अजनबी अपना बन गया:राह में मिला कुणाल कब कोमल की जिंदगी की जरूरत बन गया उसे पता ही नहीं चला

11 दिन पहले
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एक घंटे पहले से ही कंडक्टर जोर जोर से चिल्ला कर लोगों को बस में बैठने को बुला रहा था। दिल्ली जाने वाली बस रात 11 बजे की थी इसलिए कोमल अपनी बहन और जीजाजी के साथ बस में चढ़ गई। उसकी दीदी और जीजाजी तो साथ में बुक की गई अपनी सीटों पर बैठ बातों में मशगूल हो गए। वो अकेली बैठी थी। उसकी सीट थोड़ी दूर थी।

बस के चलने का इंतजार करते हुए कोमल ने तुरंत अपना मोबाइल फोन और हैडफोन्स निकाल कर गाने सुनने लगी। साथ ही इंस्टाग्राम पर दोस्तों को मैसेज करके बताने लगी कि वो बस में बैठ गई है।

कुछ देर ऑनलाइन बातें करने के बाद वो थक गई। उसने मोबाइल बंद कर लिया। वो इस फिराक में थी कि कब ये बस चले और वो सो जाए।

कुछ देर में बस चली और वह सो गई। थोड़ी देर में किसी फिल्म की आवाज सुन कर उसकी नींद खुली तो उसने देखा कि उसके साथ की सीट पर एक लड़का बैठा था और बिना हैडफोन्स के कोई फिल्म देख रहा था। उसने कुछ पल शांत रहने का सोचा, लेकिन कुछ देर में बोल पड़ी, "एक्सक्यूज मी! आप थोड़ा आवाज कम कर लेंगे?”

लड़का बोला, “ओह सॉरी! अभी कम कर देता हूं, आपकी नींद खराब कर दी शायद…”

इस पर कोमल ने कहा, “थैंक यू! नहीं, मैं तो यूं ही सोने की कोशिश कर रही थी।

ये कह कर वो आंखें बंद करके सीट पर टेक लगा कर लेट गई। कुछ देर में आवाज आयी, "वैसे मेरा नाम कुणाल है और आपका? "

“जी मैं कोमल, आप भी दिल्ली तक ही जा रहे हैं?” कोमल ने पूछा

कुणाल ने ‘हां’ में सिर हिलाया और कहा “चलो ये अच्छा है कि अब आपका साथ भी मिल गया तो रास्ता आसानी से कट जाएगा। वैसे आपको नींद तो नहीं आ रही न?”

यह सुन कर कोमल को लगा कहीं उसने ज्यादा बात तो नहीं कर ली एक अंजान लड़के से इसलिए उसने जवाब नहीं दिया। कुछ देर बाद जब बोर हो गई तो बोली, "जी, सही कहा आपने।"

कुछ देर यूं ही हिचकिचाहट में दोनों की बातें चलती रहीं और देखते ही देखते बस अलवर पहुंच गई। कंडक्टर ने कहा बस यहां कुछ देर रुकेगी, किसी को बाहर जाना हो तो हो आए। कोमल ने दीदी और जीजाजी की तरफ देखा और पाया कि दोनों सो गए थे। उन्हें बस के रुकने का भी पता नहीं चला। कोमल को प्यास लगी तो नीचे गई और झट से दुकान से पानी की बोतल ले कर पीने लगी। बस चलने में अभी कुछ देर बाकी थी।

कुछ देर बाद जब बस चलने को थी तो कुणाल ने उसे आवाज दी, “जल्दी आ जाओ मैडम, वरना यहीं रह जाओगी”। उसने पानी के रुपए देने के लिए जेब में हाथ डाला तो याद आया कि सारे पैसे तो दीदी के पास थे। फिर भी अपनी जेब और पर्स में बार बार यहां वहां देखने लगी। दुकान वाला समझ गया कि उसके पास पैसे नहीं हैं शायद। वह घबरा गई। इतने में पीछे से एक आवाज आई, “यह लो भैया इनके पैसे।”

कोमल शर्मिंदा हो गई और बोली, “मैं बस में जा कर देती हूं।” यह कह कर वो बस में बैठ गई, पर उसे याद आया कि अगर दीदी को पता चला कि वो बस से उतरी थी तो उसे कुणाल के सामने ही डांट पड़ जाएगी। इसलिए उसने चुप रहना सही समझा।

अब वह सोच रही थी कि कुणाल अच्छा लड़का है, उससे दोस्ती करने में कोई बुराई नहीं है। बस चल पड़ी और कुणाल भी आ कर सीट पर बैठ गया। कोमल ने कुणाल को थैंक्स कहा और बैठ गई। थोड़ी देर की चुप्पी के बाद कोमल बोली, “कुणाल, आप मुझे अपना नंबर दे दीजिए मैं घर जा कर आपको रुपए भेज दूंगी।”

इस पर कुणाल बोला, “अरे! पैसे की कोई बात नहीं है, पर आप नंबर लिख लीजिए और अपने पहुंचने की खबर दे दीजिएगा।” कोमल ने झट से ‘हां’ में सिर हिला दिया। थोड़ी देर में उसने अपने हेडफोन्स कानों में खोंचे और गाना सुनते सुनते कब नींद आ गई उसे पता नहीं लगा। जैसे ही उसकी आंख खुली तो उसने देखा कि वह कुणाल के कंधे का सहारा लेकर बेसुध सोई हुई थी। उसने झट से अपने बाल ठीक किए और झेंप मिटाते हुए ‘सॉरी’ कहा।

इस पर कुणाल ने मुस्कुराते हुए कहा, “कोई नहीं, लेटे रहिए, अभी दिल्ली बहुत दूर है। और सॉरी जैसी कोई बात नहीं। मैंने तो आपको इसलिए नहीं उठाया, क्योंकि आप बड़े प्यार से सो रही थीं।”

कोमल मन में खुद को बहुत कोस रही थी कि मैं भी कैसी पागल हूं, पहले इससे रुपए ले लिए, फिर उसी के कंधे पर सो गई। आखिर वह क्या सोच रहा होगा कि कितनी बेशर्म लड़की है। वो यह सब सोच ही रही थी कि कुणाल ने कहा, “कहां खो गई मैडम, जरा हमसे भी बात कर लो।”

इस पर कोमल मुस्कुरा दी और बोली, “इतनी भी क्या जल्दी है, अब तो फोन पर बातें होती रहेंगी, है न?”

“पर मुझे तो बस वाली लड़की ज्यादा पसंद है” कुणाल ने उसे छेड़ते हुए कहा।

“अच्छा, ऐसा है क्या!”कोमल उसकी शरारत अच्छी तरह समझ रही थी।

“अब तो ऐसा ही है…” और दोनों खिलखिला कर हंस पड़े। बातों बातों में कब सुबह हो गई उन्हें पता ही नहीं चला।

दिल्ली आ गया था। अब दोनो को बस से उतरना था।

कोमल ने कुणाल को ‘बाय’ कहा और जाने लगी। इस पर कुणाल ने लोगों से नजरें बचा कर उसका हाथ पकड़ कर दोबारा सीट पर बैठा दिया और बोला, “कोमल, मैं बहुत लोगों से मिला हूं, पर किसी का भी स्वभाव खुद से मिलता हुआ नहीं पाया, तुम से बातें करके ऐसा लगा कि तुम शायद मेरा ही एक हिस्सा हो। अगर तुम्हें भी ऐसा ही कुछ लगा हो तो मुझे घर जा कर मैसेज करना, मैं इंतजार करूंगा।”

कुछ दिन बाद कुणाल के पास एक अनजान नंबर से मैसेज आया, लिखा था, ‘हां, मुझे भी लगता है कि हम दोनों एक ही रूह के दो हिस्से हैं… तुम्हारी कोमल।’

- हेमा काण्डपाल

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