मौत के बाद:एक साल पहले मर चुकी नियति सिन्हा ने जब ईशान को नायशा से मिलवाया, तो उसके लिए यकीन करना मुश्किल हो गया

3 महीने पहले
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"अरे ओ अंधी औरत! मरने के लिए मेरी ही गाड़ी मिली है तुझे। चल साइड होकर मर..." पूरी ताकत से ब्रेक लगाकर ईशान चीखा। बमुश्किल होंठों से निकलने वाली गालियों पर भी ब्रेक लगाया।

तूफानी बारिश में सामने बीच सड़क पर एक लड़की दोनों हाथ हिलाकर रुकने का इशारा कर रही थी। ब्रेक लगते ही बिजली की तेजी से आगे बढ़ी और खिड़की बजाने लगी।

"प्लीज लिफ्ट दे दीजिए, इतने खराब मौसम में तीन घंटे में आपकी पहली गाड़ी है। प्लीज मेरी कंडीशन समझिए। अंधेरा होने वाला है," लड़की अपनी विवशता बता रही थी।

ईशान ने सख्ती से स्टीयरिंग पर हाथ जमाए रखे। फिर कुछ सोचकर डोर खोल दिया।

“थैंक्यू, थैंक्यू सो मच!”

ईशान ने उसकी तरफ देखे बिना ही चुपचाप गाड़ी स्टार्ट कर दी।

"कहां जाना है?"

"वहीं, जहां आप जा रहे हैं।"

"देखो, मेरे साथ 'वह कौन थी' वाला भूतिया रोल प्ले करने की जरूरत नहीं। न ही मेरे पास पैसे-वैसे हैं, न ही तुम्हारी ब्लैकमेलिंग या बदनामी का डर है मुझे। कोई ड्रामा करना है तो अभी, यहीं उतर जाओ," ईशान एकदम फट पड़ा।

"अरे नहीं प्लीज, आई एम सॉरी। आपको ऑफेंड नहीं करना चाहती थी। दस किलोमीटर आगे जो ब्रिज है, वहीं तक छोड़ दीजिए प्लीज," लड़की घबरा गई थी।

"यहां क्या कर रही थीं?"

"किसी का इंतजार।"

"और वह आया नहीं। अब ब्रिज से कूदकर मरने का इरादा है। है न…” ईशान के होंठ तिरछे खिंच गए। समझ नहीं आ रहा था, मुस्कान है या कटाक्ष।

"जी आपको कैसे पता? आप कैसे जानते हैं? क्या आप…”

"भूत हैं? आत्मा हैं? बोलो बोलो, बात पूरी करो," अबकी बार ईशान सचमुच हंस पड़ा। उसकी हंसी लड़की को भयानक लग रही थी।

"भूत हैं या सायको किलर, जो भी हैं, मुझे यहीं उतार दें प्लीज,” लड़की एकदम से घबरा गई।

"वाह! अभी तक तो यह होता आया है कि सुनसान जंगल में बरसती शाम में किसी अकेले, भोले, अनजान, अजनबी को रोककर लिफ्ट लेने वाली चुड़ैलें निकलती थीं, या किसी गैंग की मेंबर जो लूटपाट करते हैं। ये नया ट्विस्ट है, कार लेकर लिफ्ट ढूंढता भूत," ईशान को मजा आ रहा था।

"भूत न सही, किडनैपर, मोलेस्टर तो हो ही सकते हैं," लड़की की घबराहट कम नहीं हो रही थी।

"फिर क्यों लिफ्ट ली, इतनी ही सजग, सतर्क, जागरुक नागरिक हो तो।"

"क्योंकि मरना है बस, डिग्निटी से।"

"डिग्निटी, हुंह! तुम जानती हो न, प्रेम आत्मसम्मान की कड़ी परीक्षा लेता है। यूं समझ लो, हर पल जिसमें जलील होने की हिम्मत और सब्र हो, बस वह प्यार करे। लेकिन फिर भी कुछ हासिल न हो, तो मरे नहीं तो क्या करे।" ईशान एक पल को भावुक हुआ, फिर दुबारा सख्ती से दांत भींच लिए, जैसे बहुत मुश्किल से खुद को नियंत्रित कर रहा हो।

"सो तो है। आप बताइए, आपको अनजान लड़की को लिफ्ट देते डर नहीं लगा?" लड़की अब कम्फर्टेबल हो चुकी थी।

"नहीं। मुझे अपनी जान जाने का डर नहीं। जब जिंदगी से मोह नहीं रहता तो कोई चीज नहीं डरा सकती। पंजे तुम्हारे उल्टे हैं नहीं, न ही सफेद सूट और बिखरे बालों में खड़ी हो। एलन सोली का ब्लू जम्पसूट पहने और पोनी टेल बांधे कोई चुड़ैल मार्केट में आई नहीं अभी। पैसे-वैसे पास हैं नहीं, यही तो रोना है। दस साल पुरानी होंडा सिटी ही छीनोगी ज्यादा से ज्यादा, और क्या।"

"हम्म… ये भी सही है। इतना प्यार करते हैं आप उससे तो एक बार और ट्राई कीजिए उसे कन्विंस करने की,” लड़की ने कहा।

अगले ही पल फिर सफाई देते हुए बोली, "सॉरी, अगर मैं ज्यादा बोल गई। मेरा इरादा आपको हर्ट करने या पर्सनल लाइफ पर कमेंट करने का नहीं था।"

"सॉरी की क्या बात है इसमें। पर्सनल क्या, अब तो लाइफ ही नहीं चाहिए।

रही बात एक बार और की, तो ऐसा है, पहली बार भी ट्राई नहीं किया है अब तक। क्योंकि सचमुच बहुत प्यार करता हूं उससे। उसके लिए जो रिश्ता आया है, बहुत अमीर लड़का है, उसे बहुत खुश रखेगा। इसीलिये मैंने अपने दिल की बात बताई ही नहीं। अगर वह मान भी गई, जिसकी उम्मीद भी है, क्योंकि पसंद तो मैं भी हूं उसे, फिर भी मैं उसे वह सब खुशियां नहीं दे पाऊँगा, जो उसका हक है,” ईशान की आंखें डबडबा गईं।

"क्या पैसे से खुशियां खरीदी जा सकती हैं? क्या पैसा ही सबकुछ है?" लड़की ने सवाल किया।

"पैसा सबकुछ नहीं होता, यह बात तब सुनने में अच्छी लगती है, जब आपके पास अथाह पैसा हो," ईशान मुस्कुराया।

"हम्म… तो क्या आप एक भाग्यवादी कायर नहीं हैं? बिन कोशिश किए हार मान लेने वाले?" लड़की ने सीधा सवाल किया।

"बहुत प्रैक्टिकल हूं। इतने कम समय में इतना नहीं कमा सकता। कायर हूं तो हूं, उसके बिन जी भी तो नहीं सकता। अब ये बताओ, तुम्हारी स्टोरी क्या है। मेरे खयाल से तो हम दोनों ही हैं अब एक दूसरे को जज करने वाले, तो तुम ईमानदारी से बता सकती हो।"

"मेरे पास अथाह दौलत है। मुझे जिससे प्यार है, उसे लगता है कि मैं अपने स्टेटस के दम पर उसे खरीदना चाहती हूं। उसे अपने पर, अपने प्यार पर बिल्कुल भरोसा नहीं है, बिल्कुल तुम्हारी तरह। और पता है, जब हीनभावना से ग्रस्त कोई इंसान हमारे जीवन में आता है, तो वह अपनी असुरक्षाओं से हमें धीरे-धीरे मारने लगता है। उसके शब्द तीर जैसा बींध डालते हैं। उसकी हरकतें जीवन से मोह-भंग कर देती हैं।

अगर किसी के लिए हर समय उपलब्ध रहो तो वह हमें टेकन फॉर ग्रांटेड लेने लगता है। किसी को ज्यादा जान जाओ तो तिलिस्म टूट जाते हैं। मोहभंग हो जाता है।

फिर किसी नए की तलाश में निकल पड़ते हैं। हार्ड नट टू क्रेक वाली कोई। फिर उसे तोड़कर किसी और की तलाश में।

और हम सोचते रहते हैं कि एक दिन उसे एहसास होगा कि हमारा प्यार सच्चा है, निस्वार्थ है, हमसे ज्यादा कोई उसे नहीं चाहता।

लेकिन जब वह दिन नहीं आता, तो हम सोचते हैं खुद को खत्म कर लें, तब उसे हमारी कद्र पता चलेगी। वह हमारी याद में रोएगा-तड़पेगा।

काश! यह समझ आ जाए कि यह सबसे गलत फैसला था। जब हम ही नहीं रहे तो कोई कुछ भी करे, क्या ही फर्क पड़ जाएगा। मरने से सब ठीक नहीं होता, बस हमारे लिए सब खत्म हो जाता है।

हमारा दुख और त्रास हम हमारे अपनों को ट्रांसफर कर देते हैं, जो हमसे सचमुच सबसे ज्यादा प्यार करते हैं, वे हमारे कारण सबसे ज्यादा कष्ट भोगते हैं," लड़की की आवाज में एक ठहराव था। कहीं से भीगी, भावुक या लड़खड़ाहट भरी नहीं थी।

"हम्म, तो जब इतनी ही ज्ञान-माता हो तो मर क्यों रही हो?” ईशान कंफ्यूज था।

"यह मेरी नियति है। पर तुम्हारी नियति बदल सकती है, अगर तुम्हारा प्यार सच्चा है तो," कहकर वह लड़की हल्के से मुस्कुराई। ईशान की पॉकेट से उसने पेन निकाला।

"यह उसी ने गिफ्ट किया है, इसलिए हमेशा लगाए रखते हो?"

"हां!”

लड़की ने ईशान की हथेली पर 3 दिल बना दिए।

"फोन ऑन करो अपना।"

"नहीं।"

"करो अभी। मैं कह रही हूं न।"

उसकी आवाज में कुछ ऐसा था कि ईशान को फोन ऑन करना ही पड़ा। लगातार एक के बाद एक दस मैसेज नायशा के आए थे। ‘कहां हो, कहां चले गए, फोन क्यों ऑफ है, जरूरी बात करनी है, कॉल मी…’

मैसेज डिलीवर होते ही नायशा की कॉल आने लगी।

ईशान ने पिक की।

"ईशान, मैं तुम्हारे बिना नहीं रह सकती, बचपन से चाहती हूं तुम्हें। कब से इंतजार कर रही थी कि तुम यह बात मुझसे कहो। मेरे लिए रिश्ते आ रहे हैं इसलिए मजबूर होकर तुमको कॉल करना पड़ा। क्या तुम भी मुझसे प्यार करते हो? जानती तो हूं, पर तुम्हारे मुंह से सुनना चाहती हूं।"

ईशान से कुछ कहते नहीं बन रहा था।

"ठीक है, मैं तुम्हारे जवाब का इंतजार करूंगी। लव यू। बाय।"

फोन कट चुका था।

"अब क्या सोचा है?” लड़की मुस्कुरा रही थी।

"बात तो वही है न अभी भी।"

"प्यार बार बार दस्तक नहीं देता। दरवाजा खोल दो।"

बात पूरी करते ही लड़की ने ब्रिज से छलांग लगा दी।

ईशान हकबकाया सा खड़ा रह गया। तेज बारिश, नदी का बहाव, कुछ देखना संभव ही नहीं हो रहा था। न जाने कब तक वह ऐसे ही खड़ा रहा।

जब उसे होश आया, वह हॉस्पिटल में था और नायशा उसका हाथ पकड़े बैठी थी।

"वह लड़की, वह कूद गई, वह मर गई…”

ईशान बड़बड़ाए जा रहा था। थोड़ा ठीक होने के बाद उसने पुलिस को घटना की जानकारी दी। जरूरी फॉरमैलिटी पूरी की।

ईशान यह देखकर हैरान था कि इतनी बारिश में भीगने के बाद भी वे 3 दिल उसकी हथेली पर ज्यों के त्यों बने हुए थे।

"ईशान, मुझसे वादा करो, कभी अपनी जान लेने की कोशिश नहीं करोगे," नायशा रोए चली जा रही थी।

“हां, मैं वादा करता हूं। अब कभी एस्केप रूट नहीं तलाश करूंगा।"

आश्चर्यजनक रूप से उसकी हथेली पर बना एक दिल फौरन गायब हो गया।

"मैं तुम्हारा जवाब जानना चाहती हूं,” नायशा की बेचैनी कम नहीं हो रही थी।

"हां, मैं भी चाहता हूं तुम्हें। लेकिन अभी शादी की नहीं सोच सकता।"

"चलेगा, मुझे कोई जल्दी नहीं" कहकर नायशा ने खुशी से उसे चूम लिया और बाहर निकल गई।

ईशान की हैरत का ठिकाना न रहा, जब उसी समय दूसरा दिल भी गायब हो गया।

"सर, हमारी फर्म को एक कंपनी खरीदना चाहती है। पांच करोड़ ऑफर किए हैं। सीईओ आप ही रहेंगे।" ऑफिस से कॉल आते ही उसे दूसरा झटका लगा। लॉस में चल रहे किसी आईटी फर्म को कोई इतने महंगे दामों में क्यों खरीदना चाहेगा।

"सर उन्हें अर्जेंटली रिप्लाई चाहिए। क्या ऑफर आपको मंजूर है?"

"हां, बिल्कुल मंजूर है। जल्दी से मीटिंग फिक्स करो। कौन खरीदना चाहता है, मैं जानकारी ले लूं पहले।"

"सर नियति सिन्हा ग्रुप ऑफ कंपनीज।"

"ठीक है, मैं रिसर्च करता हूं। तुम भी होमवर्क करो इस पर। हैव अ गुड डे।"

गूगल पर नियति को सर्च करते ईशान के हाथ तब कांप गए, जब उसने उसी लिफ्ट वाली लड़की का फोटो देखा, जिसका नाम तक उसे नहीं पता था और पढ़ा कि पिछले साल बरसात की ऐसी ही तूफानी रात को नियति सिन्हा की कार उसी ब्रिज से टकराकर रेलिंग तोड़ती हुई उसी नदी में समा गई थी। डेड बॉडी अगले दिन मिली थी।

आंसुओं से धुंधली आंखों से उसने देखा, हथेली से तीसरा दिल भी अब गायब हो चुका था।

- नाज़िया खान

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