फरेबी प्रेमी का सच:नेहा ने उसके प्यार को ‘लस्ट स्टोरी’ कहा, तो राज ने ऐसा जवाब दिया कि वह मजबूर हो गई

5 महीने पहले
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नेहा कुछ काम से सोशल मीडिया पर बिजी थी, तभी अचानक मैसेंजर पर मैसेज की बौछार हुई। धड़ाधड़ आते नोटिफिकेशन का काउंट्स लगातार बढ़ने लगा। एक-एक कर के कुल 10 मैसेज आने के बाद उनका काउंट रुका।

कोई इतना बेचैन और फ्री है, यह जानकर नेहा खीझ गई। दरअसल, नेहा इंफ्लुएंसर थी और उसे सोशल मीडिया पर ढेरों काम रहते। जिस वजह से ऑनलाइन लाइट का ग्रीन दिखना लाजिमी था। काम करते-करते कब दिन से शाम हो गई उसे पता नहीं चला।

फिर थोड़ा फ्री होकर नेहा ने वापस मोबाइल देखा। उसने कई मिस्ड कॉल को कॉल बैक करना शुरू किया। इसमें भी काफी वक्त गुजर गया।

थोड़ा फ्री होकर नेहा फिर मैसेंजर पर पहुंची। सोचा उस बेचैन आत्मा को देखा जाए। उसका मैसेज था, “हेलो जी, आप कैसी हैं? ठीक-ठाक ही होंगी। यह मेरा नंबर है। आपसे दोस्ती करना चाहता हूं।

मैसेज सीन करने के बाद कई और भी मैसेज आते गए और नेहा इग्नोर करती गई।

फिर एक दिन देश की राजनीतिक स्थिति को लेकर उस अनजाने मैसेंजर ने एक तस्वीर भेजी। नेहा खुद को रोक न सकी। जवाब देना उसे जरूरी लगा। उस दिन नेहा ने जाना, उस बंदे का नाम राज था। उसकी और नेहा की राजनीतिक सोच बिल्कुल अलग थी।

नेहा ने सोचा, कौन-सा उससे शादी करनी थी। अगली सुबह राज ने ‘सॉरी’ लिख भेजा। उसके बाद फिर वही सिलसिला। लगातार नेहा की तस्वीरों पर कमेंट और गुड मॉर्निंग, गुड नाइट मैसेज की बाढ़ आ गई थी। अब राज ‘मिस यू, लव यू और डू यू लाइक मी?’ जैसे मैसेज करने की गुस्ताखियां करने लगा था।

नेहा सभी मैसेज को इग्नोर कर देती, लेकिन उसने राज को ब्लॉक नहीं किया। राज रोज़ाना ही सुबह मैसेज करने बैठ जाता। सुबह नेहा को ऑनलाइन देखकर मैसेज देता, ‘कुछ खा लो, सुबह से कितना और काम करोगी’ या कभी मैसेज में पूछता, ‘अपना व्हॉट्सएप नंबर तो दे दो। अब तो मैं अननोन नहीं हूं।’

उसके ऊलजुलूल मैसेजेस की अब नेहा को आदत हो गई थी। कभी हंसने का मन होता तो मैसेंजर पर उसकी चैट को देखकर हंस लेती। अब तक राज ने अपने बारे में नेहा को सब कुछ बता डाला था। राज को इंतज़ार था कि कब नेहा से जवाब आता है।

नेहा ने उसे ब्लॉक नहीं किया था, उसे राज की आदत पड़ चुकी थी।

एक दिन राज ने लिखा- 'नेहा तुम्हारे शहर में हूं, तुमसे मिलना है, प्लीज। यह मेरा नंबर है। एक बार मिल लो। बस, एक बार बात करने आ जाओ।’

नेहा ने पागल-दीवाना समझकर एक बार फिर राज को इग्नोर कर दिया। राज को उस दिन काफी चोट पहुंची। राज, नेहा के इस बर्ताव से नाराज था, लेकिन नेहा भी कहां गलत थी। नेहा ने अगले दिन मैसेज किया कि हम एक-दूसरे को जानते भी नहीं हैं, तुम मुझे ऐसे कैसे प्यार करने लग सकते हो? राज ने जवाब दिया कि अगर बात ही नहीं करोगी, तो जिंदगी भर हम अंजान ही बने रहेंगे।

नेहा ने एक दिन लिखा, “आखिर, चाहते क्या हो?”

राज ने कहा, “तुम्हें। क्यों इतना इग्नोर कर रही हो। मुझे तकलीफ होती है। आई लव यू नेहा। प्यार करता हूं, तुमसे और जिंदगी भर साथ निभाऊंगा। बस, एक बार भरोसा करके देखो। मुझसे मिल लो”

नेहा का जवाब था, “प्यार तुम्हें हुआ है, मुझे नहीं। यह तुम्हारी प्रॉब्लम है। मैं जानबूझकर तुम्हें तकलीफ नहीं दे रही। क्या सिर्फ तस्वीरें देखकर कोई किसी से प्यार कर सकता है?”

राज का जवाब आया, 'तो रू-ब-रू मिल लो। मैं तो आया ही था, पर तुम नहीं आई।’ उसने आगे लिखा, ‘वैसे भी सूरत से कहीं ज्यादा सीरत मायने रखती है और देखने-दिखाने की जरूरत उन्हें पड़ती है, जो हर रोज प्यार बदलते हैं।’

नेहा ने गुस्से में जवाब दिया, 'ये प्यार नहीं, अट्रैक्शन है, लस्ट है। मेरा पीछा छोड़ो, वरना ब्लॉक कर दूंगी।’

राज ने भी चिढ़कर जवाब दिया, ‘मेरे प्यार को लस्ट का नाम मत दो। अब तुम चाहो, तो मुझे बेझिझक ब्लॉक कर सकती हो। पर मेरा प्यार लस्ट स्टोरी नहीं है।’

राज के इस जवाब ने नेहा को शर्मिंदा कर दिया। उसने तुरंत अपनी गलती मानते हुए लिखा, 'सॉरी, मैंने गलत कह दिया। मैं सिर्फ यह कहना चाहती हूं कि अट्रैक्शन को प्यार समझ रहे हो तुम। मेरी फोटोज देखकर और कुछ कमेंट्स करके तुम मेरा दिल जीतना चाहते हो क्या?’

नेहा ने भी उस दिन राज की पूरी प्रोफाइल तलाशी। उसे वह स्ट्रेंजर ही दिखा। कोई डीपी नहीं। बस पोस्ट में सिर्फ शायरी नजर आयी।

राज ने एक बार फिर गुजारिश की, ‘बस एक बार मिल लो, फिर तुम फैसला कर लेना। मैं उसे अपनी तकदीर मान लूंगा। प्यार न सही, इंतजार तो मिलेगा मुझे।’

नेहा अब कुछ-कुछ पिघल चुकी थी। उसने जवाब में लिखा, ‘गजब हो यार। पूरी तरह से पीछे ही पड़ गए हो। समझ नहीं आता तुम्हें, तुम मेरा समय बर्बाद कर रहे हो। चलो, अपना नंबर दो। शाम को कॉल करूंगी, लेकिन एक बात याद रखना कि मैं फोन पर ज्यादा बात नहीं करती और न ही यह पसंद करूंगी कि कोई मुझे बेवजह कॉल करके परेशान करे।’

राज ने अपना नंबर भेजा। नेहा ने सोचा एक बार बात कर इस बंदे को निपटाऊं, वरना रोज-रोज परेशान करेगा। नेहा ने राज से बात की। काफी अच्छा लगा उसे बात करके। फिर बातों का सिलसिला चल पड़ा और मैसेज भी बढ़ते चले गए।

नेहा को कुछ दिनों के लिए ऑफिस के काम से देहरादून जाना था। वो राज का शहर था। नेहा ने राज को बताया था कि वह कुछ व्लॉग के लिए शूट करने आएगी।

राज ने कह दिया, ‘मैं आऊंगा मिलने।’

नेहा को राज से मिलते वक्त डर लग रहा था। क्या पता सेफ होगा कि नहीं इस तरह किसी अंजान से मिलना। लेकिन राज ने कहा कि मॉल में मिल तो सकते हैं, पर क्या दोनों वहां कंफर्टेबल होंगे? पहली मुलाकात की झिझक वैसे भी रहेगी, उस पर इतने लोगों के बीच।

फिर उन्होंने सहस्रधारा में मिलने का प्रोग्राम बनाया। नेहा उस सारी रात सोचती रही कि न जाने कैसा दिखता होगा राज? उसके मन में अब भी डर बना हुआ था।

सुबह नेहा ने राज को मैसेज किया कि हम मॉल में ही मिल लेते हैं, सहस्रधारा नहीं हो पाएगा।

राज ने बुझे मन से जवाब दिया, ‘कोई बात नहीं, जहां कहोगी मैं आऊंगा।’

इस बात से नेहा को लगा कि राज पर भरोसा किया जा सकता है। उसने तुरंत मैसेज किया, ‘चलो, बुरा मत मानो। सहस्रधारा में ही मिलते हैं।’

अगले दिन तय समय पर नेहा सहस्रधारा पहुंच चुकी थी। लगभग 11 बजे मिलना तय हुआ था। वहां बने एक छोटे से स्टॉल पर नेहा ने कुछ-कुछ खाने की चीजों का ऑर्डर दे रखा था ताकि जैसे ही राज आएगा, थोड़ी देर मिलने के बाद निकल जाएगी।

नेहा काफी देर तक इंतजार करती रही, राज नहीं आया। उसने सोचा फोन कर लेती हूं। नेहा ने कॉल पर कॉल किए, पर रिसीव नहीं हुआ। मैसेंजर पर लास्ट एक्टिव कब था, यह चेक किया। लास्ट एक्टिव सुबह का दिखा रहा था और एक अनरीड मैसेज भी पड़ा था। जो था, ‘मैं समय से पहुंच जाऊंगा और मैं आज बहुत खुश हूं, नेहा।’

नेहा ने मैसेंजर पर भी मैसेज किए। लगभग शाम होने तक वह सहस्रधारा में ही रही। फिर सोचा, राज अब नहीं आएगा। वह मन ही मन बड़बड़ाने लगी, ‘मजाक बनाकर रख दिया। खुद को मिलना था और मेरा समय बर्बाद कर दिया इस राज ने। अब करेगा फोन तो मैं भी नहीं उठाऊंगी।’

नेहा अपने होटल रूम में पहुंच गई। वह बहुत गुस्से में थी। तभी नेहा का फोन बजा। राज का नंबर था। उसने गुस्से में फोन उठाया और बिना राज की बात सुने कहा, “समझते क्या हो खुद को? मजाक बनाकर रखा है मेरा। महीनों से पीछे पड़े हो और आए तक नहीं। जानते हो न मुझे नहीं मिलना था तुमसे। तुम्हें मिलना था। आज के बाद मुझे कॉल मत करना समझे।” एक ही सांस में अपना गुस्सा निकालते चली गई नेहा।

तभी उधर से आवाज आई, “मिस नेहा। मैं पुलिस चौकी से इंस्पेक्टर अमित सिंह बोल रहा हूं। राज का फोन रिकवर होने में समय लगा। लास्ट कॉल उसमें यही शो हुआ तो आपको लगाया। बाकी नंबर शो नहीं हो रहे हैं। राज हॉस्पिटल में है। राजपुर रोड पर एक मेजर एक्सीडेंट हुआ है। प्लीज आप दून सिटी हॉस्पिटल पर आ जाएं।”

नेहा, यह सुनकर पागलों सी हॉस्पिटल की तरफ भागी। वहां पहुंचकर डॉक्टर और पुलिस ने उसका सारा सामान नेहा को पकड़ाया, जिसमें उसका फोन, गाड़ी की चाबी, कुछ पेपर्स, आईकार्ड (जिसमें वह बेहद हैंडसम दिख रहा था) और ऑर्किड फ्लॉवर का बुके था। फिर नेहा को उसकी डेड बॉडी को चेक करने के लिए कहा गया। उसकी बॉडी देख नेहा जैसे अधमरी-सी हो गई।

खूबसूरत था वह एहसास जब राज और नेहा को मिलना था। फरेबी था राज, जो अपनी जुबां का पक्का न निकला और फरेब कर बिना नेहा को मिले इस दुनिया को अलविदा कह गया।

- गीतांजलि

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