पार्क वाला वीडियो वायरल हो गया:शोनित ने जिस लड़की को बदनाम किया, उसने ऐसा बदला लिया कि वह मुंह दिखाने लायक नहीं रहा

5 महीने पहले
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"एक्सक्यूज मी, वेब सीरीज के ऑडिशन कहां चल रहे हैं। मेरा रोल है उसमें, 7 बजे का मीटिंग टाइम है। प्लीज, जल्दी बता दें।"

आवाज पर रिसेप्शनिस्ट ने उस टॉल, डार्क, हैंडसम से लड़के को ऐसी नजरों से घूरा, जैसे सोच रही हो, नशा करके आये हो?

वह पूछना तो चाहती थी कि कौन सा सूखा माल फूंककर आये हो, पर शिष्टाचारवश कहा, "सॉरी सर, आप गलत जगह आ गए हैं, जैसा कि आप देख सकते हैं, यह न्यू विजन क्लीनिक है। यहां आंखों का चेकअप और इलाज किया जाता है। यदि आपको भी पढ़ने में दिक्कत होती है, तो आप नंबर लगवा सकते हैं, चश्मा बन जाएगा।"

अब शोनित ने गौर से बोर्ड देखा, न्यू विजन बोल्ड में और नीचे छोटे अक्षरों में आई क्लीनिक लिखा था। वह रिसेप्शनिस्ट के कटाक्ष को नजरअंदाज कर गया था और समझने की कोशिश करने लगा कि हुआ क्या है?

दरअसल, पिछले दो महीने से वह न्यू विजन मोशन पिक्चर्स के संपर्क में था। यह प्रोडक्शन हाउस बड़े कलाकारों को लेकर बेहतरीन वेबसीरीज बना रहा था, जो भारतीय गेम ऑफ थ्रोन्स की तरह बनने वाली थी। इसके दस सीजन्स आने थे, जिसमें एक महत्वपूर्ण रोल के लिए उसे एप्रोच किया गया था। ऑनलाइन ऑडिशन हो चुका था। रोल फाइनल कर लिया गया था। प्रति एपिसोड मोटी फीस थी और बॉलीवुड के बहुत सारे बड़े-बड़े सितारों के साथ काम करने का मौका।

उसने तमाम तहकीकात कर ली थी। तसल्ली के बाद ही अपने चैनल की ओर से लंदन जाने का मौका छोड़ दिया था। प्राइम टाइम शो भी नहीं लिया था। नोएडा से मुंबई आकर ऑडिशन की बाकी फॉर्मलिटी पूरी करना थी और साइनिंग अमाउंट लेना बाकी था।

तभी फोन रिंग हुआ।

"हेलो..?”

"हेलो सर, आपके साथ प्रेंक हुआ है, कैमरे को देखकर हाथ हिला दीजिए।"

“कौन है तू कुत्ते के…” शोनित गुस्से से थर-थर कांप रहा था, एक के बाद एक भद्दी गालियां उसके मुंह से निकल रही थीं।

"अरे सर, हर सेर को सवा सेर मिलता ही है। चिल मारो यार। आप हमारे आज के मॉर्निंग मामू हैं। स्माइल प्लीज।"

दूसरी तरफ से कोई उसी को उसी का डायलॉग चिपका रहा था।

"सामने आ जा जरा, जान ले लूंगा तेरी तो मैं…” बीप… बीप… बीप… फोन कट चुका था, अब स्विच्ड ऑफ बता रहा था।

शोनित वहीं सिर थामकर बैठ गया।

थोड़ी देर बाद बीप की आवाज आई और एसएमएस में एक डेट लिखी आई, 14 फरवरी 2019

एसएमएस नेट से भेजा गया था, अन्ट्रेसेबल नंबर था। कॉल या मेसेज नहीं जा रहे थे। वापसी के पूरे रास्ते वह गुस्से, विषाद, दुख और उदासी के दलदल में डूबता-उतराता रहा। आगे कैसे क्या करेगा और कैसे अपनी पुरानी जॉब उसी रुतबे और ठसक से वापिस लेगा, इसकी रूपरेखा बनाता रहा। अगर प्राइम स्लॉट न मिला तो? लंदन जाने का मौका तो निकल ही चुका, पर सबसे बढ़कर जहन उस एक तारीख पर आकर अटक गया।

क्या था उस तारीख में?

"कुछ तो शर्म कर नालायक, मासूम बच्चे का मिल्क पाउडर खा रही है? कुछ तो रहम कर उस पर।" नव्या के स्क्रीन पर मैसेज फ्लैश हुआ।

"हंसकर उसने बालकनी से बाहर झांका, सामने वाले अपार्टमेंट में रहने वाली उसकी सहेली कीर्ति उस पर टेलीस्कोप फिक्स किये हुए थी।

"न, रहम नहीं, बस मिल्क पाउडर खाने का मन है। मुझे इतना पसंद है कि रोज यही खा सकती हूं खाने की बजाय। अब मेरी अम्मा तो हैं नहीं जो बतातीं कि मैंने बचपन में खाया है या नहीं, तो अभी शौक पूरा कर लूं।"

अम्मा के जिक्र पर नव्या कुछ उदास हो गई।

"हांजी जरूर। अपने बच्चों को मिल्क पाउडर खिलाने की उम्र में भैया के बच्चों की बेबी सिटिंग कर रही है। तू बच्चों की आया ही बनी रहना। एक कम था, जो दूसरा भी तेरे भरोसे पैदा कर लिया गया, एक पाल रही तो दूसरा भी पल ही जाएगा।" कीर्ति के ताने शुरू हो चुके थे, उसने फटाफट फोन बंद किया और नन्हीं भव्या को प्यार से ब्लेंकेट ओढ़ाकर सुला दिया, फिर स्कूटी की चाभी उठाई और विवान को लेने स्कूल चली गई।

पहले वह भी एक चुलबुली सी लड़की हुआ करती थी। बहुत शरारती तो नहीं, लेकिन हमेशा हंसती-खिलखिलाती रहने वाली। फिर अचानक एक दिन पापा को हार्ट-अटैक आया और ऑफिस से घर नहीं लौट पाए। उसी सदमे में तीन महीने के अंदर मम्मी भी गुजर गईं। भाई की सरकारी नौकरी लग गई अनुकम्पा में। भाभी पहले से ही बैंक में थीं। बची वह, जिसको घर और बेटा सौंपकर दोनों निश्चिंत हो गए थे। वह पोस्ट ग्रेजुएशन में एडमिशन लेना चाहती थी, लेकिन छोटी भव्या के जन्म के बाद प्राइवेट फॉर्म भरवा दिया गया और उसकी कॉलेज लाइफ का अंत हो गया।

भाभी ने बड़े लाड़ से उसकी गोद में बिटिया देते हुए कहा था, मुझसे ज्यादा यह तुम्हारी है, देखो नाम भी तुमसे ट्यून करता रखा है, नव्या की भव्या। सभी मौजूद मेहमान भाभी का ननद के लिए प्रेम देखकर तारीफों के पुल बांधते नहीं थक रहे थे।

"पहले ही मेरी जिंदगी में परीक्षाएं और अभाव कम थे, जो अब यह भी होना था। मां-बाप के रहते उम्मीद थी। अब फ्री की नौकरानी कौन छोड़ेगा।" उसने तल्खी से सोचा। वह अपनी नियति स्वीकार कर चुकी थी।

रोज की तरह आज भी वह विवान को स्कूल से लेने जा रही थी कि अचानक रास्ते में उसकी स्कूटी बंद हो गई। नव्या यह सोचकर परेशान हो गई कि अब क्या करे। पेट्रोल पंप भी खासा दूर था।

सामने वाले पार्क तक वह जैसे-तैसे स्कूटी घसीट लाई। तभी उसे यह देखकर राहत मिली कि उसका पुराना बैचमेट अक्षत पार्क में मौजूद है। अक्षत ने उसे देखकर हाथ हिलाते हुए ‘हाय’ किया।

नव्या ने इशारे में पूछा, “यहां कैसे?"

"अंकल यहां के केयरटेकर हैं, उन्हीं के साथ आया था। तुम यहां क्या कर रही हो?"

"पेट्रोल खत्म हो गया है।" उसने भी इशारे से बताया।

"रुको, मैं आ रहा हूं," अक्षत ने तसल्ली दी।

"तो जैसा कि आप देख सकते हैं, ये हैं हमारे पहले लव-बर्ड्स जो 'खुल्लम खुल्ला प्यार करेंगे हम दोनों' में यकीन रखते हैं। इन्हें संस्कृति रक्षकों का कोई डर नहीं। कोई राखी बंधवाएगा या मंगलसूत्र डलवाएगा, इन्हें परवाह नहीं। ‘वेलेंटाइन्स डे’ को पब्लिक पार्क पहुंच जाना, वाकई हिम्मत का काम है। और जरा देखिए, कैसी डबल मीनिंग, आई मीन मीनिंगफुल इशारेबाजियां चल रही हैं। इनके जज्बे को सलाम। आइए, जानते हैं इन्हीं से, इनकी लव स्टोरी। मैम आप कुछ बताइए…”

दोनों एकदम स्तब्ध रह गए। मूर्ति बने कभी एक-दूसरे को तो कभी उन नमूनों को ताक रहे थे, जो माइक और कैमरा पकड़े हुए थे। आसपास भीड़ लग गई थी।

नव्या की आंखों में आंसू भर आए। अक्षत की आंखें गुस्से से लाल हो गईं, पर फिलहाल उसे नव्या की चिंता थी। वह उसका हाथ पकड़कर लगभग घसीटते हुए वहां से दूर ले गया।

"अरे, प्रेम-पंछी उड़ रहे हैं, प्राइवेसी में खलल पसंद नहीं आया, हमसे बात नहीं करना चाहते, कोई बात नहीं। ये तो कहीं और ‘वेलेंटाइन डे’ मना लेंगे… वहीं, जहां कोई आता-जाता नहीं, लेकिन हम तलाश करते रहेंगे ऐसे दीवानों की। बने रहिये अपने होस्ट एंड दोस्त शोनित के साथ, आप देख रहे हैं आपका अपना फेवरेट शो मॉर्निंग मुर्गा…”

नव्या सदमे में थी, समझ नहीं आ रहा था उसके साथ क्या हुआ है, क्यों हुआ है। और वही हुआ, जिसका डर था। कुछ ही देर में वह वायरल थी। घर-घर, फोन-फोन...

भाभी, जिन्हें थोड़ा-बहुत गिल्ट था, ननद की कॉलेज लाइफ छीनकर बेबी सिटिंग कराने का, अब फुल फॉर्म में थीं।

"पहले ही लड़की गूंगी है, इस वजह से रिश्ते नहीं आते हैं और लोग समझते हैं भाभी ने नौकरानी बना रखा है। लेकिन यहां तो जुबान वालियों से सौ हाथ आगे हैं देवीजी। एक और गूंगा ढूंढ भी लिया अपने जैसा। इतनी ही आग लगी थी, हमें बता देती, हम शादी करा देते। अब पूरी दुनिया में झंडे गाड़ दिए हैं।"

भाई ने बस खामोशी से उस पर एक नजर डाली और अपने कमरे में चले गए। इस निगाह ने भाभी के तानों से कहीं ज्यादा उसके दिल को चीर कर रख दिया।

तभी कीर्ति दौड़ती हुई आई और उसे गले लगा लिया। उसे देखते ही नव्या के सब्र का बांध टूट गया। न जाने कितनी देर तक वह सिसक-सिसककर रोती रही, फिर साइन लैंग्वेज में उसे बताया कि क्या हुआ था।

अक्षत कई साल पहले मूक-बधिरों की स्पेशल क्लासेस में उसका सहपाठी था। उसी की तरह वह सुन लेता था, बोल नहीं पाता। बरसों बाद आज उसे देखा था। उनका कोई चक्कर नहीं चल रहा था। कीर्ति तो यह जानती ही थी।

वक्त हर घाव भर देता है, सिवाय उन सजाओं के, जो बिन गलती या अपराध के भोगनी पड़ती हैं। अब नव्या घर में बंद होकर रह गई थी। फोन उससे ले लिया गया था। किसी के सामने वह जाती नहीं थी। हां, कीर्ति रोज बिना नागा उससे मिलने जरूर आती। भाभी ने ऐतराज भी जताया तो दो टूक जवाब मिला, जब मेरे मां-बाप नहीं रोक पाए तो आप क्या रोकेंगी। महिला थाने तक बात न पहुंचे कि आपने इसे हाउस अरेस्ट कर रखा है, तो आगे से मेरे आने-जाने पर टोकियेगा नहीं।

एक दिन कीर्ति एक लेटर लेकर आई। वह अक्षत का था।

‘डियर नव्या,

विल यू मेरी मी? मैं जानता हूं, गलती हम दोनों में से किसी की नहीं थी, बस गलत जगह, गलत मौके पर थे इसीलिए किसी गिल्ट के चलते प्रपोज नहीं कर रहा, न कोई एहसान, न ही कोई दबाव।

लेकिन होगा यह कि तुम भैया-भाभी और जाहिल जमाने को यह साबित करने में कि तुम निर्दोष हो, मेरा प्रपोजल रिजेक्ट कर दोगी, मैं यह जानता हूं। फिर भी इसलिये कह रहा हूं कि छह महीने कम नहीं होते। तुमने देख ही लिया, दुनिया को रोज नया गॉसिप चाहिए, नए मीम, नए जोक चाहिए इंटरनेट को। इसलिये सब तुम्हें भूल चुके हैं। तुम्हारी गॉसिप पुरानी पड़ चुकी। रोज ‘मॉर्निंग मुर्गा’ के नए एपिसोड आते हैं, नए लोग वायरल होते हैं। तो तुम बूढ़ी होकर या जवानी में ही मर जाओगी, तब भी कोई पूछने नहीं आएगा।

रहे तुम्हारे भैया-भाभी। भाभी को उनके बच्चे जवान होने तक पालने वाली आया मिल चुकी है और भैया सब जानकर भी इसलिए चुप हैं कि गूंगी लड़की की शादी में वैसे ही मोटा दहेज देने की चिंता थी। अब बदनामी का एक्सक्यूज है। कमाऊ बीवी घर में बैठा नहीं सकते बच्चे पालने।

तो जब सब अपना सोच रहे हैं तो क्यों न तुम भी अपना सोचो या यूं कहो कि हम भी अपना सोचें। और यकीन मानो, उस शोनित को उसके किये का एहसास जरूर कराऊंगा एक दिन। दस मिनट के मजे से कैसे किसी की जिंदगी तबाह हो सकती है, उसे एहसास कराना जरूरी है।

सबसे आखिरी बात। प्यार करने लगा हूं तुमसे। जितना मेरा सामर्थ्य होगा, उससे बढ़कर ही खुश रखूंगा तुम्हें। बस मैं ना-पसंद होऊं, तभी इनकार करना। किसी को कुछ साबित करने के लिए नहीं। प्लीज, यह हाथ जोड़कर रिक्वेस्ट है। आई लव यू नव्या।’

तुम्हारा,

अक्षत

"देखा, कैसा बावला लड़का है। पहली लाइन में मुझसे शादी करोगी और आखिरी लाइन में आई लव यू।" कीर्ति हंस पड़ी थी, पर नव्या फिर रोने लगी।

"अब मेरी बात सुन। कोई बेवकूफी मत करना, अगर यहीं बूढ़ी होकर नहीं मरना है तो।"

और फिर दो महीने में ही विधि के विधान से यह हुआ कि दोनों की कोर्ट मैरिज हो गई।

उधर शोनित अपना 14 फरवरी वाला शो देख चुका था और समझ गया था, इसी से कुछ कनेक्शन है। वह अक्षत और नव्या की तलाश में लगा था। उसकी तलाश पूरी होते ही इस रहस्य से पर्दा उठ जाना था कि आखिर सबको मामू बनाने वाला खुद क्यों मामू बना।

- नाज़िया ख़ान

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