E-इश्क:महिला ने कहा कि वह उससे मिलना चाहती है, रितेश का दिल धड़कने लगा, इस तरह वह सुनीति के साथ बेवफाई तो नहीं करेगा

एक महीने पहले
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“मैं निकल रहा हूं, बाय,’’ दरवाजे से निकलते हुए रितेश ने कहा। जवाब सुनने तक का उसने इंतजार नहीं किया। सुनीति जब तक बाहर आई, कार गेट के बाहर पहुंच चुकी थी। पल भर को वह झुंझलाई और फिर दौड़ कर अंदर भागी। बच्चों की भी स्कूल बस आने ही वाली थी। बच्चों के जाने के बाद वह उसका घर के काम निपटाने का मन नहीं हुआ। आज घरेलू सहायिका ने भी छुट्टी ली थी। वह उदास मन से बालकनी में बैठ कॉफी पीने लगी। उसके अकेलेपन में कॉफी की महक उसे सुकून देती है।

कैसा मशीनी हो गया है उनका जीवन… 12 साल हो गए हैं शादी को और नीरसता पसर गई है रितेश और उसके रिश्ते में। शादी के बाद उसे नौकरी छोड़नी पड़ी थी, क्योंकि सास को पसंद नहीं था, जबकि वह साथ भी नहीं रहती थीं। रितेश अपना बिजनेस बढ़ाने में लगा था और उसे सिवाय उसके और कुछ सूझता नहीं था। सही कहता है वह कि बिजनेस भी किसी नशे से कम नहीं होता है। वह भी खुद को बच्चों और घर के कामों में व्यस्त रखती थी, या रखने की कोशिश करती है… वरना वह तो पंख फैलाए उड़ना चाहती है। कुछ सही करती है।

रोमांस, छोटे-छोटे प्यार के पल, सब बीती बातें लगती हैं। क्या सभी के साथ ऐसा होता है? उसकी जिंदगी में तो ऐसा ही हो रहा है, बस वे भाग रहे हैं और इस तरह दिन से रात होती है, रात से सुबह और फिर रात… रितेश कैसे भूल सकता है आज का दिन? पिछले साल भी उसी ने याद दिलाया था, इस बार नहीं याद दिलाएगी। कुछ दिन, कुछ चीजें भूलने के लिए नहीं होती है, चाहे आप कितने ही व्यस्त क्यों न हों। शादी की सालगिरह भी भला कोई भूल सकता है! वह जानती है कि वह उससे बहुत प्यार करता है और उसके लिए तो वह उसके जीवन का प्यार था, लेकिन…

सार दिन रितेश बिजी रहा, लेकिन उसे लगता रहा कि कुछ तो मिस हो रहा है उससे। दोपहर में उसके पास एक प्राइवेट नंबर से मैसेज आया, “आज आप बहुत हैंडसम लग रहे हैं, नेवी ब्लू रंग आप पर जंचता है।” उसे बहुत हैरानी तो हुई, लेकिन प्राइवेट नंबर होने की वजह से उसने ज्यादा ध्यान नहीं दिया। शाम को सुनीति ने उससे कुछ नहीं कहा, सामान्य ही बनी रही। अगले दिन, फिर एक और एसएमएस आया, “मैं आपकी बहुत बड़ी प्रशंसक हूं, आपने इतने कम समय में इतना कुछ हासिल कर लिया है, क्या मेरे दोस्त बनना पसंद करेंगे?"

रितेश हैरान तो हुआ, पर उसे मैसेज पढ़कर बहुत खुशी भी हुई। वह जवाब देना चाहता था, पर प्राइवेट नंबर होने के कारण मन मसोस कर रह गया। ऐसा रोज होने लगा। एक मैसेज जरूर आता। भेजने वाली कोई महिला है, यह तो उसने अनुमान लगा ही लिया था। अब तो मैसेज आने का इंतजार करने लगा। वह यह सोचकर हैरान था कि आखिर वह महिला उसके बारे में इतना सब कुछ कैसे जानती है। रितेश के लिए धीरे-धीरे जीवन एक बार फिर रंगीन हो गया, उसके अंदर पसरी बोझिलता कम होने लगी, वह घर पर भी सुनीति से हंसकर बात करने लगा।

एक दिन तो मैसेज पढ़कर वह आश्चर्यचकित रह गया। “आप बहुत ही अच्छे हैं, अपने परिवार से कितना प्यार करते हैं। ऐसे लोग आजकल विरले ही होते हैं। आपकी पत्नी सचमुच भाग्यशाली है।"

इसके बाद तो वह घर पर ज्यादा समय देने लगा।

सुनीति ने कहा भी, ‘‘तुम में काफी बदलाव आ गया है, क्या बात है? तुम बेझिझक मुझे बता सकते हो।’’ रितेश क्या जवाब देता। बस हंसकर टाल गया। वह उसे बहुत चाहता था, और कभी उसे धोखा नहीं दिया था। कहीं किसी महिला द्वारा एसएमएस आने की बात सुन वह कोई गलत अर्थ न निकाल ले। वह नहीं चाहता था कि सुनीति को दुख पहुंचे।

जो बात उसे चकित कर रही थी कि प्राइवेट नंबर से मैस्ज करने वाली महिला को उससे कुछ नहीं चाहिए था, वह सिर्फ एसएमएस के जरिए उससे चैट करना चाहती थी। उसने कभी फोन भी नहीं किया, न ही अपना नाम बताया या नंबर दिया। पहले तो उसे संदेह हुआ कि वह कुछ पैसे की मांग कर सकती है या उसे कोई काम होगा, लेकिन ऐसा कुछ नहीं हुआ। रहस्यमय लेकिन रोमांटिक एसएमएस नियमित रूप से मिलते रहे उसे। उसका मन करता कि वह उस महिला से बात करे, या उसके मैसेज का जवाब दे, लेकिन वह अज्ञात ही रही।

आखिरकार, कुछ महीनों बाद, महिला ने कहा कि वह उससे मिलना चाहती है। रितेश का दिल धड़कने लगा। लेकिन वह असमंजस में था, कहीं इस तरह वह सुनीति के साथ बेवफाई तो नहीं करेगा। फिर उसने अपने आपके समझाया, "मैंने कभी कुछ गलत नहीं किया, इसलिए मुझे चिंता नहीं करनी चाहिए। मैं उससे यह जानने के लिए मिलूंगा कि वह कौन है और वह मुझसे क्या चाहती है।"

शाम को, अपना काम जल्दी खत्म कर वह उस रेस्तरां में पहुंच गया, जहां उन्होंने मिलने का फैसला किया था। महिला ने मैसेज में लिखा था वह नीले रंग की ड्रेस पहने होगी, क्योंकि यह रितेश का फेवरेट कलर है। धड़कते दिल के साथ उसने रेस्तरां में प्रवेश किया। नीली ड्रेस पहने एक महिला कोने की टेबल पर बैठी थी। उसकी पीठ उसकी तरफ थी। उसके बाल पीठ पर लहरा रहे थे। उसने अंदाजा लगाया कि वह अवश्य ही बहुत खूबसूरत होगी। उसकी सांसे तेज-तेज चल रही थीं, उसे ऐसा लग रहा था मानो पहली बार किसी से महिला से मिल रहा हो। उसे सुनीति के साथ अपनी डेट याद आने लगी। मन में ख्याल आया कि कितने दिन हो गए हैं उसे और सुनीति को साथ घूमे, प्यार भरे पल बिताए। फिर ख्याल झटक दिया उसने। अभी केवल इस महिला पर फोकस करना है। वह ठीक उसके सामने जाकर खड़ा हो गया। वह कुछ बोलने ही वाला था की अचानक हड़बड़ा गया। सुनीति वहां बैठी मुस्करा रही थी। नीले रंग की ड्रेस में वह बहुत ही खूबसूरत लग रही थी। ओह! कितने दिनों बाद उसने ध्यान से उसे देखा था। केक सामने रखा था। "हैप्पी एनिवर्सरी रितेश, बेशक उसे बीते दो महीने हो गए हैं, लेकिन उससे क्या? मायने तो सिर्फ प्यार रखता है! वैसे कल तुम्हारा 40वां जन्मदिन भी है, माई लव, तो दोनों खुशियां एक साथ मना लेते हैं। मनाओगे न, अपनी एसएमएस लेडी के साथ?"

रितेश ने सुनीति को कुर्सी से उठाया और बांहों में भर लिया।

- सुमना. बी

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