। वहां काम करनेवाली हर सेक्सवर्कर आंटी मुझे प्यार करती थी। जब मां काम की वजह से पूरी रात बाहर रहती, तो मैँ इन्हीं मांओं के साथ रात को सोया करती। लोगों के मन में एक धारणा है कि 'रेडलाइट एरिया' सबसे असेफ जगह है लेकिन मेरे लिए यह दुनिया की सबसे सुरक्षित जगह रही है। हां, जिन लड़कियों को जबरदस्ती यहां लाया जाता है। वो जरूर गलत है। मेरी मां मर्जी से सब कर रही थी। उन पर किसी तरह का दवाब नहीं था। आज मुझे अपनी मां पर गर्व है।

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