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E-इश्क:सुबह तो ठीक गुजरती, मगर कभी-कभी शाम को मुझे कार में किमाम की खुशबू महसूस होती

एक महीने पहले
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मेरा ऑफिस फरीदाबाद में था और मैं गाजियाबाद में रहती थी इसलिए मुझे ऑफिस आने-जाने में बहुत परेशानी होती थी। फिर किसी ने बताया कि कार पूल सर्विस मेरा काम आसान कर सकती है। मैंने सर्च किया, तो मुझे एक कार पूल का नंबर मिला। मैंने कनेक्ट किया तो वो पहले दिन ही मेरे ऑफिस के बाहर मिला। मैंने उससे पैसे की बात की और हमारा सफर शुरू हुआ। उसका नाम सुकुमार मिश्रा था और वो बड़ा मस्तमौला था। राधे-राधे सॉन्ग पर झूमता ड्राइव करता वो किमाम का पान खाता था। मैंने उससे पूछा, “ये क्या खाते हो, बड़ी खुशबू आती है इसकी।” मुस्कुराकर उसने मुझे भी वो पान चखाया और कहा, “इसे किमाम कहते हैं, ये खुशबू किमाम की ही है।” खाकर मुझे वाकई बहुत मजा आया। कुछ समय बाद हम इतने घुलमिल गए कि एक दूसरे से सुख-दुख भी शेयर करने लगे। उसकी तरफ से प्रेम टपकता रहता, पर मैं विवाहित स्त्री का धर्म निभाते हुए रिश्ते की गरिमा बनाए रखती।

कुछ समय बाद ऐसी परिस्थितियां बनीं कि हमारे रास्ते बदल गए। कभी-कभार फोन पर इक्की-दुक्की बात होती। मुझे लग रहा था कि वो तेजी से मेरी तरफ बढ़ रहा है। फिर काफी समय तक उसका फोन नहीं आया। जब बहुत समय हो गया, तो एक दिन मैंने ही उसे फोन किया। मैं शायद उसे मिस करने लगी थी, लेकिन उसने मेरा फोन नहीं उठाया। अब उसको लेकर मेरे अंदर तेजी से नाराजगी भरने लगी। मेट्रो में ट्रैवल करते हुए मैंने एक दिन वही किमाम की तेज खुशबू महसूस की। मैंने चारों तरफ नजर दौड़ाई। मेरी आंखें उसे खोजने में लगी थी, पर वो मुझे कहीं नहीं दिखा।

किसी ने ओखला की तरफ जाते एक नए कार पूल का जिक्र किया। मैं उस नए कार पूल से जुड़ गई। सुबह तो ठीक गुजरती, मगर कभी-कभी शाम को मुझे कार में किमाम की खुशबू महसूस होती। एक-दो बार मैंने पूछा भी, तो सब मुझ पर हंस पड़े और कहा, “लगता है मैडम आपको पान का बहुत शौक है, खा लीजिए। ऐसे तरसना अच्छा नहीं।” मैं शर्माकर चुप हो जाती।

अब मुझे उस पर गुस्सा आने लगा था। मैंने गुस्सा उतारने के मूड में उसे फिर से फोन लगाया। इस बार एक महिला ने फोन उठाया। मैंने जब सुकुमार मिश्रा के बारे में पूछा, तो उसने कहा, “मैडम, आपको पता नहीं क्या? उनकी कार दुर्घटना में दो महीने पहले मौत हो गई। चेहरा पूरी तरह बिगड़ चुका था। उनकी जेब में रखी किमाम की डिबिया ही सिर्फ मुझे मिली।”

मुझे काटो तो खून नहीं, मैंने चुपचाप फोन बंद कर दिया। मुझे लगा जैसे हवा का एक महकता झोंका मेरे पास से गुजर गया।

- स्वाति सौरभ

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