E-इश्क:शायद प्यार रहा ही न हो, क्योंकि जहां प्यार होता है वहां उम्र कभी आड़े नहीं आती

7 महीने पहले
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डांस एकेडमी से वापस आकर प्रिया ने देखा घर जैसा बिखरा छोड़ गई थी, उसी तरह पड़ा है। लगता है काशीबाई आज फिर नहीं आई। उसने गैस पर चाय का पानी चढ़ाया, कड़क चाय बनाकर तसल्ली से पी, फिर फुल वॉल्यूम में म्यूजिक ऑन कर सफाई करने में जुट गई।

म्यूजिक और क्लासिकल डांस दो ही प्रिया के शौक रहे हैं। कत्थक, भारतनाट्यम और इंडियन क्लासिकल में मोटी-मोटी डिग्रियां लेने के बाद वह अपने शौक को भरपूर जीना चाहती थी, लेकिन हमेशा मन चाहा कहां मिलता है। जिंदगी के 28 साल पूरा करते करते मां-बाबूजी ने शादी के लिए प्रेशर बनाना शुरू कर दिया था। जब भी डान्स एकेडमी से वापस आती तो उनका ‘शादी कर लो’ का रिकॉर्ड शुरू हो जाता और वह इरिटेट हो जाती। शादी कर के घर बसाने का उसका कोई प्लान नहीं था, उसकी विश लिस्ट में उसे बस डान्स में कुछ ऐसा कर दिखाना था जो शायद अभी तक किसी ने न किया हो।

अपने सपनों को अंजाम देने लखनऊ से मुंबई आ गई और पिछले छह महीनों से इस किराये के फ़्लैट में अकेली रह रही है। मुंबई की टॉप डान्स एकेडमी से मिले अच्छे ऑफर की वजह से उसने लखनऊ छोड़ दिया था। प्रिया के दिन की शुरुआत रोज डांस की ताल पर थिरकते हुए होती और घंटों फुल वॉल्यूम पर उसका रियाज चलता।

आज का दिन भी वैसा ही। तभी प्रिया के दरवाजे की घंटी बजी, “कौन सुबह-सुबह डिस्टर्ब करने चला आया है,” बड़बड़ाते हुए वह दरवाजे तक गई। दरवाजा खोला तो सामने एक छह-सात साल का बच्चा खड़ा था। “आंटी, प्लीज म्यूज़िक का वॉल्यूम थोड़ा कम कर लीजिए।” उस बच्चे के आंटी कहने से प्रिया चिढ़ गई थी। बच्चा झटपट सीढ़ियां उतर गया।

प्रिया ने अपनी ही धुन में म्यूज़िक और तेज कर दिया, तभी डोर बेल फिर से बजी। दरवाजा खोलते ही उसका मुंह खुला का खुला रह गया। सामने 35-40 साल की उम्र का शख्स खड़ा था।

“जी मैं कल रात को ही आपके नीचे वाले फ्लोर पर शिफ्ट किया हूं, पूरी रात सामान लगाने में बीत गई और अब थोड़ी देर सोना चाहता हूं, तो अगर आपको कोई तकलीफ न हो तो म्यूज़िक का वॉल्यूम थोड़ा कम कर लीजिए प्लीज।” प्रिया ने म्यूज़िक बंद कर दिया और सोफे पर आकर बैठ गई। उस शख्स की आवाज अभी तक उसके कानों में गूंज रही थी। प्रिया सोच में पड़ गई, पहले वह बच्चा अब यह आदमी, क्या घर में कोई फीमेल नहीं है। कुछ समय बाद प्रिया उठी और एकेडमी जाने को तैयार होने लगी, लेकिन उसका मन न जाने क्यों उस शख्स को देखकर आज अंदर से खुश था। उसके होंठ बेवजह ही मुस्कुरा रहे थे, मन में विचारों की उठापटक चल रही थी।

सीढ़ियां उतरते प्रिया के पैरो की रफ्तार नीचे वाले फ्लोर पर आते ही रुक गई, वही शख्स खड़ा अपने दरवाजे को ताला लगा रहा था। “तेज म्यूज़िक की वजह से आपकी नींद डिस्टर्ब हुई, उसके लिए सॉरी, एक्चुअली मुझे पता नहीं था कि इस फ्लोर पर कोई रहने आ चुका है, आगे से ऐसी गलती नहीं होगी।” प्रिया कुछ देर जवाब के इंतजार में वहीं खड़ी रही।

वह शख्स सीढ़ियों की तरफ बढ़ ही रहा था कि प्रिया ने टोका, “आपका नाम?” वह बिना रुके सीढ़ियां उतरने लगा और जाते-जाते कहा, “मैं निखिल वर्मा, आपका नया पड़ोसी।” प्रिया ने सोचा अजीब इंसान है, न हाय न हेलो, बस अपनी ही धुन में मगन है, जान-पहचान बढ़ाने की प्रिया की उम्मीदों पर पानी फिर गया था और दिनभर वह उसके बारे में सोचती रही।

शाम को प्रिया लौटी तो कंपाउंड में है बच्चे क्रिकेट खेल रहे थे। प्रिया कानों में ईयर फोन लगाए गाना सुनते हुए गेट तक पहुंची थी कि बॉल आकर उसके हाथ में पकड़े मोबाइल पर लगी और मोबाइल नीचे गिरकर टूट गया और उंगली में भी चोट लग गई।

प्रिया अपना टूटा मोबाइल हाथ में लेकर जब बच्चों की तरफ मुड़ी तो सारे बच्चे डर कर भाग गये, बस एक बच्चा डरा-सहमा हाथ में बैट पकड़े खड़ा था। प्रिया ने उसे गुस्से से घूरा, “अरे तुम तो वहीं हो न, जो कल मेरे घर म्यूज़िक का वॉल्यूम कम कराने आए थे। चलो, तुम्हारी मम्मी से अभी तुम्हारी शिकायत करती हूं।” प्रिया ने उस बच्चे का हाथ पकड़ा और उसके घर ले जाने लगी। डरे सहमे बच्चे ने अचानक जोर-जोर से रोना शुरू कर दिया। बैट पटककर दौड़ता हुआ अपनी बिल्डिंग में घुसा और अपने फ़्लैट की घंटी बजा दी। प्रिया को पास आते देख बच्चे का रोना तेज हो गया। उसी समय निखिल का दरवाजा खुला तो बच्चा दौड़ का उससे लिपट गया।

“चिंटू बेटा क्या हुआ, किसी ने मारा या डांटा?” निखिल के बार-बार पूछने पर उसने प्रिया की ओर इशारा किया, तो निखिल ने दरवाजे के बाहर देखा, उसे हाथ में टूटा मोबाइल और जख्मी उंगली लिए प्रिया नजर आई।

“माफ कीजिएगा मैंने आपको देखा नहीं, क्या आपको मालूम है चिंटू क्यों रो रहा है?” निखिल ने प्रिया से पूछा। प्रिया तो कहीं और ही खोई थी। वह शायद अपने दिल को कोस रही थी, जो बिना जाने समझे एक ऐसे इंसान की ओर खिंचा चला जा रहा था जो एक बच्चे का पिता था और जाहिर है किसी का पति भी होगा।

“आई एम सॉरी, आपका मोबाइल टूट गया, मैं इसे ठीक कर दूंगा। प्लीज आप अंदर आइए, आपकी उंगली से खून बह रहा है। प्रिया सोफे पर बैठी ड्रॉइंग रूम की दीवारों पर सजी ढेर सारी फोटोज को देखने लगी। दीवारों पर अधिकतर फोटो निखिल व चिंटू के ही नजर आए। प्रिया के दिमाग में उलझन सी होने लगी, न चाहते हुए भी उसकी जुबान पर यह प्रश्न आकर फिसल गया “चिंटू आपका बेटा है? आपकी वाइफ...?”

“नहीं है!” निखिल ने दो शब्दों में जबाब दिया।

“आई एम सॉरी, क्या हुआ था उन्हें।” प्रिया निखिल की जिंदगी के पन्ने खंगालने की कोशिश करने लगी। “नहीं-नहीं, जैसा आप समझ रही हैं वैसा कुछ भी नहीं है।” निखिल ने प्रिया की सोच पर रोक लगा दी। पता नहीं प्रिया क्यों निखिल के बारे में सब कुछ जान लेना चाहती थी। यह वह खुद भी नहीं समझ पा रही थी।

“हां, बस एक मिनट रुकिए, मेरे पास एक एक्स्ट्रा फोन है, मैं लेकर आता हूं और चाय भी।” निखिल ने प्रिया को उसका टूटा फोन पकड़ाया और अपना फोन लेने व चाय बनाने चला गया। प्रिया की नजरें घर में पता नहीं क्या तलाश रही थीं। कुछ देर बाद निखिल फोन और दो कप चाय लेकर कमरे में आया। “फोन के लिए थैंक यू, पर चाय तो मैं सिर्फ अपने हाथ की ही बनी हुई पीती हूं। फोन लेकर प्रिया दरवाजे की तरफ़ बढ़ गई, परंतु उसके कदम साथ नहीं दे रहे थे। उसके मन में तरह-तरह के सवाल उठ रहे थे और दिल न जानें क्यों निखिल की ओर खिंचा चला जा रहा था। दो-तीन छोटी मुलाकातों में प्रिया को निखिल सदियों से जाना पहचाना लगने लगा था। कई बार कुछ पल दिल और दिमाग दोनों को बहा ले जाते हैं। विचारों के समंदर में डूबती-उतरती प्रिया सही-गलत को सोचे बिना सपनों में जीने लगी थी।

संडे की सुबह प्रिया देर तक सोती रही, उसकी नींद डोरबेल की आवाज से टूटी, शायद काशीबाई होगी यह सोचकर अलसाई सी उठी और दरवाजा खोला तो सामने निखिल को देखते ही प्रिया की अधखुली आंखों में चमक आ गई।

“अरे आप? गुड मॉर्निग, आइए चाय पीकर जाइएगा।”

“मैं आपका फोन लौटाने आया था।” निखिल ने मोबाइल टेबल पर रखते हुए कहा। “शुक्रिया, चाय तो मैं भी सिर्फ अपने हाथ की बनी पसंद करता हूं।”

ऑफिस जाना है, उससे पहले चिंटू के लिए ट्यूशन टीचर के लिए पेपर में ऐड भी देना है। निखिल वापस जाने के लिये मुड़ा ही था कि प्रिया का स्वर उसके कानों में पड़ा, “यदि आप चाहें तो चिन्टू को मैं ट्यूशन दे सकती हूं।”

फिर चिंटू रोज शाम को प्रिया के पास पढ़ने आने लगा और कुछ ही दिनों में प्रिया के साथ काफी घुल मिल गया। इस बीच चिंटू ने बताया कि उसने अपनी मां को कभी देखा ही नहीं है।

उस रात एक अजीब सी बात हुई। निखिल घर की चाबी ऑफिस में भूल आया। घर लौटा तो कई बार डोरबेल बजाने के बाद भी दरवाजा नहीं खुला। उसने प्रिया को फोन किया, तो पता चला कि चिंटू प्रिया के घर पर ही सो गया है, क्योंकि चिंटू के पास जो दूसरी चाबी थी वह घर के अंदर ही रह गई थी और दरवाजा बाहर से लॉक हो गया था।

चिंटू प्रिया के घर गहरी नींद में सो रहा था। निखिल के जगाने पर भी नहीं उठ पाया।

“ठीक है, मैं भी यहीं टैरेस पर ही सो जाउंगा, वैसे भी इतनी ठंड नहीं है।”

निखिल को नींद नहीं आ रही थी, पता नहीं ठंड के कारण या मन में घुमड़ते प्रिया के बारे में सोचते ख्यालों के कारण। तभी एक आहट से उसका ध्यान टूटा, उसने देखा प्रिया हाथ में चादर लिये खड़ी थी। “ठंड इतनी भी कम नहीं है, इसकी जरूरत पड़ेगी।” चादर पकड़ा कर प्रिया वापस जाने को मुड़ी तभी निखिल ने उसे आवाज देकर रोक लिया।

निखिल टैरस पर बिछी चटाई पर बैठ गया। प्रिया भी उससे कुछ दूरी बना कर बैठ गई।

“आपको कुछ बताना चाहता हूं, चिंटू की मम्मी उम्र में मुझसे बड़ी थीं, हमें प्यार हुआ और घरवालों की इच्छा के विरूद्ध जाकर हमने शादी की। सब कुछ ठीक ही चल रहा था, जब चिंटू आने वाला था तब अचानक सब कुछ बदल गया। शायद वह तैयार नहीं थी इस सब के लिये। अचानक उसे जिंदगी कैद लगने लगी थी। मैंने बहुत समझाया, लेकिन नाकाम रहा। मेरे ऑफिस जाने के बाद एक लैटर छोड़ कर चली गई। लैटर में लिखा था, हमारी उम्र का अंतर हमारे प्यार पर भारी पड़ रहा है।” इतना कह कर निखिल चुप हो गया। लेकिन उस अंधेरे में भी प्रिया उसकी आंखों से झरते आंसुओं को देख सकती थी। उसने निखिल के पास आकर धीरे से उसके कंधे पर हाथ रख दिया।

प्रिया ने चुप्पी तोड़ी, “शायद प्यार रहा ही न हो, क्योंकि जहां प्यार होता है वहां उम्र कभी आड़े नहीं आती।” इतना कह कर प्रिया उसका जवाब सुनने के इंतजार में खामोश रही। “ठंड बढ़ रही है, आज मेरे हाथों की चाय पियेंगे?”

“हां, क्यों नहीं।” प्रिया ने उसकी आंखों में देखते हुए कहा, “अगर तुम चाहो तो ये रोज हो सकता है।” निखिल ने प्रिया की हथेली अपने दोनों हाथों के बीच भींच ली और प्रिया ने भी निखिल के कंधे पर अपना सिर टिका लिया।

- माधुरी गुप्ता

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