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E-इश्क:जीवनसाथी का ख्याल उसे फिर शादी की वेबसाइट पर ले गया और वह लैपटॉप पर सैकड़ों प्रोफाइल खंगालने लगी

6 महीने पहले
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सपनों की नगरी मुंबई के इस फ्लैट में अपने करियर की बुलंदियों तक पहुँचाने की ललक में निधि नितांत अकेली रहती है। कॉलेज में पढ़ाई करते हुए २०-२१ की उम्र न जाने कब पार हो गई और करियर को संवारते हुए निधि तीस पार कर गई है। शाम को थककर जब घर लौटती है तो दिल चाहता है कि सारे दिन में ऑफिस की घटी अच्छी-बुरी बातें किसी के साथ शेयर करे, पर किसके साथ?

कॉलेज के समय में निधि की खूबसूरती देखकर सब उसे ब्यूटी क्वीन के नाम से पुकारते। इस वजह से बहुत से क्लासमेट उसे पसंद करने लगे थे, लेकिन इन सबसे बेखबर निधि किताबों में खोई रहती। उसे पसंद करने वालों में अतुल का नाम भी शामिल था, जो उसका क्लासमेट होने के साथ-साथ उसका अच्छा दोस्त भी बन गया था। अतुल मन ही मन कब निधि को चाहने लगा उसे खुद भी पता न चला।

कॉलेज के फाइनल ईयर में वेलनटाइन डे पर लव लेटर और पूरे सौ सुर्ख गुलाबों का बुके लेकर अपने प्यार का इजहार करने उसके घर तक पहुंच गया, लेकिन बुके देखकर निधि भड़क गई। वह प्यार की भावना से भले ही अनजान थी, लेकिन सौ गुलाबों का मतलब अच्छी तरह समझती थी। निधि ने बुके उठाकर बाहर फेंक दिया, लेकिन लव लैटर को अपनी एक किताब में छुपाकर रख दिया।

उसने महसूस किया कि इतने बड़े शहर की भीड़भाड़ में वह कितनी अकेली है। सही उम्र में शादी कर ली होती तो उसका भी प्यारा सा घर-परिवार होता। जीवनसाथी का ख्याल उसे फिर शादी की वेबसाइट पर ले गया और वह लैपटॉप पर सैकड़ों प्रोफाइल खंगालने लगी। किसी का प्रोफाइल उसके साथ मैच नहीं कर रहा था, तो किसी की शक्ल-सूरत उसे पसंद नहीं आ रही थी। निधि थककर लैपटॉप बंद करने ही जा रही थी कि एकाएक उसकी नजर अतुल के नाम पर ठहर गई। उसने ध्यान से उसका प्रोफाइल देखा और उसे यकीन हो गया कि यह वही अतुल है जो कॉलेज टाइम में उसका अच्छा दोस्त था। अतुल का ख्याल आते ही मन में विचारों का सैलाब उमड़ पड़ा, न जाने अब अतुल कहां होगा, कैसा होगा।

वह फुर्ती से उठी और अतुल का लेटर ढूंढने लगी, उसने पूरी ड्रॉअर उलट-पुलट दी। किताबों को वापस रखने जा ही रही थी कि एक बुक में से गुलाबी पेपर नीचे गिरा। अतुल ने उसे यही लेटर दिया था। निधि फिर से अतुल का लव लैटर पढ़ने लगी।

तभी उसके मोबाइल पर उसकी फ्रेंड रिया का नंबर फ्लैश हुआ।

’हेलो निधि, तू कल आ रही है न आनंद हॉल में रीयूनियन मीट में शामिल होने? हम सब कॉलेज टाइम के फ्रेंड मिल रहे हैं। मेरी और तुम्हारी फेवरेट रागिनी मैम भी आ रही हैं।’

’मैं नहीं आ पाऊँगी, कल रात 9 बजे की फ्लाइट से मां-बाबूजी आ रहे हैं, उन्हें एयरपोर्ट पिक करने जाना है।’

’मुझे मालूम है, तू आने से क्यों कतरा रही है। इस मैरिड-अनमैरिड के प्रश्न का जवाब देने से तू कब तक भागती रहेगी? कहीं न कहीं तेरे और मेरे लिए कोई न कोई तो बना ही होगा।’

रिया ने फिर से मैसेज किया, ’बस तू आ रही है कल, मुझे कुछ नहीं सुनना। पुराने फ्रेंड से मिलकर मूड फ़्रेश हो जाएगा।’

थोड़ी सी ना नुकुर के बाद निधि ने कमिट कर दिया कि कल वह आनंद हॉल में जरूर पहुंचेगी। उसके मन में एक उम्मीद थी कि शायद कल अतुल से मुलाकात हो ही जाए।

उसने मन ही मन सोच लिया कि इस बार वह कोई गलती नहीं करेगी।

अगले दिन रीयूनियन की पार्टी में जाने के लिए निधि सज-संवरकर तैयार हुई। गुलाबी सलवार सूट व माथे पर छोटी सी बिंदी उसकी खूबसूरती बढ़ा रहे थे।

हॉल में घुसते ही उसे कई जाने पहचाने चेहरे नजर आए। कॉलेज के साथियों के हंसी-ठहाकों में निधि ने अपने आपको शामिल कर लिया। रीयूनियन में उनकी हिस्ट्री टीचर रागिनी मैम भी शामिल थी। तभी रागिनी मैम की आवाज सुनाई दी, “अरे हमारी ब्यूटी क्वीन ने शादी की या नहीं?” उसने बात को खत्म करने के लिए तपाक से जवाब दिया, “हां, शादी फिक्स हो गयी है, बस डेट फिक्स होनी बाकी है।”

तभी पीछे से एक जानी पहचानी आवाज सुनाई दी, “बधाई हो! कौन है वह खुशनसीब?”

निधि ने पीछे मुड़कर देखा, अतुल की ही आवाज थी। अतुल को देखकर वह उठी और उसके पास जाकर बैठ गई।

निधि ने अपना हाथ आगे बढ़ाते हुए कहा, “फ्रेड अगेन?”

अतुल ने भी जवाब में उसके हाथ पर हाथ रख दिया, “यस फ्रेंड अगेन!”

थोड़ी देर में दोनों उठकर भीड़ से अलग एक कोने में जाकर बैठ गए। बातों का सिरा पकड़ते हुए निधि ने पूछा, “कहां हो आजकल? शादी-वादी की या नहीं?”

”हां, शादी तो की थी, लेकिन उसे रास नहीं आयी, आज तलाक की आखिरी हियरिंग के सिलसिले में यहां आया हूं। होटल चमन में ठहरा हूं और कल शाम की फ्लाइट से वापस जा रहा हूं।”

”फिर तो कल पूरा दिन हम साथ गुजार सकते हैं और पुरानी यादें ताजा कर सकते हैं। मैं तुम्हें तुम्हारे होटल ड्रॉप कर दूंगी और कल एयरपोर्ट पर भी छोड़ दूंगी,” निधि ने कहा।

रास्तेभर अतुल और निधि पुरानी बातों को याद कर के हंसते रहे। निधि ने महसूस किया, आज कितने दिनों के बाद वह खुलकर हंस रही है।

अतुल ने कहा, “जानती हो निधि, वह सौ गुलाब का बुके जमा करने के लिए मुझे न जाने कितने फ्लोरिस्ट की खुशामद करनी पड़ी, तब कहीं जाकर वह सौ गुलाब का बुके तैयार कर पाया था, पर तुमने कितनी बेदर्दी से ठुकरा दिया था मेरे उस बुके और मेरी मोहब्बत को।”

फिर दोनों ही खिलखिलाकर हंस दिए।

“अच्छा रात बहुत हो गयी है, मैं चलती हूं। कल मिलते हैं, मैं छुट्टी ले रही हूं, लंच साथ में करेंगे और फिर मैं तुम्हें एयरपोर्ट पर ड्रॉप कर दूंगी।”

घर आकर निधि देर रात तक जागती रही, ख्यालों में चटक रंग के कालीन बुनती रही। क्या जाने उसका मन जानकर अतुल का क्या रीऐक्शन हो।

अतुल के होटल जाने के लिए निधि खूब सज-संवरकर तैयार हुई। वह समय से पहले ही होटल पहुंच गई और अपने साथ सौ सुर्ख गुलाब का बुके भी ले गई।

दरवाजे पर दस्तक होते ही अतुल ने दरवाजा खोला, तो कभी उसकी नजर सजी-संवरी निधि पर अटक जाती, तो कभी उसके हाथ में रखे सुर्ख गुलाब के बुके पर। अतुल ने पहले तो निधि की खूबसूरती की तारीफ की और फिर दिल का हाल बताते हुए कहा, “लगता है मेरा रीयूनियन मीट में आना सफल हो गया।”

निधि ने मुस्कुराते हुए कहा, “और मेरा भी।”

निधि ने बुके अतुल को दिया, तो उसने निधि का हाथ थाम लिया कभी न छोड़ने के लिए।

- माधुरी गुप्ता

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