E-इश्क:शोमाय ने उसके आंसू पोंछते हुए माथे और आंखों पर अनगिनत चुंबन अंकित कर दिए, रूही सिर से पांव तक सिहर उठी

6 महीने पहले
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हालांकि आज रूही का बिस्तर में जाने का मन बिल्कुल नहीं था। किसी ग्राहक का ही दिया जख्म ठीक नहीं हुआ था, जिसका दर्द कचोट रहा था। पर आज की रात को वह ऐसे छोड़ भी नहीं सकती थी। दिसंबर की आखिरी रात। आज की रात तो डबल कमाई की रात है। डांस पर भी लोग दिल खोलकर पैसे लुटाते हैं और रात पर भी।

पार्टी खत्म होते-होते मोबाइल पर मोटी रकम के साथ एक एड्रेस का मैसेज आ ही गया। रूही होंठ टेढ़ा करके गाली देते बुदबुदाई, “साथ में पियेंगे, डांस करेंगे, फिर यहां से निकलकर ऐसे एड्रेस मैसेज करेंगे जैसे घर पर बैठे वहीं से बुला रहे हों। साथ में ले जाते तो टैक्सी के पैसे ही बच जाते।”

फिर वही भव्य बंगले का भव्य कमरा, वही चमक-दमक और वही आईना, जो उसे दुनिया की सबसे खूबसूरत लड़की बताता था। रूही ने कपड़े लापरवाही से उतारे, आईने में खुद को कुछ देर निहारा, फिर कुछ सोचकर क्रॉप टॉप और स्कर्ट पहन ली। ग्राहकों से ही अनुभव मिला है। जब कपड़े एक-एक करके उतरते हैं, थोड़ा खिझा कर, थोड़े नखरे दिखा कर, तो उन्हें ज्यादा अच्छा लगता है।

मगर वो कुछ अलग सा था। सोफे पर बैठा था। सामने भुने ड्राई फ्रूट्स और दो कॉफी के मग रखे थे। रूहीना के आकर बैठते ही उसने शराफत के साथ एक मग उसके आगे बढ़ा दिया। साथ ही ड्राई फ्रूट्स लेने का इशारा किया।

इस शराफत के अभिनय पर रूहीना के होंठों पर एक वक्र सी मुस्कान आ गई। ये कैसा अजनबी है?

“आपका नाम?”

रूही अचकचा गई। नाम जानकर क्या करना है इसे?

“रूही।”

“मेरा नाम शोमाय है।” वो अपनेपन से मुस्कुराया।

रूही चिढ़ गई। नकली इश्क सुनने की तो आदत पड़ गई थी उसे, उस पर ये नकली अपनापन! वह अपने मन में घुसने की इजाजत किसी को नहीं देना चाहती, पर उसके चाहने या न चाहने से क्या होता है। पूरी रात के पैसे दिए हैं उसने, वो भी मुंहमांगे।

तभी सभी लाइट्स अचानक बंद हो गईं और कमरे की खिड़की झटके से खुल गई। पल भर में चुभने वाली ठंडी हवा से कमरा भर गया। सिर्फ हवा ही नहीं, बाहर तो बिन मौसम की बरसात ने भी कोहराम मचा रखा था। उसने दौड़कर खिड़की बंद की, फटाफट अल्मारी खोलकर एक कोट निकाला और रूही को पकड़ा दिया। “आप इसे पहन लें नहीं तो ठंड लग जाएगी। मैं फ्यूज देखकर आता हूं।” कुछ देर रूही स्तब्ध सी कोट लिए खड़ी रही, फिर धीरे से कोट पहन लिया। वह सोचने लगी, ‘क्या वो भी एक इंसान है? क्या उसे भी ठंड लग सकती है?’ तभी खिड़की फिर से खुल गई, पर रूही को होश कहां था।

तभी वो परेशान सा आया। “फ्यूज नहीं उड़ा है, कुछ और प्रॉब्लम है। लाइट शायद न आए जल्दी।” फिर खिड़की की तरफ देखते हुए बोला, “अरे ये क्या? आपने खिड़की दोबारा बंद नहीं की? अब तो लाइट के बिना हीटर भी नहीं जल पाएगा। आपने इतनी छोटी स्कर्ट… आप रजाई में बैठ जाइए।”

अब रूही के मन का बवंडर भी बाहर के मौसम जैसा हो गया। कौन है ये? क्या उससे पता समझने में कोई गड़बड़ी हुई है? मगर ये भी तो किसी का इंतजार ही कर रहा था। जिसका ये नाम भी नहीं जानता?

अब वो भी आकर उसके पास ही रजाई में बैठ गया, तो रूहीना को लगा शायद उससे कोई गलती नहीं हुई है। हो सकता है, यह सब उसके लिए पहली बार है इसलिए सकुचा रहा है। वो खुलकर बातें करने लगी। दोनों को ही लगा जैसे वे एक दूसरे के मन में झांक रहे हैं या एक दूसरे को तलाश रहे हैं। “डांस के अलावा आपकी और क्या हॉबीज हैं?” अब रूही की आंखों में आंसू आ गए। पता नहीं अपनेपन से या पेन किलर का असर खत्म हो जाने से। “आपके पास कोई पेन किलर होगी। दरअसल मुझे कहीं दर्द हो रहा है।”

वो पंद्रह मिनट बाद हाथ में ट्रे लिए लौटा। “ये सैंडविच खा लीजिए। बिना कुछ खाए पेन किलर नुकसान करती है।”

अब रूही का भी मन बातें करने का होने लगा था। बातों-बातों में रूही ने कहा कि उसे चांद देखना बहुत पसंद है, तो उसने उठकर खिड़की खोल दी और रूही को एक स्कार्फ और एक शॉल भी उढ़ा दिया। अब रूही के लिए अपने आप में सिमटे रहना नामुमकिन हो गया। आसमान में जबरन रोक कर रखे बादलों की तरह वो बरस पड़ी और बरसती ही चली गई। वो नासमझी में हुई फिसलन, वो चक्रव्यूह, वो गिरकर न उठ पाने की कसक, वो बेबसी… बड़बड़ाती हुई पता नहीं वह क्या कुछ बोल गई।

जब बोलकर थक गई और होश आया, तो देखा वह उसकी बाहों की गर्माहट में सिमटी हुई है। रूही की आंखें खुलने पर शोमाय ने उसका चेहरा अपने हाथों में लिया और उसके आंसू पोंछते हुए माथे और आंखों पर अनगिनत चुंबन अंकित कर दिए। रूही सिर से पांव तक सिहर उठी।

“आप कौन हैं? कॉफी और स्नैक्स के साथ किसका इंतजार कर रहे थे?”

“मैं एक स्वयंसेवी संस्था का फाउंडर हूं। अपने चैरिटी शो की डांसर का इंतजार कर रहा था। स्टेज डांसर हैं वो। नववर्ष के अवसर पर कल सुबह दस बजे से ही शो है और ये जगह शहर से दूर, इसलिए मैंने उनसे अनुरोध किया था कि वह रात में ही आ जाएं, लेकिन लगता है फोन नंबर में मुझसे कोई गड़बड़ी हो गई।”

“मैं आपके पैसे लौटा दूंगी”

“उसकी कोई जरूरत नहीं। आप ही हमारे शो में डांस कर दीजिए। आपने अभी बताया कि आपने डांस सीखा है। सरस्वती वंदना ही तो करनी है।”

“सरस्वती वंदना और मैं..?” रूही ने हकलाते हुए पूछा, “उसके बाद क्या मैं वापस जा पाऊंगी..?” रूही की पलकें फिर बरस पड़ीं।

“किसने कहा आपको वापस जाने के लिए। मेरे दिल में रुक जाइए। उधर देखिए, नववर्ष की पहली सुबह। कितनी खूबसूरत, कितनी प्यारी, कितनी पवित्र है, बिल्कुल आपके मन की तरह।”

बाहर अंधकार को चीरते हुए सूरज की पहली किरण ने आकाश में अपने सुनहरे रंग बिखेर दिए थे। कुछ देर दोनों एक दूसरे की धुंधली आंखों में फैला आकाश देखते रहे, फिर पलकों में आंसू लिए आलिंगन में बंध गए।

- भावना प्रकाश