तुमसे शादी नहीं करनी:शादी से पहले प्रेग्नेंट होने पर श्रुति ने जो सहा उसके बाद वह प्रदीप को जीवनसाथी नहीं बनाना चाहती

5 महीने पहले
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मम्मी का कॉल आया था I “क्या श्रुति अभी तक घर नहीं पहुंची हो, कल बताया था ना कि लड़के वाले देखने आ रहें है? अब जल्दी आओ,” मां ने झुंझलाते हुए फोन काट दियाl

‘उफ्फ! ये मम्मी भी ना, शादी की जिद नहीं छोड़तीl कितनी बार समझा चुकी हूं कि शादी नहीं करनी,’ श्रुति ड्राइविंग करते हुए सोच रही थीl अतीत की कड़वी यादों के कारण लड़कों पर से उसका विश्वास उठ चुका था, पर मम्मी सब कुछ जानते हुए भी शादी की जिद पर अड़ी थीl ऑफिस से घर के रास्ते में ड्राइविंग करते हुए वो पुरानी यादों में खो गयीl

कॉलेज के सुहाने दिनों में प्रदीप उसका सीनियर था l दोनों हर प्रतियोगिता में आगे रहते इसलिए दोस्ती कब प्यार में बदल गयी पता ही नहीं चला꠰ कभी गार्डन, कभी लाइब्रेरी तो कभी लॉन्ग ड्राइव… जीवन का हर पल उसके साथ अच्छा लगता l उसके मम्मी-पापा जब दो दिनों के लिए दादी के बीमार होने पर भोपाल गए, तो घर पर उन दोनों के उफनते प्यार ने सारी सीमाएं तोड़ दीं l दोनों के लिए अब एक दूसरे के बिना एक दिन भी रह पाना मुश्किल हो गया थाl

प्रदीप का फाइनल ईयर था꠰ वो हॉस्टल में रहकर पढ़ता था, इसलिए परीक्षा खत्म होने के बाद जल्दी ही मिलने का वादा करके वो अपने घर चला गयाl

प्रदीप का प्लेसमेंट होते ही दोनों शादी करना चाहते थे। रोज फोन पर बातें हो जातीं, पर इंतजार का एक-एक दिन एक साल के बराबर लग रहा थाl

फिर एक दिन श्रुति पर पहाड़ सा टूट पड़ा, जब उसे पता चला कि वह प्रेग्नेंट हैl उसे समझ नहीं आ रहा था कि अब क्या करेl उसके रातों की नींद उड़ चुकी थीl हालांकि उसे यकीन था कि प्रदीप जल्दी ही शादी के लिए दोनों परिवारों को मनाकर कुछ न कुछ रास्ता निकाल लेगाl

सुबह मम्मी-पापा के ऑफिस जाते ही श्रुति ने तुरंत प्रदीप को फोन लगायाl प्रेग्नेंसी की बात सुनते ही उसकी आवाज ठंडी पड़ गयीl प्रदीप ने कांपती आवाज में श्रुति से कहा, “कल बाजार जाकर अबॉर्शन की पिल्स ले आना l मेरा आना अभी नहीं हो पाएगा l एग्जाम सिर पर है और मैं अभी शादी के पचड़े में नहीं पड़ना चाहताl”

प्रदीप का जवाब सुनकर उसके पांव के नीचे से जमीन खिसक गईl इस सिचुएशन को अकेले कैसे संभालेगी, यह सोच सोचकर उसका बुरा हाल थाl

अब प्रदीप उससे बात करने से बचने लगा था l श्रुति ने कई दिनों तक उससे बात करने की कोशिश की, लेकिन प्रदीप ने उसका फोन उठाना बंद कर दियाl

हारकर बदनामी के डर से श्रुति ने अबॉर्शन पिल्स लेने का निर्णय लिया l पिल्स लेने के बाद जब होश आया तो वह हॉस्पिटल में थी और मम्मी-पापा उसके पास खड़े थेl

मम्मी ने रोते हुए बताया कि बहुत ज्यादा ब्लीडिंग के कारण वह तीन दिन बेहोश थी, बड़ी मुश्किल से जान बची है श्रुति कीl

श्रुति बुरी तरह टूट चुकी थी l उसे ऐसा महसूस हो रहा था जैसे अब वह किसी को मुंह दिखाने के काबिल नहीं रही l मम्मी ने श्रुति से उस लड़के के बारे में जानने की बहुत कोशिश की, जिसकी वजह से उसकी ये हालत थी, पर उसने खामोशी ओढ़ ली l पापा तो उससे बात करना ही छोड़ चुके थे l जिंदा लाश जैसी हो गयी थी श्रुतिl

कॉलेज, दोस्त, पढ़ाई सब छूट चुके थे l पापा ने उसे मौसी के घर दिल्ली भेज दिया l मौसी के प्यार भरे व्यवहार से धीरे-धीरे जीवन पटरी पर आने लगा l समय के साथ शरीर के घाव तो भर गए, पर मन के घाव अभी भी हरे थे l वहां रहकर श्रुति ने कॉम्पटीशन की तैयारी में जी जान लगा दी और पहले ही प्रयास में सिविल सेवा में सिलेक्ट हो गयी l साथ ही उसे अपने ही शहर में पोस्टिंग मिल गयी l मम्मी-पापा बहुत खुश हुए l मां-बाप का खोया प्यार पाने के बाद अब कुछ नहीं चाहिए था श्रुति को l शादी के नाम से उसे नफरत हो चुकी थी l अतीत की यादों में खोई श्रुति को पता ही नहीं चला कि कब घर आ गयाl

कैसे इस झमेले से निकलूं,गाड़ी पार्क करते हुए वह सोचने लगी। घर के अंदर घुसते ही वह सन्न रह गयी l सामने सोफे पर प्रदीप अपने मम्मी-पापा के साथ बैठा चाय पी रहा थाl

“बेटा, ये प्रदीप है, रेवेन्यु बोर्ड में ऑफिसर है,” मां ने श्रुति को चाय पकड़ाते हुए कहाl प्रदीप नजरें नीचे किये बैठा थाl

चाय पीने के बाद मम्मी बोली, “बेटा, प्रदीप को अपना घर दिखा लाओ l” वो चुपचाप उसके आगे-आगे छत की ओर बढ़ गयीl

“देखो श्रुति, मैं अपनी गलतियों का पश्चाताप करना चाहता हूं l प्लीज, मुझे माफ कर दो और इस रिश्ते के लिए ‘हां’ कह दो l बहुत देर से जान पाया कि मैं सिर्फ तुम्हीं से प्यार करता हूं l करियर के नशे ने मेरा दिमाग खराब कर दिया थाl वो बात भी सिर्फ हम दोनों के बीच रह जाएगी l न तुम उस बारे में कुछ बताना और न मैं, तुम्हें हमारे प्यार का वास्ता, मैं जानता हूं, तुम अभी भी मुझसे प्यार करती हो” प्रदीप याचना भरे स्वर में बोलाl

मौके बार-बार नहीं दिए जाते प्रदीप, मेरे तन-मन ने कितना कुछ सहा है उसका अंदाजा नहीं है तुम्हें l कितना बिखरी थी मैं उस समय l तुमने साथ देना तो दूर, बात भी करना छोड़ दिया l ऐसा आदमी क्या जिंदगीभर साथ निभाएगा l मेरे ‘ना’ करने का कारण तुम्हारे घर वालों को भी पता चलने दो, ताकि मां-बाप की नजरों में गिरना क्या होता है, तुम भी जान सकोl”

पूरी दृढ़ता से अतीत की पूरी दास्तान सभी से कहने के लिए श्रुति नीचे की ओर चल पड़ीl

- अंशु वर्मा

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