E-इश्क:दिन बीत रहे थे, लेकिन धवल की कोई खबर नहीं थी, आखिरकार पापा ने पिघले शीशे सा फैसला सुना दिया

7 दिन पहले
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कॉलेज का इंट्रोडक्शन चल रहा था। “मैं कानपुर से धवल शर्मा” सांवला सलोना, छह फीट लंबा, आकर्षक व्यक्तित्व... लेकिन धवल नाम सुनते ही हॉल हंसी से गूंज उठा था... फिर जब धवल ने गाना शुरू किया, तो उसकी आवाज का जादू सब पर चलने लगा और हॉल तालियों से गूंज उठा। विधि हॉल में आगे की लाइन में बैठी थी, धवल का गाना उसे इतना पसंद आया कि बहुत देर तक वह उसके लिए तालियां बजाती रही। विधि को अकेले तालियां बजाते देख धवल का ध्यान उस पर गया। दोनों की नजरें मिलीं और अगले ही पल दोनों सहज हो गए। बस उसी पल जैसे दोनों के जीवन में प्यार ने दस्तक दी। विधि घर आकर भी धवल का गाया गाना गुनगुना रही थी।

अगले दिन जब कॉलेज में मिले तो विधि ने अपना परिचय दिया और धवल से उसके गाने की खूब तारीफ की। धवल को भी विधि का साथ अच्छा लगने लगा था।

फिर तो नोट्स के बहाने, लायब्रेरी, कैंटीन... हर जगह दोनों एक दूसरे से मिलने के बहाने ढूंढते।

दोस्ती का दौर अब प्यार में बदल चुका था और दोनों के लिए एक दूसरे से दूर रहना मुश्किल हो गया था। बात जब घर तक पहुंची, तो विधि को पढ़ाई पर ध्यान देने की हिदायत मिलने लगी।

लेकिन एक दिन जब धवल कॉलेज नहीं आया और उसका फोन भी बंद था, तो विधि डर गई। कॉलेज के बाद जब वह उसके कमरे में गई, तो ताला लगा हुआ था। विधि को समझ नहीं आ रहा था कि आखिर धवल को हुआ क्या है, वह यूं अचानक कहां चला गया। उसने जब इस बारे में घर में बताया तो, पापा ने कहा, “धवल का रिजल्ट उसके भागने की वजह है। मेंस नहीं निकाल पाया होगा, इसीलिये मुंह छिपा कर कहीं दूर चला गया होगा। इस तरह भागने वाला इंसान तुम्हारी जिम्मेदारी कैसे उठा सकेगा?”

वह मन ही मन सोचने लगी, उसका धवल इतना कमजोर नहीं हो सकता.... उसकी आंखें छलछला उठी थीं... दिन बीत रहे थे, लेकिन धवल की कोई खबर नहीं थी। आखिरकार पापा ने पिघले शीशे-सा अपना फैसला सुना दिया। उन्होंने मां से कहा, “आज शाम को रमेश जी अपने बेटे सोम के साथ आ रहे हैं, कोई तमाशा नहीं होना चाहिए, वह सिसक उठी थी... लेकिन जब अपने प्यार ने ही उससे दूरी बना ली, तो वह किस हक से शादी के लिए मना कर पाती।

सोम और उनकी मां सीमा जी को विधि पसंद आ गई। मध्यवर्गीय परिवार को अमीर दामाद और विधि को एक सुलझा हुआ जीवनसाथी मिल गया था। बस फिर क्या था, चट मंगनी पट ब्याह हो गया, लेकिन विधि के लिए धवल को भुला पाना इतना आसान नहीं था।

विधि जब सोम के साथ हनीमून के लिये कश्मीर गई, तो उसे यूं गुमसुम, उदास देख सोम को उसकी चिंता होने लगी।

सोम ने पूछा, “तुम्हारा चेहरा बुझा बुझा सा क्यों है?”

“क्योंकि मैं किसी और से प्यार करती हूं।”

“प्यार किया नहीं जाता, हो जाता है... जैसे मुझे तुमसे पहली नजर में हो गया...”

सोम बिल्कुल नॉर्मल दिखा तो विधि ने हैरानी से पूछा, “आपको बुरा नहीं लगा?”

“बुरा लगने की भला क्या बात है? तुम अकेले थीं, आजाद थीं, किसी से भी प्यार कर सकती थीं।”

वह सोचने लगी कि यह इंसान किस मिट्टी का बना है, न ही कोई क्रोध, न ही आक्रोश।

वह धवल के ख्यालों में खोई रहती। उसकी हालत देख सोम ने उससे दूरी बना ली थी।

लगभग छह महीने बाद एक दिन धवल का मैसेज देख वह खुशी से झूम उठी। आंखों में ढेरों सपने सजाकर वह उसके बताये हुए होटल में सज-धज कर पहुंच गई।

धवल के चेहरे पर अभिजात्य वर्ग की आभा थी, ब्रांडेड कपड़े उसके ऑफिसर बनने की गवाही दे रहे थे। विधि की आंखों के सूनेपन को देख वह परेशान हो उठा।

“गार्लिक ब्रेड एंड कोल्ड कॉफी।” धवल के ऑर्डर करते ही वह मुस्कुरा उठी, आज भी धवल को उसकी पसंद याद है।

“विधि, अपने पति के साथ खुश तो हो ना?”

“नहीं धवल, मैं तो निपट अकेली दोहरी जिंदगी जी रही हूं। तुम्हें भूल नहीं पा रही हूं, क्योंकि तुम मेरे रोम-रोम में बसे हुए हो। मैं अपनी तनहाइयों में तुम्हारे अक्स को ढूंढा करती हूं... मेरी छोड़ो, तुम अपनी बताओ।”

“मैंने मेंस पास कर लिया, लेकिन तुम्हारी शादी की खबर से डिप्रेशन में चला गया। वहां मुहे रिया मिल गई, उसने सहारा दिया, अब वह मेरा प्यार बन गई है। विधि, अब मैं अपने प्यार को धोखा नही दे सकता।”

“जब तुम अकेली थीं, तब मैं तुम्हारा दर्द साझा करने नहीं आ सका। मैं अपनी ही उलझनों में उलझा रहा, तुम्हारा सामना नहीं कर पाया, ऐसे समय में सोम ने तुम्हारा साथ दिया, तुम्हें समझा, समय दिया। तुम इतनी निर्दयी नहीं हो सकती! अब सोम ही तुम्हारा भविष्य है। मैं चाहूं भी तो तुम्हे अपना नहीं सकता। मुझे माफ कर दो विधि, शायद मैं कभी तुम्हारे लायक नहीं था। तुम्हें मुझसे कहीं अच्छा जीवनसाथी मिला है, उसके प्यार की कद्र करो। ऐसा प्यार हर किसी को नसीब नहीं होता।”

विधि कुछ नहीं कह पाई, उसकी आंखों से बस आंसू बहे जा रहे थे। उसके आंसू पोंछते हुए धवल से उसे बच्चों की तरह पुचकारते हुए कहा, “एक बात बताओ, अपने माता-पिता और पति को दुखी करके क्या तुम खुश रह पाओगी?”

धवल की बातें विधि को समझ आ रही थीं। अब उसे सोम के प्यार की कद्र समझ आ रही थी।

धवल से फिर कभी न मिलने वादा कर विधि अब जिंदगी में आगे बढ़ गई थी। अब उसे अपने हिस्से का प्यार निभाना था।

- पद्मा अग्रवाल

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