भरोसा टूट गया:टूटे रिश्ते की चुभन ने सीमा को ऐसे तोड़ा कि वह सरल पर भी विश्वास न कर सही

13 दिन पहले
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खचाखच भरी बस रेंगने लगी थी। लेकिन सीमा के पास कोई चारा नहीं था। वो कई अन्य लोगों की तरह बस में लटक गई। कुछ देर में सब व्यवस्थित होने लगा। अंदर जगह बनी, लोग अंदर घुसे और हर व्यक्ति को ऊपर लगा गोल कुंढा पकड़कर खड़े होने की जगह मिल गई।

‘तीन घंटे का सफर इस तरह खड़े रहकर कैसे कटेगा’ सीमा मन ही मन बुदबुदा ही रही थी कि सरल की आवाज सुनकर चौंक पड़ी, “काटना तो पड़ेगा ही। तो क्यों न हंसकर काटें!”

“सरल तुम..? तुम भी..?”

सरल ‘हां’ में मुस्कुरा दिया, “जहां तुम, वहां मैं। तुम्हारे साथ के लिए...”

“बस, अब फिर से फ्लर्ट मत शुरू कर देना। ये कोई जगह है फ्लर्ट करने की?”

“अरे वाह! मैं तो हर जगह ट्राई कर चुका हूं। अगर तुम्हारी नजर में और कोई जगह हो तो बता देना। अगली बार वहां...”

सीमा ने झल्लाकर सरल की बात काट दी, “देखो, ये मत कहना कि दो महीने ऐसी जगह रिसर्च करने जाने के लिए तुमने सिर्फ मेरे साथ के कारण अपना नाम दे दिया, जहां कोई टैक्सी भी जाने को तैयार नहीं होती। जाने वहां गेस्ट हाउस के नाम पर क्या बुक कराया होगा। मैं तो कभी न जाती अगर मुझे वो छुट्टी न लेनी पड़ी होती...” सीमा ने एक आह भरी।

“हालांकि नुकसान भी मेरा ही हुआ और सजा भी मुझे ही मिली। टॉप कंपनियों के मैनेजिंग डायरेक्टर्स के सामने पेपर पढ़ना मेरी ऑपर्चुनिटी थी जो मेरी प्रतिभा और मेहनत के कारण मुझे मिली थी। और पापा को हार्ट-अटैक पड़ा। कोई छोटा-मोटा कारण या बहाना तो नहीं था छुट्टी लेने का...”

तभी सीमा की नजर सरल के मुस्कुराते हुए और उसकी बात ध्यान से सुनते चेहरे पर पड़ी तो उसने शांत होकर सिर झटक दिया, “पर तुम इस सजा के लिए कैसे चुन लिए गए? तुम्हारी ए.सी.आर. तो बहुत अच्छी थी।”

“मैंने खुद नाम दिया था। कहा था न तुम्हारे साथ के लिए और सजा नहीं अनुभव मानता हूं मैं इसे। देखो...” और कुछ ही देर में सीमा का चिढ़ा चेहरा सामान्य हो गया, फिर होंठों पर मुस्कान की लकीर थोड़ी सी गोल हुई और फिर खिलखिलाहट में बदल गई।

“बचपन में हमने एक छोटे से पीढ़े को रस्सी में फंसाकार पेड़ पर झूला डाला था और खड़े होकर झूलते थे। आज इस बस ने वही आनंद दे दिया।” सरल ने बस से उतरते हुए अपना अकड़ चुका हाथ घुमाते हुए कहा।

सरल का मजाक सुन सीमा खिलखिलाते हुए बोली, “अभी देखो, गेस्ट हाउस में कौन-कौन से आनंद मिलते हैं।”

गेस्ट हाउस पहुंचते ही दोनों को हैरानी हुई। रहने का इंतजाम उम्मीद के विपरीत बहुत अच्छा था। जगह भी बहुत सुंदर थी। फूलों के पेड़ों से भरा एक अलग ही पठारी इलाका। काम भी बहुत रोचक था। गेस्ट हाउस के बाहर दोनों ओर पेड़ों से गिरे गुलाबी फूलों से ढकी सड़क थी।

महानगर में रहने वाले सरल और सीमा के लिए ये बड़ा अद्भुत नजारा था। दोनों दूर तक टहलने निकले तो केयर टेकर ने टोका। “रात में अक्सर सांप घूमते हैं यहां।”

सरल ने सीमा की ओर देखा। वो कुछ देर सोचती रही, फिर बोली, “सांप के डर से इतनी फैसिनेटिंग वॉक छोड़ने से अच्छा है एक डंडा ले लें। आसपास ठोकते चलेंगे। सांप भी तो इंसानों से डरता है न? और फिर अपने भारत में पाए जाने वाले नब्बे प्रतिशत सांपों में जहर नहीं होता..” दोनों ठाहका लगाकर हंस पड़े।

एक दिन यूं ही सरल ने सीमा का हाथ थाम लिया तो उसने मना नहीं किया। वो स्पर्श की सिहरन और नजदीकियों की खुमारी महसूस करती रही। उसके बाद रोज इस मीठे अनुभव से गुजरने के लिए सीमा खुद ही सरल का हाथ थाम लेती। लौटकर दोनों कॉरीडोर में बैठकर देर तक कॉफी के साथ गपियाते रहते। हल्की ठंडक लिए हवा उनके दिलों की सिहरन का बहाना बन जाती।

“कल वापसी है!” सीमा ने एक आह भरी। उसकी पलकें उदास हो गईं और होंठों ने खामोशी की चादर ओढ़ ली। सरल को लगा कि अगर अभी उसने सीमा के मन की ग्रंथि नहीं खोली तो कभी नहीं खोल पाएगा।

वो सीमा के बिल्कुल नजदीक खिसक आया। दोनों हाथों के बीच उसकी पूरी हथेली दबाई और उसकी आंखों में झांकते हुए कहा, “क्या तुम इस सफर को जिंदगी का सफर और मुझे हमेशा के लिए अपना हमसफर बनाओगी?”

सीमा की पलकों में मोती झिलमिलाने लगे, “तुम तो सब जानते हो कि मैं क्यों शादी नहीं करना चाहती। शादी क्या मैं किसी भी रिलेशनशिप में नहीं रहना चाहती। मैंने रिश्तों को टूटते देखा है। उनके टूटने से टूटे दिलों को रोते-बिलखते देखा है। मम्मी-पापा के तलाक के बाद भाई और मम्मी की याद में बरसों रोई हूं और...” सीमा बोलती रही और सरल सुनता रहा…

फिर सरल ने बोलना शुरू किया, “अच्छा बताओ, जब तुम उस बस में चढ़ी थीं तो क्या ये ख्याल नहीं आया कि आए दिन बस के जो एक्सीडेंट होते हैं उनका कारण कैपेसिटी से अधिक सवारी बिठाना है।”

“आया था, पर और कोई रास्ता भी नहीं था। नौकरी थोड़े ही छोड़नी थी।”

“और जब सड़क पर सांप होने की प्रॉबेबिलिटी सामने आई थी तो तुमने क्या कहा था? ‘इतनी फैसिनेटिंग वॉक…’ तो अब बताओ, नौकरी या एक फैसिनेटिंग वॉक तुम्हारे लिए जिंदगी से भी ज्यादा जरूरी है?” सीमा के दिल में जैसे कोई हथौड़ा सा पड़ा और कोई ताला सा खुल गया।

सही ही तो कह रहा था सरल। आज उदाहरण देकर बता रहा था तो बात दिल में उतर गई। वैसे ऑफिस के कॉमन रूम में, पार्टियों में, कैफेटेरिया में हर जगह जिसे वो फ्लर्ट का नाम देकर झिड़कती आई थी और अपने दिल की ख्वाहिशों की अनसुनी करती आई थी। यही तो कहता रहा था वो कि जब हम दुर्घटना के डर से चलना नहीं छोड़ देते, तो टूटने के डर से प्यार जैसे खूबसूरत एहसास को क्यों ‘ना’ कहते हैं।

सीमा ने सरल की सरल आंखों में झांका। उनमें प्यार की खुशबू महक रही थी। वो सरल के और करीब आ गई। उसकी सांसों की मदहोशी को पहचाना। नजदीकियों की खुशी को दिल की धड़कनों ने महसूस किया।

“सच कहते हो। प्यार जिंदगी का सबसे खूबसूरत एहसास है। रास्ते में सांप या एक्सीडेंट के डर से मैं ये वॉक या सफर नहीं छोड़ूंगी। बस तुम मेरे हमसफर बनकर रहना।” कहते हुए उसने सरल के सीने पर अपना सिर रख दिया। सरल की बांहों के मजबूत घेरे में उसके सारे डर कसमसाकर टूटते गए।

- भावना प्रकाश

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