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E-इश्क:'बदतमीज लड़की' जिसे सेल्फ रेसपेक्ट और प्यार में से एक चुनना था

3 दिन पहलेलेखक: राधा तिवारी
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ऐसा नहीं था कि पुनीत मुझे पसंद नहीं था, लेकिन जहां बात सेल्फ-रिस्पेक्ट की आ जाती है, तो फिर मैं किसी की भी नहीं सुनती, चाहे वह कोई भी हो। पुनीत और मैं एक म्यूचुअल फ्रेंड की पार्टी में मिले थे। प्रोफेशन से वह चार्टर्ड अकाउंटेंट था। मेरा और उसका घर एक ही रास्ते में था। पार्टी देर रात तक चली, इसलिए मेरी फ्रेंड ने कहा कि पुनीत तुम्हें घर तक छोड़ देगा। पुनीत और मैं सारे रास्ते अपने करियर और पसंद को लेकर बात करते रहे। फिर नंबर एक्सचेंज हुए और बातों का सिलसिला चल पड़ा।

एक दिन अचानक पुनीत का फोन आया। उसकी आवाज में नयापन और थोड़ी रूमानियत घुली थी। बोला, मैं बात घुमा-फिराकर करने का आदी नहीं, मैं तुम्हें पसंद करने लगा हूं। सिम्पल शब्दों में कहूं, तो मैं तुमसे शादी करना चाहता हूं, अगर तुम राजी हो तो ! मैं चौंकी और हंसकर जवाब दिया “ज़िन्दगीभर का फैसला है, एकदम से क्या जवाब दूं?” पुनीत का कहना था कि मैं कुछ दिन सोच कर जवाब दे सकती हूं।

हम दोनों में कुछ भी एक जैसा नहीं था। मुझे पिज्जा पसंद था और उसे लच्छा पराठा। मैं चॉकलेट केक देख कर फिसल जाती थी और वो रसमलाई के घूंट इंजॉय करता था। मुझे कड़क चाय पसंद थी और उसे ब्लैक कॉफी। हम दोनों के बीच कुछ भी ऐसा नहीं था जो हमें साथ-साथ चलने पर अपनी तरफ खींचता। कम बोलने वाले पुनीत और मुझ जैसी मुंहफट लड़की की जिंदगी की गाड़ी कैसे ट्रैक पर रहेगी, मैं सोचती रही। एक दिन पुनीत का कॉल आया कि शाम को मिलते हैं। मैंने बोला. “ठीक है, आ जाओ। मेरे ऑफिस के बाद मिलते हैं।”

हम यमुना एक्सप्रेस से कब आगरा पहुंच गए पता ही नहीं चला। रास्ते भर हम फ्यूचर बुनते रहे। ठंड के दिन थे, तेज बारिश और फ्यूचर के सितारे।

बाहर तेज बारिश हो रही थी। उसने गाड़ी रोकी और कहा कि मैं कुछ कहना चाहता हूं. उसकी आवाज भड़भड़ाई. मैं किसी मीठी मांग में उसे देखने लगी. “अगर तुम्हारी इजाजत हो तो… ” कहकर वो रुका। मैं कांप गई और आंखें नीचे करने के बावजूद मैं उसे देख, सुन और महसूस कर रही थी।

पुनीत ने मेरा हाथ अपने हाथ में लेकर कहा, “मेरे पेरेंट्स को मेरी पसंद मंजूर है। उनका कहना है कि उन्हें लड़की पसंद है, लेकिन वो अगर जॉब छोड़ सकती है तो।

मैंने अपने आप को संभाला, ताकि मेरे आंसू उसके आंसू में न मिल जाएं. मैंने पुनीत पर एक भरपूर नजर डालते हुए कहा, “घर चलें?”

सारे रास्ते हम दोनों के बीच खामोशी थी। ऐसा लगा बाहर की ठंड गाड़ी के अंदर आकर पसर गई है। उसने कई बार मेरा मन टटोलना चाहा। घर छोड़ते हुए उसने कहा, “तुमने मेरी बातों का जवाब नहीं दिया।” मैंने डबडबाई आंखों से कहा, “मैसेज करती हूं थोड़ी देर में।”

पुनीत मैं बदतमीज लड़की हूं। तुम्हें ही मुझसे प्यार हुआ, तुम्हीं मेरे आगे शर्त रख रहे हो। तुम्हारा प्यार शर्तों से बंधा है, पर मैं तुम्हारी शर्तों के आगे बंधने को तैयार नहीं। मैसेज सेंड करके मैंने सिम निकालकर तोड़ दिया।

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