उसकी छुअन का एहसास:शेखर ने जिस तरह पायल को छुआ उसकी सिहरन वह भुला नहीं पा रही थी, कैसे किसी और से जुड़ती

5 महीने पहले
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फोटो के किनारों का रंग फीका पड़ गया था। कहीं-कहीं से किनारे झड़ने भी लगे थे। पिछले दिनों हजारों बार उसकी उंगलियों ने प्यार से उसे थामा था और उनकी छाप उस पर दिखती थी। लेकिन फोटो वाले लड़के के लिए उसके मन में जो प्यार था, वह कभी मिट नहीं सकता था। उसकी उंगली को फोटो के पीछे पेन की स्याही का एहसास हुआ, जिस पर उन्होंने फोटो खींचने की तारीख और अपने-अपने नाम के पहले अक्षर लिखे थे। तारीख के नीचे शब्द थे, ‘तुम्हारे बिना नहीं रह सकता।’

वह सोच रही थी, क्या उन शब्दों का कोई हिस्सा अभी भी सच है। वह उसे प्यार करता था, और वह ऐसा प्यार था जो केवल दो युवा दिलों के बीच उठने वाली कशिश के साथ आता है। वे दिल जो एक-दूसरे को देखकर धड़कने लगते थे।

उसने उसकी आंखों को ध्यान से देखा, वही आंखें जो उसकी आत्मा में इतनी गहराई से पहले भी कई बार उतर चुकी थीं। फोटो में आंखों में वही जादुई शक्ति थी जो उसकी आंखों में दिखती थी। क्या अब भी उसके अंदर उसके लिए वही भावनाएं होंगी, जो फोटो खिंचवाते समय थीं। वह जहां है, वह चाहकर भी अभी वहां नहीं पहुंच सकती। काश! कोई तो संकेत उसे मिल जाता। काश! वह जान पाती कि वह उसे अभी भी देख रहा है। उसे प्यार करने को बेचैन है।

उसे देख कोई भी उसका दीवाना हो जाता। गजब का आकर्षण था उसमें। लड़कियां मरती थीं उस पर। मां कई बार चेताती थीं उसे, “पायल, ठीक से परख लो उसे। कहीं भंवरा न निकले। कितनी तितलियां उसके आसपास मंडराती रहती हैं।” पर वह जानती थी कि वह केवल उससे प्यार करता है, वह केवल उसका है। लड़कियां चाहे कितनी ही क्यों न उसके पीछे पड़ें, वह तो उन्हें नजर उठाकर भी नहीं देखता था।

उसे विश्वास था कि जिस तरह से फोटो में वह उसे देख रहा है, अब भी कहीं छुपा उसे देख रहा होगा। बस वही नहीं देख सकती उसे, छू नहीं सकती उसे… क्या जरूरी था तुम्हारा जाना शेखर? तुम तो कहते थे कि मेरे बिना नहीं रह सकते, फिर क्यों दूर हो गए?

नजरों से ध्यान हटाकर वह उसके मुंह को देखने लगी। हल्की-सी तिरछी मुस्कान के बीच झांकते कतार में सजे दांत। गाल पर नजर के टीके की तरह लगा तिल। उसने अपनी आंखें बंद कर लीं और याद करने लगी जब पहली बार उसके होंठों ने उसने चूमा था। वह उस समय रो रही थी। उसके आंसू अक्सर तब निकल आते थे जब वह एक साथ कई पैग पी जाती थी। वह उसका चेहरा हाथों में थामे लगातार उसके आंसू पोंछ रहा था। और तब जिन नजरों से उसने उसे देखा था, वह कुछ अलग ही था। यह उस तरह का क्षण था जिसे केवल हॉलीवुड के निदेशक ही फिल्मों में उतार सकते थे। उसके शरीर के प्रत्येक रेशे में तब सिहरन उठी थी, मानो वे दोनों उस पल का न जाने कब से इंतजार कर रहे थे। उसका मन पहले से जानता था कि यही वह है जिसे वह हमेशा प्यार करेगी, यही है वह जो उसे हमेशा प्यार करेगा।

शेखर ठीक नहीं किया तुमने…

कोई बात, कोई और इंसान उसके चेहरे पर वैसी मुस्कान नहीं ला सकता। आंसू बहने लगे थे। कहीं उस खारे पानी से उसकी यह निशानी भी खराब न हो जाए, यह सोच उसने फोटो संभालकर दराज में रख दी। वहीं जहां से उसे निकाला था। मोबाइल में फोटो खींचने की बात उसे जंचती नहीं थी। कहता, “जो बात कैमरे से फोटो खिंचवाने में आती है, वह मोबाइल से नहीं। कैमरे की रील पूरी होने का इंतजार करना और फिर उसे डेवलप कराने ले जाने का मजा कुछ और ही होता है।”

दराज में ही वह इसे छिपाकर रख सकती थी ताकि कोई बाहर रखी देख यह न कहे कि सब भूलकर आगे बढ़ो। दराज में, फोटो के साथ, उसने अपनी असुरक्षा और डर को भी बंद कर दिया। डर कि इतना सच्चा और जान से भी ज्यादा चाहने वाला प्यार उसे अब कभी नहीं मिल सकेगा। ऐसा एहसास फिर कभी नहीं होगा, जब आपका दिल जोर-जोर से धड़कने लगता है, कभी लगता है कि वह धड़कना बंद कर देगा, लेकिन आप जानते हैं कि वह उस समय किसी भी क्षण की तुलना में प्यार से लबालब है।

एक गहरी सांस लेते हुए, दराज बंद करते हुए वह जानती थी कि एकांत में वह उसे जब चाहे खोल सकती है। यह फोटो उसके निजी पलों का हिस्सा है, सबसे खूबसूरत हिस्सा। मोबाइल में उसकी ढेर सारी फोटो हैं, क्योंकि जब भी वह उसके साथ होती थी, तुरंत फोटो खींच लेती थी, लेकिन वे सब यूं ही यकायक खींची गई फोटो थीं। उनमें भी उसके चेहरे पर प्यार के लकीरें वह पढ़ सकती है, लेकिन इस फोटो में वे दोनों साथ हैं। बेशक उसकी नजरें फोटोग्राफर पर थीं, क्योंकि वह लगातार निर्देश दे रहा था, पर उसकी आंखों और चेहरे पर जो चमक थी, वह प्यार के सतरंगी रंगों को बयां कर रही थी। होंठों पर छाई मुस्कान प्यार की जुंबिश को बयां कर रही थी।

दरवाजे पर लगातार दस्तक हो रही थी। उसने अपने कुर्ते की सिलवटें ठीक कीं। कितनी देर से वह लेटी हुई थी। वह सीढ़ियां उतर कर नीचे जाने लगी। बालों पर उसने अंगुलियां फेरीं। नीचे आकर ड्राइंगरूम की लाइट जलाई। शाम के बाद का अंधेरा उतरने लगा था। दर्द अभी भी उसे घेरे हुए था और झुंझलाहट भी थी कि जब वह इस समय शेखर के साथ होना चाहती है तो कौन परेशान करने चला आया था।

कोरियर वाला था। “मैडम, बहुत समय से यह पैकेट पड़ा था। आप घर पर मिलती ही नहीं थीं।” उसके चेहरे पर नाराजगी थी।

कैसे बताती उसे कि वह दरवाजा क्यों बंद रहता था। तेरह दिन का क्या शोक भी न मनाए वह? यह उसका निजी शोक था, ये पल भी उसके गोपनीय पल थे, कैसे आने देती किसी को तब… मां को भी लौट जाना पड़ा था। और बाकी किसी को क्या पता कि वह शोक क्यों मना रही है। वह उसका था, उसका प्यार था… तो उसके जाने का दर्द वह किसी के साथ कैसे बांट सकती है? उसके साथ बिताए सुख के पल जब उसके थे तो दुख के पल कैसे दूसरों के साथ साझा कर सकती थी?

डाइंगरूम की लाइट बंद कर वापस सीढ़ियां चढ़ते हुए अपने कमरे में आ गई। लिफाफे पर लिखे अपने नाम को देखा तो कांप उठी। वह पहचानती है इस लिखाई को। जिस पेन से लिखा है यह वही है जिससे उन्होंने उस फोटो के पीछे अपने-अपने नाम के पहले अक्षर लिखे थे। पेन उसी ने तो दिया था उपहार में। पर कोरियर… वह उसे खुद दे सकता था? लिफाफे पर वे तारीखें लिखी थीं जिस-जिस दिन पैकेट घर बंद होने के कारण वापस गया था। पहली तारीख 13 दिन पहले की थी यानी उससे एक दिन पहले कोरियर किया होगा! तब क्या वह जानता होगा कि ऐसा हादसा हो जाएगा? कोई भी नहीं सोच सकता। तो क्या पैकेट उसका भेजा संकेत है?

लिफाफे के अंदर फोटो थी, जिस पर एक नोट लगा था-

मेरी पायल,

तुम ही मेरी सब कुछ हो। हमेशा तुम्हें प्यार करूंगा। मेरा इस तरह फोटो भेजना तुम्हें नाटकीयता लगे, पर क्या करूं, तुम्हें सरप्राइज देने का मन किया। कैमरे की रील खत्म हो रही थी तो सोचा एक फोटो खिंचवा लूं तुम्हारे लिए। यादें ढेर सारी होनी चाहिए। मिलते ही तुम फोन करोगी और तुम्हारी उस खुशी को महसूस करने मैं तुरंत तुम्हारे पास पहुंच जाऊंगा। अच्छा लगेगा न तुम्हें? जानता हूं, तुम ऐसे पल मुट्ठी में कैद करके रखना पसंद करती हो और मैं तब तुम्हारी आंखों में उतरते अपने लिए प्यार को देख अपने को दुनिया का सबसे खुशकिस्मत इंसान मानता हूं। मिलते हैं कल…

- तुम्हारा शेखर

पायल एक बार फिर शेखर की तस्वीर में खो गई। वह सोचने लगी, फोटोग्राफ का चलन शायद इसीलिए शुरू हुआ होगा ताकि पास न होकर भी पास होने का एहसास बरकरार रहे।

- सुमना. बी

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