E-इश्क:नो थैंक्स, मैं आइसक्रीम प्रिफर करूंगी। फ्लेवर? लड़की ने जवाब दिया- 21 लव

4 महीने पहलेलेखक: दीप्ति मिश्रा
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आसमान में बादल छाए हुए थे। मंद-मंद हवा चल रही थी। अलार्म बंद कर बस पांच मिनट के लिए सोया था, लेकिन ये क्या! नींद पूरे डेढ़ घंटे बाद खुली। सुमित ने घड़ी पर नजर डाली, उसे करंट लगा। बाप रे, साढ़े आठ। वो बिस्तर से उछला। झट से तैयार हुआ और ऑफिस के लिए दौड़ा। कुछ ही मिनट में वह नोएडा सेक्टर-16 के मेट्रो स्टेशन पर खड़ा था। खुद पर झुंझलाते हुए बोला- शिट! 9:30 बजे वाली मेट्रो छूट गई, लेकिन तभी उसकी नजर प्लेटफॉर्म पर खड़ी गुलाबी टॉप पहने उस लड़की पर गई। ठंडी हवा का झोंका सुमित में ताजगी भर गया। अरे वाह, आज तो बला की खूबसूरत दिख रही है। सुमित को अब कोई जल्दी नहीं थी। प्लेटफॉर्म पर भीड़ भी नहीं थी। वो लड़की के पास जाकर खड़ा हो गया। लड़की शायद ऑफिस के कॉन्फ्रेंस कॉल पर थी। उधर से शायद किसी ने नंबर न होने का जिक्र किया, जिसके जवाब में लड़की ने कहा- ''मैं नंबर बोल रही हूं, आप लिख लीजिए और जल्दी पता करके मुझे इंफॉर्म कीजिए।'' कॉल वाले शख्स का तो पता नहीं, लेकिन सुमित ने बिना देर किए नंबर नोट कर लिया। नाम पता नहीं था, इसलिए 'गुड लक' के नाम से सेव कर लिया। मेट्रो आ गई। दोनों मेट्रो में चढ़े और थोड़ी ही देर में राजीव चौक पहुंचकर भीड़ में खो गए।

यह सिलसिला लंबे समय से जारी था। सुमित हर दिन दूर से ही लड़की को देखता। कई बार मन ही मन तारीफ भी कर देता। मेट्रो में साथ जाता और फिर भीड़ में खो जाता।

करीब रात के 11:30 बजे लड़की ने अपना व्हाट्सएप चेक किया। मैसेज देखा, आज गुलाबी टॉप में गॉर्जस लग रहीं थी..ये नंबर किसका है, डीपी भी नहीं है यह सोचते हुए रिप्लाई किया- थैंक्यू, लेकिन आप हैं कौन? जवाब आया- आपका मेट्रोमेट। लड़की- ओहह, मेट्रोमेट नाइस। इसके अलावा भी कोई नाम है आपका? जवाब आया- नाम है ना सुमित और आपका? लड़की ने लिखा- खुद ही पता कर लीजिए और ऑफलाइन हो गई।

अगले दिन प्लेटफार्म पर सुमित शांत खड़ा था, जबकि लड़की की आंखें भीड़ में किसी को तलाश रहीं थीं। मेट्रो में चढ़ने के बाद भी उसकी तलाश जारी रही और जैसे धीरे-धीरे यह सिलसिला बन गया। लड़की का भीड़ में रोज किसी को तलाशना। सुमित का चैट पर बताना कि आज उसने क्या पहना है और उसके हाथ में क्या है। एक रात सुमित ने पूछा- तुमने मेट्रोमेट को ढूंढने की कोशिश नहीं की? जवाब आया- नहीं!सुमित ने लिखा- ऐसा लग रहा है कि यह मीठा सा झूठ है। मैसेज पढ़कर लड़की ऑफलाइन हो गई।

संडे आया और चला गया। मंडे को सुमित ने मेट्रो स्टेशन पर लड़की को देखते ही पहली बार रात की बजाय सुबह मैसेज किया- तुम मुझसे मिलती क्यों नहीं? मैसेज देखते ही लड़की ने चारों तरफ निगाह घुमाई, लेकिन उसे कोई ऐसा चेहरा नजर नहीं आया, जो मेट्रोमैन की कल्पना से मेल खाता हो। लड़की के सब्र का बांध टूट गया। मेट्रो भी राजीव चौक पहुंच चुकी थी। पता नहीं क्या सोचकर उसने जवाब दे दिया, शाम को मिलते हैं। सुमित ने पूछा, कहां? लड़की ने रिप्लाई किया, यहीं। सुमित ने पूछा- पहचान लोगी? लड़की ने लिखा- नहीं, लेकिन तुम तो पहचान ही लोगे। ओके बोलकर दोनों ऑफलाइन हो गए।

शाम को सुमित राजीव चौक पहुंचा। उसने इधर-उधर नजर दौड़ाई, जो फूड कोर्ट के बाहर जाकर ठहर गई। लड़की फूड कोर्ट के बाहर खड़ी थी। सुमित ने दूर से ही लड़की के मूड का जायजा लेकर तसल्ली कर ली। फिर लड़की के पास पहुंचा। हैंड शेक करने के लिए हाथ बढ़ाते हुए कहा- हाई, मेट्रोमेट हियर। करीब छह फुट हाइट। वेल ड्रेसड। रंग सांवला, तीखे नैन नक्श। करीने से सेट दाढ़ी और प्यारी सी मुस्कुराहट उसकी पर्सनैलिटी में चार चांद लगा रही थी। लड़की ने ऊपर से नीचे तक देखा और कहा- तो आप हैं मेट्रोमेट! सुमित ने मुस्कुरा कर जवाब दिया- जी।

सुमित ने फूड कोर्ट में रखी कुर्सियों की ओर इशारा करते हुए कहा- आओ, बैठो। क्या पियोगी, चाय या कॉफी? लड़की ने जवाब दिया, 'नो थैंक्स, मैं आइसक्रीम प्रिफर करूंगी।' फ्लेवर? लड़की ने जवाब दिया- 21 लव। ओह अच्छा! वो मुस्कुराया।

सुमित ने आइसक्रीम लड़की की तरफ बढ़ाते हुए पूछा- आपका नाम? जवाब आया- प्रिया। उसके बाद दोनों आइसक्रीम खाते हुए बातों की जलेबी छानने में लग गए। करियर, शौक और शहर पर देर तक बातें होती रहीं। अचानक प्रिया ने पूछा- वैसे एक बात बताइए। आपको मेरा नाम नहीं पता था तो आपने मेरा नंबर किस नाम से सेव किया? सुमित ने फूड कोर्ट के कोने में जलते-बुझते बल्ब को देखते हुए धीरे से कहा- आपका नाम रखा था 'गुड लक की लालटेन'। प्रिया मुस्कुराई, उसके गाल सुर्ख हो गए।

तभी पीछे से आवाज आई, मम्मा, आप किधर हो? रोहन की आवाज सुनकर प्रिया ने हड़बड़ाकर डायरी बंद कर दी। गालों पर लुढ़क गए आंसुओं को भी जल्दी से पोंछ लिया। मम्मा, अरे आप यहां हो, मैं कब से ढूंढ रहा हूं। प्रिया ने कोई जवाब नहीं दिया। रोहन ने प्रिया के चेहरे को देखकर बड़ी ही मासूमियत से पूछा- मम्मा, पापा याद आ रहे हैं? रोओ मत, पापा भगवान जी के पास ही तो हैं, जल्दी आ जाएंगे। जब इस बार भी प्रिया कुछ नहीं बोली। रोहन ने अपने छोटे हाथों से प्रिया का चेहरा अपनी तरफ करते हुए कहा- प्रिटी प्रिया, तुम रोती हुई अच्छी नहीं लगती। मुस्कुराओ ना, पापा आपको कहते थे ना मम्मा, गुड लक की लालटेन।