E-इश्क:मेरा शाहिद कपूर मुझसे 13 साल छोटा था, उसके इश्क का बिच्छू मुझे डंक मार गया

5 महीने पहले
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बहुत ही क्यूट है लेकिन मुझसे कम से कम 13 साल का छोटा है। वह 22 साल का होगा और मैं 35 साल की। वह ग्रेजुएशन में रहा होगा और मैं एक बैंक में सीनियर मैनेजर। मुझे पता है कि पिछले कई महीनों से वह रोज मेरे आने के बाद जिम आता है। उसे यह भी पता है कि मैं जिम से एक घंटा बाद निकलती हूं इसलिए वह मेरे निकलने से पहले निकल कर जिम की सीढ़ियों की दीवार से टेक लगाकर खड़ा मेरा इंतजार करता है। जिम जॉइन करने के महीनेभर बाद मैंने यह महसूस किया कि एक लड़का मेरे बगल की ट्रेडमिल पर रोज मेरे साथ दौड़ता है। शुरुआत में मुझे यह कोइंसिडेंस लगा, लेकिन बाद में महसूस हुआ कि वह उसकी मासूम मोहब्बत है। मैं यह गौर करने लगी थी कि वह अक्सर मेरे बगल की मशीन पर आकर एक्सरसाइज करने की कोशिश करता है। हालांकि वह जब भी ऐसा करने की कोशिश करता, मैं दूसरी मशीन पर चली जाती। मुझे यकीन हो चला था कि उसे भी मेरे इस अंदाजे की खबर हो गई है। वैसे तो मैं कभी उसे देखती नहीं थी, लेकिन जब कभी उसकी निगाहें मुझसे मिलती थीं, तो मेरा भावशून्य और जरूरत से ज्यादा गंभीर चेहरा उसे कंफ्यूज करता।

कद-काठी में वह लगभग मेरी लंबाई का ही था। उसका चेहरा शुरुआती दिनों के शाहिद कपूर जैसा था। बाल हमेशा सिर के सामने झूलते रहते, जिन्हें वह बीच-बीच में झटकता रहता। वाकई उसके उम्र की कोई भी लड़की इस मजनू पर फिदा हो जाती। मैंने कई बार उसकी एज ग्रुप की कुछ लड़कियों को उसे देखकर ‘सो क्यूट’ बोलते सुना भी।

वह जिम में ऐसी जगह खड़ा होता जहां के शीशे से मैं उसे आसानी से दिख जाऊं। जबकि मैं हर बार ऐसी जगह खड़ी होने की कोशिश करती, जहां से मैं उसे देख सकूं पर वह मुझे न देख पाए। मैं उसके नादान प्यार को हवा नहीं देना चाहती थी। एक हैप्पी मैरिड वुमन होकर मैं उसके आकर्षण में डूबने को तैयार थी, पर मैं चाहती थी कि वह मेरे आकर्षण में छटपटाए। लेकिन हाय, वो मेरे इश्क में पड़ गया था। एक दिन जब उसके दोस्तों ने उसे आवाज लगाई, तो मुझे पता चला उसका नाम रोहन है।

उसके इश्क की सबसे खूबसूरत बात यह थी कि इमैच्योर होते हुए भी वह मैच्योर था, जो इस उम्र के लड़कों में देखने को नहीं मिलता। उसकी नजर में कभी बेशर्मी नजर नहीं आई। उम्र के हिसाब से कभी जरूरत से ज्यादा बेतकल्लुफ भी नहीं दिखा। उसके इस अंदाज पर मेरा भी दिल आ गया। उसकी आशिकी मुझे सुंदर होने का अहसास कराती। वह कभी दो दिन जिम नहीं आता, तो मेरा भी मन नहीं लगता। मुझे डर लगने लगा था कि कहीं दोबारा प्यार न हो जाए।

शनिवार की शाम को जिम में कम लोग होते थे, लेकिन मेरे लिए वह छुट्‌टी का दिन होता, मैं ज्यादा देर वर्कआउट करती। जिम में मेरा ट्रेनर और कुछ लड़के मुझे मैम ही बुलाते। एक-दो मुझे देख कर मुस्कुराते, लेकिन वह कभी नहीं मुस्कुराता। बस जब भी नजरें मिलतीं, मेरी आंखों की गहराइयों में उतरना चाहता और उसी पल मैं नजरें हटा लेती। एक रविवार को वह हिम्मत जुटाकर मेरी मशीन के पास आया। मैं थोड़ा डरी, थोड़ा सिमटी, लेकिन चेहरे से महसूस नहीं होना दिया। उसने पूछा, "आप इस मशीन पर कितनी देर रहेंगी?" मैंने कहा,"टू मोर सेट्स।" लेकिन यह कहते समय मेरी जुबान लड़खड़ा गई और वह मेरी चोरी पकड़ने में कामयाब हो गया। उस दिन मैंने पहली और आखिरी बार उसकी आंखों में झांका। उसके प्यार की गहराई देखकर मैं डर गई और खुद से कहा, 'ए प्यार तेरी बाली उम्र सलाम...' उस दिन के बाद मैंने उस जिम से अपना नाम कटवा लिया, पर दिल पर लिखा उसका नाम मिटा पाने में नाकामयाब रही और अब मैं छटपटा रही हूं। मैंने अपना कैरेक्टर तो बचा लिया, लेकिन दिल नहीं बचा पाई।

- निशा सिन्हा

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