E-इश्क:सिद्धार्थ की छिपी मोहब्बत का पता उसे तब लगा, जब उसके फोन पर रोजाना घरवालों से वीडियो कॉलिंग होती

6 महीने पहले
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”कितनी सुंदर जोड़ी लग रही है।” सुधा ने दोनों हाथों से बलाइयां लेते हुए कहा, “नजर न लग जाए मेरी।” “अरे जिज्जी, यह तो हमारे खानदान के लव बर्ड्स हैं।” “हां सच में रेखा!”

लेकिन शादी के कुछ साल बाद ऐसा कुछ हुआ कि ‘लव बर्ड्स’ कहे जाने वाले यह यंग कपल 'एंग्री बर्ड्स' बन गए थे।
रेखा-सुधा, एक फैमिली फंक्शन के दौरान रानी और सिद्धार्थ को देखकर यही कह रही थीं। सुधा की बेटी थी रानी और सिद्धार्थ उनका दामाद। दोनों की लव-मैरिज हुई थी और दोनों ही अलग-अलग बैकग्राउंड से आते थे। सिद्धार्थ ने अपने कूल नेचर से रानी के न सिर्फ घरवालों का बल्कि रिश्तेदारों का भी दिल जीत लिया था। लगता ही नहीं था कि वो सुधा का दामाद है, बल्कि सभी ने उसे अपने घर का बेटा मान लिया था।

सिद्धार्थ और रानी परिवार से दूर मेट्रो सिटी में रहते थे, क्योंकि दोनों ही वर्किंग थे। कम उम्र में दोनों की नौकरी लगी और कम उम्र में ही दोनों की शादी भी हो गई। रानी और सिद्धार्थ दोनों जहां जाते सभी की नजरों में रहते। कभी अपने बिहेवियर से तो कभी अपनी लाइफस्टाइल से।

सिद्धार्थ के ज़्यादातर अनमैरिड दोस्तों को रानी जैसी ही लड़की की तलाश थी। रानी थी भी ऐसी ही सबसे जल्दी दोस्ती करने वाली और सभी को अपने बिहेवियर से खुश करने वाली। इसलिए ऑफिस से लेकर घर और दोस्तों के घर में भी रानी की हमेशा चर्चाएं होतीं।

कोविड का दौर रानी के जीवन में तूफान लेकर आया और रानी के जीवन को तितर-बितर कर गया। सिद्धार्थ का उस दौरान वर्क फ्रॉम होम हुआ, तो वहीं रानी को रोज़ाना ही ऑफिस जाना पड़ता। कंपनी के काम के साथ-साथ सिद्धार्थ के लैपटॉप में दूसरी विंडो वॉट्सऐप चैटिंग की ओपन रहती। जिस पर वह सुबह से लेकर रात तक दिव्या से चैटिंग करता। रानी को ऑफिस से कुछ दिनों का ब्रेक मिला था, पर वह उनके रिश्ते में अब आए सूनेपन को भर नहीं पा रहा था। सिद्धार्थ ने जहां कंपनी के सारे टारगेट्स अचीव किए, तो साथ में पूरी शिद्दत के साथ कि उसने अपनी छिपी हुई मोहब्बत को भी एक मुकाम दिया। वो ऑफिस का स्टार था तो अपनी जिंदगी में खुश भी था।

रानी की ऑफिशियल परफॉर्मेंस लगातार बिगड़ रही थी। रिश्ते को संभालने, खुद को समेटने और काम को संभालने में वह बिखर रही थी। उसे सिद्धार्थ की इस छिपी हुई मोहब्बत का पता तब लगा, जब सिद्धार्थ के फोन पर रोजाना घरवालों से वीडियो कॉलिंग होती। सिद्धार्थ की स्क्रीन पर दिव्या के लगातार मैसेज के नोटिफिकेशन फ्लैश होने लगे। उस फ्लैश मैसेज को देखकर रानी ने कई बार इग्नोर किया और ख़ुद से कहा होगा कोई। ऐसे तो बहुतेरे दोस्त हालचाल पूछते रहते हैं। पर यह रोज़ का सीन बन चुका था। हमेशा ही घर पर वीडियो कॉलिंग करते समय दिव्या का कोई न कोई मैसेज नोटिफिकेशन मोबाइल स्क्रीन पर तैर जाता।

रानी ने कई बार सिद्धार्थ से इसके बारे में बात करनी चाही, पर वह हमेशा चुप्पी साध लेता और तुम्हें क्या मतलब कहकर बात को ही टाल देता। रानी समझ चुकी थी कि कुछ तो गलत चल रहा है, वरना सिद्धार्थ उसकी बातों को यूं इग्नोर नहीं करता। सिद्धार्थ इन दिनों रानी से काफी उखड़ा-उखड़ा रहता। उससे दिन भर तो दूर ऑफिस आने के बाद भी बात करना न के बराबर हो गया था। अब जब शाम को रानी घर पर आती तो सिद्धार्थ अपने दोस्तों के साथ बैठकी में बिजी रहता। अब बात-बात पर दोनों के बीच बहस बढ़ने लगी। रानी को यह बात हजम ही नहीं हो रही थी कि आखिर सिद्धार्थ उससे आंखें क्यों नहीं मिला पा रहा है।

रानी की आंखों से रोजाना ही नींद कोसों दूर थी। इस बीच वह लगातार हो रहे सिरदर्द से भी परेशान थी। डॉक्टर से पता चला कि रानी को डिप्रेशन है। दवाइयों के डोज लगातार बढ़ने लग गए। इस बीच उनकी एनिवर्सरी आई और आकर चली भी गई। सिद्धार्थ-रानी को विश करना भूल गया था। घरवालों के फोन आए पर सभी से रानी ने कह दिया था कि सिद्धार्थ को देर शाम बधाई देना, क्योंकि आज उसकी इंपॉर्टेंट मीटिंग है। खैर, सब रानी के मुताबिक ही हुआ। उसी रात उसने फैसला लिया कि वह सिद्धार्थ का आज फोन चेक करेगी।

वो ऐसा करना नहीं चाहती थी और जानती थी कि इसका अंजाम क्या हो सकता है। अगर सिद्धार्थ को पता चल गया तब भी और अगर उसे उसके फोन में कुछ मिल गया तब भी। पर उसके पास कोई ऑप्शन नहीं था। रानी के अंदर की पत्नी और लव बर्ड्स का एक पार्टनर जो दिख रहा था उसे सच नहीं मानना चाहता था।

खैर, दोनों का पासवर्ड सेम था तो रानी के लिए फोन चेक करना आसान था। सिद्धार्थ जब गहरी नींद सो चुका था, तब कांपते हाथों से रानी ने सिद्धार्थ का फोन उठाया। वह जानती थी कि उसे किस नाम से वॉट्सऐप पर सर्च हिस्ट्री तलाशनी है। सर्च करते ही, उसकी आंखें खुली की खुली रह गई।

मैसेज था, 'मैंने रानी से प्यार किया है। मैं रोज़ उसे मरते हुए नहीं देख सकता। वह कई रातों से सोई नहीं है। पर अब मैं तुम्हारी ओर खिंचा चला आ रहा हूं। मेरे लिए तुम दोस्ती की हद से आगे बढ़ती जा रही हो और रानी फिर से मेरी दोस्ती तक सिमटती जा रही है। मैं इस कन्वर्जन को चाहकर भी रोक नहीं पा रहा। तुम शायद मेरा यकीन न करो और अगर कर भी लो तो वैसा फील न करो, जैसा मैं तुम्हारे लिए करता हूं। अलविदा दिव्या, बस यहीं तक था, सफर हमारा।' इसके बाद सिद्धार्थ ने दिव्या को ब्लॉक कर दिया था।

इस मैसेज को पढ़ने के बाद रानी फ्रीज हो गई थी। उसे समझ नहीं आया कि कहां पर वह गलत हो गई थी। क्यों वह सिद्धार्थ की जिंदगी से फिसलती गई? और जब ऐसा हो रहा तो उसे इसकी खबर क्यों नहीं हुई या फिर उसकी जिंदगी में सिद्धार्थ क्यों अटक गया था? वह चाहकर भी उससे क्यों नहीं अलग हो पा रही थी।

रानी ने फैसला किया और दिव्या से मिलने पहुंची। दिव्या उससे मिलने के लिए रेडी नहीं थी, पर दोनों मिले और उसे अपनी जिंदगी का सबसे मुश्किल सवाल पूछना पड़ा- दिव्या, क्या तुम सिद्धार्थ के साथ रहना चाहती हो? दिव्या जवाब टाल गई और रानी को पता नहीं चला कि वह उम्मीद लेकर लेकर लौटी या गंवाकर। अब दिव्या ही नहीं बल्कि रानी और सिद्धार्थ तीनों की जिंदगी कटी पतंगों के मांझे जैसी उलझ गई थी। किसी का कोई सिरा खुला नहीं रह गया था।

रानी ने इंतजार किया और इस उलझन को सुलझने के लिए समय दिया, लेकिन हालात उसके लिए बिगड़ते गए। उसे नजर आ रही चीजों को मानने में छह महीने लगे लेकिन उसके बाद वह इस उलझन से दूर खाली आसमान में ऐसे निकल गई जैसे पतंग की डोर में कभी-कहीं कोई गांठ न पड़ी हो। मानो उसकी डोर कभी कटी ही न हो। केवल इसलिए ताकि लव बर्ड्स को लोग एंग्री बर्ड्स के तौर पर याद न रखें।

- गीतांजलि

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