हमारी बंजर जमीन पर “गुलाब” खिलने वाला है:शिवांगी बिना कुछ बोले मुस्कराकर लैब की ओर गई, रितेश ने ठान लिया था कि वह आज पूछ कर ही रहेगा...

6 महीने पहले
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उसके चेहरे पर मुस्कान देखकर मेरी आंखें खुली की खुली रह गईं। मैं और दीपेश कालेज के ग्राउंड में हल्की धूप का लुत्फ उठा रहे थे। तभी सामने लंबे बालों की चोटी लहराते हुए एक हाथ से किताब पकड़े और दूसरे हाथ से दुपट्टा संभालते हुए चली आ रही थी। माथे पर बिंदी और पिंक स्वेटर तो गजब लग रहा था, मैं कुछ कह पाता कि उससे पहले ही दीपेश बोल पड़ा अरे शिवांगी तुम भी यहां, तुम्हारा भी आज …, वो बिना कुछ बोले मुस्कराकर लैब की ओर दौड़ती हुई चली गई। हम दोनों शिवांगी के साथ पिछले कॉलेज में एक साथ बीएससी कर रहे थे, आज हमारा कैमिस्ट्री का प्रैक्टिकल था। मैं शिवांगी को पिछले कॉलेज से मन ही मन प्यार करने लगा था, दीपेश ने मुझसे कई बार प्रपोज करने को कहा, लेकिन चंचल और खुले विचारों की होने की वजह से कभी उसे प्रपोज करने की हिम्मत नहीं हुई, पता नहीं कब क्या सोचने लगे। लेकिन दीपेश अक्सर यही कहता कि तुम्हारी किसी बात को वो न तो इनकार करती है और न ही हां। हर बात मुस्कराकर टाल देती है, इससे ऐसा लगता है कि वह भी तुमसे प्यार करने लगी है। आज रितेश ने ठान लिया था कि जैसे ही शिवांगी लैब से बाहर आएगी, वो उससे पूछ कर ही रहेगा कि वो उसकी हर बात मुस्कराहट में ही क्यों बदल देती है, आखिर उसके मन में चल क्या रहा है। मेरी नजर उसकी लैब की ओर से हटाए नहीं हट रही थी, शिवांगी से सवाल पूछने के लिए मन ही मन तैयारी करने में जुटा गया। करीब दो घंटे बाद जब वो लैब से बाहर निकली। मेरी धड़कनें तेज हो गईं। मैं कुछ कह पाता कि इससे पहले ही दीपेश बोल पड़ा देख तेरी महबूबा आ रही है।

“शिवांगी कैसा रहा तुम्हारा…”. “बहुत अच्छा यार चेहरे पर मुकुराहट लेकर उसने कहा” “बैठ जाओ मैडम रितेश बहुत देर से तुम्हारा इंतजार कर रहा है” “ओके, कहिए” रितेश जी, शिवांगी ने कहा “शिवांगी मैं आपसे कुछ पूछना चाहता हूं” रितेश ने बोला

“हां, तो पूछिये जनाब” जैसे ही दबी आवाज में रितेश ने कुछ कहने की हिम्मत की, एकदम शिवांगी कहने लगी “तुम आज कुछ नहीं बोलोगे रितेश” पहले तो रितेश के पूरे शरीर में बिजली सी दौड़ गई, शायद वो… लेकिन जैसे ही शिवांगी के चेहरे पर मुस्कराहट देखी, तो लगा कि उसने मन की बात वो समझ चुकी है, लेकिन शिवांगी ने फिर मचलते स्वर में कहा जनाब “आज मैं जल्दी में हूं बाहर गेट पर मेरा कोई इंतजार कर रहा है” कहते हुए जाने लगी शिवांगी की बात सुनकर रितेश के चेहरे पर एकदम उदासी छा गई। अब उसे लगने था कि शिवांगी उससे बहुत दूर जा चुकी है, इसलिए...

शिवांगी के जाने के बाद हम लोग भी चल दिए.. जैसे ही कॉलेज के गेट पर पहुंचे कि मेरे फोन पर मैसेज की टोन सुनाई दी। देखा तो दो शब्दों का मैसेज शिवांगी का था। मैसेज में लिखा था डॉन्ट वरी दीपेश कहने लगा, इस लडकी पर तो विश्वास ही...लेकिन रितेश को अभी भी उम्मीद थी, वह शिवांगी को भुलाने की कितनी भी कोशिश कर ले, लेकिन नहीं…

दो दिन की छुट्टी के बाद फिर एक ही साथ प्रैक्टिकल की तारीख आ गई। यह बात रितेश और दीपेश को नहीं पता थी, कि जिस दिन उनका प्रैक्टिकल है, उसी दिन शिवांगी का भी, पर शिवांगी नोटिस बोर्ड पर लिखे रोल नंबरों से पता कर चुकी थी।

हम दाेनों लैब में थे, कि उन्हें वही चंचल सी आवाज सुनाई दी, अरे तुम लोग भी… शिवांगी पहले से ही अपने प्यार का इजहार करने की तैयारी के साथ आई थी। आज फिर से उसने वही पिंक स्वेटर पहन रखा था। उसने जल्दी-जल्दी अपना असाइनमेंट पूरा किया और बाहर ग्राउंड में जाकर बेंच पर बैठ गई।

थोड़ी देर बाद रितेश जब लैब से बाहर आया तो उसे देखते ही शिवांगी ने कहा “आइए जनाब, कैसा रहा आपका असाइनमेंट” आज तो आपका दोस्त काफी खुश नजर आ रहा है, शिवांगी ने दीपेश से कहा “अच्छा रितेश मेरा स्वेटर कैसा लग रहा है” रितेश कुछ जबाव देता कि दीपेश बोला “क्या यह रितेश की पसंद है”

शिवांगी ने अपने पर्स से वो चिट्ठी निकाली, जिसमें लिखा था, रितेश अब हमारी बंजर जमीन पर “गुलाब” खिलने वाला है। आई लव यू डियर, यह कहते हुए शिवांगी उठ कर चली गई। अब रितेश का चेहरा….

-घनश्याम

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