प्यार का पर्दाफाश:प्रिंसिपल की डायरी पढ़कर वह हैरान थी, उसमें चांदनी के लिए जो बातें लिखीं थी वो हैरान करने वाली थी

3 महीने पहले
  • कॉपी लिंक

रंग भरे बादल से, तेरे नैनों के काजल से, मैंने इस दिल पर लिख दिया तेरा नाम… चांदनी ओ मेरी चांदनी

उसने दोनों कानों को तकिए से दबाया और स्लिपर उठाकर नगीना के ऊपर दे मारी।

"3660 बार बोला है मुझे चिढ़ है इस गाने से, नफरत है अपने नाम से, समझ नहीं आता?" चांदनी पूरी ताकत से चिल्लाई।

"तो मैं क्या करूं, बाकी गाने तो और भी पुराने हैं। मैं तेरा चांद तू मेरी चांदनी, चांदनी चांद से होती है सितारों से नहीं, प्यार एक से होता है हजारों से नहीं, चांदनी रात में एक बार तुम्हें देखा है…" नगीना गाना पूरा कर पाती उससे पहले ही उसकी चोटी खींचकर उसे बेड पर पटककर चांदनी बाकायदा उस पर सवार हो चुकी थी।

"देख, मेरी जान लेने से तुझे जेल ही होगी। यह रौद्र रूप नानी और अपनी अम्मा को दिखाना था न। दोनों श्रीदेवी की इतनी बड़की फैन थीं, जुड़वां बच्चियों के नाम ही चांदनी और नगीना रख दिये। तू यह सोच न, पूरे स्कूल टाइम में मुझे ‘मैं नागिन तू सपेरा’ गाकर चिढ़ाया जाता था। नगीना तो कोई बोलता भी नहीं, सब नागिन कहते हैं दोस्त लोग। मैं तो बुरा नहीं मानती।"

"हां, तो मेरा रख देते नगीना। कौन सा मोतियाबिंद उतर आया था दोनों की आंखों में या रतौंधी हो गई थी, जो मैं दिखी नहीं। काली नागिन तो फेमस हैं न। काली चांदनी देखी कभी? अमावस्या को पूर्णिमा कौन कहता है?" दुख और गुस्से से चांदनी की आंखें डबडबा आईं।

"यार फिर वही पुराना रिकॉर्ड लेकर मत बैठ जा। मैं तो कहती हूं, अब रिकॉर्ड तोड़ ही दे। हम लोग अपना नाम सीता और गीता रख लेते हैं या चालबाज और हवा-हवाई। क्या कहती है? दिवंगत आत्माओं की शांति में ज्यादा खलल भी नहीं पड़ेगा। बीइंग लॉयल श्रीदेवी फैंस।" अपनी मां और नानी को याद करके नगीना भी थोड़ी उदास हो गई, पर आदत के मुताबिक वह ज्यादा देर सीरियस रह ही नहीं सकती थी।

“क्या प्रॉब्लम है यार, इतनी अच्छी हाइट है, मोतियों से चमकते दांत हैं, इतने सुंदर लंबे काले घने बाल हैं। बड़ी-बड़ी आंखें, उस पर ये लंबी पलकें…”

“कुछ मैटर नहीं करता, जब चमड़ी का रंग काला हो। सांवली-सलोनी लड़कियां लड़कों को बस सोशल मीडिया की पोस्ट्स में खुद को प्रोग्रेसिव बताने और कवियों-शायरों को बकैती लिखने में ही पसंद आती हैं बस।"

"हद्द है यार, लड़कों के बाहर भी जीवन की संभावनाएं हैं, यह वैज्ञानिकों ने नई रिसर्च में पता किया है। आज क्यों मिर्चें चबाए बैठी है? केयर टू एक्सप्लेन?" नगीना अब कुछ परेशान हो गई थी।

"आज तक किसी गोरे लड़के के लिए मेरा रिश्ता आया है? नहीं न? कल एक रिश्ते के लिए भैया एसयूवी देने तैयार थे, लेकिन उसके बाप का कहना था कि लड़का हमारा इतनी पक्की रंगत का है, ऊपर से लड़की भी ऐसी ही ले ली, तो इनके बच्चों की शादी तो फॉर्च्यूनर में भी नहीं होगी। एरोप्लेन से कम में तो बात ही नहीं बनेगी।

दूसरी वाली लड़की के लिए तैयार हैं हम। भैया ने बताया तेरी इंगेजमेंट हो चुकी है तो उन्होंने रिश्ता करने से इनकार कर दिया।" चांदनी बोलते हुए वॉशरूम में घुस गई। इस समय अपनी बहन की आंखों में दयाभाव वह बिल्कुल बर्दाश्त नहीं कर सकती थी।

"ओह नो! आज भी लेट हो जाएंगे और वह किम जोंग हमें कच्चा चबा जाएगा।" नगीना एकदम से उछलकर खड़ी हो गई।

"ओह शिट! आज सच में लेट हो जाएंगे।" चांदनी भी फटाफट कबर्ड से ड्रेस निकालने लगी।

भागा-दौड़ी करके दोनों जैसे-तैसे स्कूल पहुंचे, पर बीस मिनट लेट हो चुके थे और जानते थे कि अब क्लास उनकी लगनी है। पोस्ट ग्रेजुएशन हो जाने के बाद दोनों पास के ही स्कूल में साइंस और मैथ्स टीचर के तौर पर जॉब कर रही थीं।

अबिरल नायपाल उनका प्रिंसिपल था। उसके दादा-दादी नेपाल से भारत आकर बस गए थे। उसकी पैदाइश भारत की थी। उसके पास भारतीय नागरिकता थी फिर भी अपने छोटे कद, गोलमोल चेहरे की वजह से बचपन से ही बुलिंग झेलता आया था। चौकीदार बहादुर, ऊ शाबजी से लेकर न जाने क्या-क्या।

यह स्कूल उसके पिता का था इसीलिए इतनी कम उम्र में ही अब वह प्रिंसिपल था। लोगों के खराब रवैये के चलते वह भी थोड़ा खुरदुरा हो गया था। अपने काम से काम रखता, अनुशासन का सख्ती से पालन कराता। उद्दंडता, नियम तोड़ना, समय की पाबंदी न करना, उसकी बर्दाश्त के बाहर था। इसीलिए उसे टीचिंग स्टाफ किम जोंग बुलाता था, जिसमें ये दोनों बहनें सबसे आगे थीं।

“आज तो पक्का डांट पड़ेगी। डिटेंशन अलग,” नगीना बड़बड़ाई।

"ऊपर से डाक का सारा काम और रिकॉर्ड भी हमसे ही मेंटेन कराएगा किम जोंग आज तो।" चांदनी ने सामने से आते अबिरल के हाथों में फाइल का गट्ठर देखा।

तभी साइड से निकली टाइल से ठोकर लगकर वह लड़खड़ाया और सारी फाइल्स बिखर गईं।

बिना शर्मिंदा हुए वह उठ खड़ा हुआ।

"मूर्तियां क्यों बनी हुई हैं आप लोग? पहला पीरियड तो आपकी मेहरबानी से आधा खत्म हो चुका। शुरुआती आपको दिया ही इसलिए था कि आप सबसे नजदीक रहती हैं। लगता है अब लंच ब्रेक के बाद ही करना सही रहेगा टाइम आपका।" अबिरल ने कठोरता से कहा।

"नहीं सर… आई मीन सॉरी सर… ये लास्ट टाइम लेट हुए हैं। अगर अगली बार भी हों तो आप बेशक बिन कहे चेंज कर दीजिएगा टाइमिंग।”

"यस सर वी आर रियली वेरी सॉरी। कल हमारी मॉम की डेथ एनिवर्सरी थी तो हम लोग थोड़ा…” नगीना ने कहा और चांदनी का हाथ पकड़कर धीमे से दबा दिया।

"ओह! सो सॉरी। यू मे गो नाऊ।" अबिरल एकदम से नर्म पड़ गया।

"सर आप केबिन में जाइए, ये सब फाइल्स हम लोग लेकर आ रहे हैं।” चांदनी जमीन पर बिखरे ढेर को देखकर बोली।

"नो इट्स ओके। आई विल मैनेज।"

"प्लीज सर!”

"ओके, थैंक्यू।" वह मुस्कुराकर केबिन की तरफ बढ़ गया।

"क्या यार, ये दूसरी बार है। तूने इमोशनल ब्लैकमेल किया किम जोंग को। शर्म नहीं आती?" चांदनी चिढ़ी हुई थी।

"तो तेरे पास बेटर बहाना था? तेरा दुखड़ा सुनने में ही लेट हुए न? वैसे भी उसे कौन सा याद रहने वाला है, सात महीने पुरानी बात थी वह।" नगीना ने मुंह बनाया।

"अरे यह क्या?" चांदनी ने फाइल्स के ढेर के बीच एक डायरी देखी और नजर बचाकर पर्स में डाल ली। जब वह केबिन में पहुंची, वह खाली था। चपरासी ने बताया प्रिंसिपल किसी जरूरी काम से गए हैं, कल लौटेंगे।

"वाह, कल उनसे पहले आकर डायरी इसी फाइल के ढेर के बीच रख दूंगी।" दूसरों की निजी जिंदगी में तांका-झांकी की उत्सुकता, सहज मानवीय प्रवृत्ति है। बिग बॉस जैसे शो इसी का उदाहरण है।

घर जाते ही उसने सबसे पहले दरवाजा लॉक किया और डायरी उलटने-पलटने लगी। जनवरी से रोजमर्रा का लेखा-जोखा था।

पर उसका ध्यान खींचा फरवरी की दूसरी तारीख के नोट्स ने।

02/02/2022

आज ट्विन सिस्टर्स जॉब के लिए आईं। दोनों इतनी क्वालिफाइड हैं, बहुत अच्छी बात है स्कूल के लिए।

लेकिन वह लंबी वाली तो गजब है। उसकी आंखों में सम्मोहिनी शक्ति है। हे ईश्वर! लाज रख लेना मेरी। कहीं इज्जत और शराफत का जुलूस न निकल जाए। कैसे उसे देखने से अपनी आंखों को रोकूंगा।

यह पढ़कर चांदनी एकदम चौंक गई। वह तो सोचती थी, प्रिंसिपल उसे एकदम नापसंद करता है। अब तो उसकी उत्सुकता चरम पर पहुंच गई थी। जल्दी-जल्दी उसने कई पेज पढ़ डाले।

23/03/2022

"काश! वह 6 इंच कम होती या मैं 6 इंच ज्यादा, मामला बराबरी का होता। हे ईश्वर! क्या जोड़ियां सचमुच स्वर्ग में बनती हैं? फिर तो तुम बड़े रेसिस्ट निकले, एक ही जाति, एक ही धर्म में क्यों बनती हैं तुम्हारी जोड़ियां। हम हम जैसे लोग कहां जाएं? क्यों भावनाएं दी हैं हमें? सीधे-सीधे नाम देकर भेजा करो न किसे बनाया है हमारे लिए?

अगर हमारे बच्चे होंगे तो लड़की का नाम डायरेक्ट श्रीदेवी ही रख देंगे। लड़के का सोचेंगे बाद में। हे ईश्वर! कोई तो चमत्कार कर दो। उसके मन में मेरे लिए प्रेम न सही, सॉफ्ट कॉर्नर ही डाल दो, प्यार तो हो ही जाएगा फिर।"

चांदनी को एकदम हंसी आ गई।

24/04/22

आज वह बहुत दुखी थी। असल बात तो यह है कि काले रंग के प्रति तिरस्कार और गोरे रंग की गुलामी पूरे भारतीय उपमहाद्वीप के डीएनए में है। भारत पाकिस्तान बांग्लादेश श्रीलंका। फेयरनेस क्रीम्स ऐसे ही नहीं करोड़ों अरबों कमा रहीं 7 दिन में गोरा बनाकर जिंदगीभर का ग्राहक बना लेती हैं। हम काले रंग के प्रति इतने असहज हैं कि उसे सांवला कह देंगे, गहरा, पक्का रंग कह देंगे, यहां तक कि ब्लैक लोग जो गर्व से खुद को ब्लैक कहते हैं उनको हम अश्वेत कहते हैं।

क्या होता है अश्वेत? श्वेत नहीं है तो कुछ भी हो सकता है पर काला नहीं। भगवान कृष्ण के रोल में किसी काले एक्टर को लेने या काला रंग दिखाने का साहस नहीं हुआ किसी का, जबकि कृष्ण का मतलब ही काला है। काश! मैं उसकी उदासी दूर कर सकता। काश! मैं उसे बता पाता, वह संसार की सबसे सुंदर लड़की है, उसकी एक झलक देखने को मैं दिन भर बेचैन रहता हूं।"

28/ 07/ 2022

सब लोग मुझे किम जोंग उन कहते हैं। हिटलर भी कह सकते थे। लेकिन मेरा कद और फीचर्स देखते हुए यह नाम दिया गया है और अफसोस! चांदनी ने दिया है। हम लोग केवल अपने प्रति आत्म-दया से भरे होते हैं, दूसरों के प्रति उतने ही क्रूर और असंवेदनशील होते हैं। जब कोई उसके रंग पर तंज कसता है, उसे बुरा लगता है, जब वह खुद यही कर रही, तब उसे मजाक लगता है। सब एक जैसे हैं। मुझे अपनी भावनाओं पर नियंत्रण रखना होगा। थोड़ा और सख्त होना होगा। मुझे ऐसे सपने देखने ही नहीं चाहिए थे। आज के बाद उसका जिक्र नहीं होगा कहीं।

अब चांदनी एकदम सकते की हालत में थी। अपने मन की बदसूरती से शायद पहली बार सामना हुआ था। वह तो इसीलिये भगवान को कोसती थी कि उसका रंग-रूप उसके हाथ में नहीं फिर क्यों उसे यह सब सहना पड़ता है। और ठीक यही चीज वह अबिरल के साथ कर रही थी। उसकी काबिलियत, शानदार पर्सनेलिटी और सारे गुणों छोड़कर उसकी हाइट और नैन-नक्श पर मजाक, जो उसके मन को बुरी तरह आहत कर गया था।

काफी देर तक रो लेने के बाद उसके मन का मैल साफ हो चुका था। अब उसने सोच लिया था कि अबिरल के मन को भी अपनी तरफ से साफ करके ही रहेगी। फिर वह उसे अपनाए या न अपनाए, उसकी मर्जी। कोशिश सच्चे दिल से करेगी।

इस डायरी का मिलना ईश्वर का ही सिग्नल था, सच्चे पवित्र मन से मांगी गई एक प्रार्थना सुन ली गई थी।

- नाज़िया खान

E-इश्क के लिए अपनी कहानी इस आईडी पर भेजें: db.women@dbcorp.in

सब्जेक्ट लाइन में E-इश्क लिखना न भूलें

कृपया अप्रकाशित रचनाएं ही भेजें