जी नहीं पाऊंगी:राहुल ने जब रोहिणी से दूरी बना ली तो उसे गलती का एहसास हुआ, लेकिन तब तक देर हो चुकी थी

22 दिन पहले
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राहुल की शादी? तो राहुल ने सकीना से शादी करने का मन बना ही लिया। रोहिणी का हाथ अनायास ही अपने सीने पर चला गया और वह तेज होती धड़कनों को संभालती धम से बिस्तर पर बैठ गई। उसके छोटे से वीडियो कार्ड की सुंदरता के चर्चे पूरे ग्रुप पर थे और रोहिणी की उंगलियां उस पर क्लिक करने को तैयार ही नहीं हो रही थीं।

पर क्यों हो रहा है उसके साथ ऐसा? क्या उसे राहुल के शादी कर लेने के निर्णय पर अफसोस हो रहा है? कौन सा तंतु बंध गया है उसके दिल के साथ जो न दिखाई देता है, न ही अपने होने के एहसास से मुक्ति देता है। पतंग का मांझा होता है न! बिल्कुल वैसा ही बंधन है उसके और राहुल के दिल के बीच।

सातवीं कक्षा में थी जब उसकी कक्षा में राहुल नाम का नया बच्चा आया था। वो भी जुलाई में। मॉनीटर होने के नाते टीचर ने राहुल का पिछला काम कराने और स्कूल के बारे में समझाने आदि की जिम्मेदारी उसे सौंपी थी। पढ़ाई के साथ-साथ हर गतिविधि में सबसे आगे रहने वाली रोहिणी बहुत कम बोलती थी।

ऐसे में जब रोहिणी को सिर्फ अपनी ड्यूटी के कारण राहुल से बात करनी पड़ती तो उसकी बेसिर-पैर की बातें उसे और चिढ़ा देतीं। जब से राहुल की यादें हैं, बस लड़ने की ही हैं। बेबाक, बिंदास, हंसोड़ और बहिर्मुखी राहुल को पहली ही मुलाकात में उसने ‘यूजलेस फेलो’ का तमगा दे दिया था। किस्मत ऐसी कि स्कूल के बाद कॉलेज और फिर जॉब में भी न राहुल ने उसका पीछा छोड़ा और न उसकी बेसिर-पैर की बातों ने।

लेकिन क्या वाकई राहुल को दिया ‘यूजलेस फेलो’ का तमगा उस पर सही बैठता था? बिल्कुल नहीं। तो क्या उसने राहुल को पहचानने में देर कर दी? रोहिणी की आंखों से नदी बह निकली।

कितनी अपसेट हो गई थी जब दसवीं के प्री-बोर्ड से पहले टायफायड हो गया था। राहुल रोज उसके घर आकर स्कूल का पूरा काम भरसक उसे बाताता ही नहीं था, जो वह कहती वो उसे पढ़कर सुनाया भी करता। रिजल्ट आया तो उसकी परसेंटेज चार प्रतिशत गिरकर सिर्फ नाइंटी सिक्स रह गई थी और राहुल की परसेंटेज में दस प्रतिशत बढ़ोत्तरी हो गई थी।

पहली बार साठ प्रतिशत अंक लाकर उसका क्रेडिट उसे देने राहुल चॉकलेट लेकर उसके घर आया था, पर गुस्साई रोहिणी ने चॉकलेट फेंक दी। क्या बोलती रही, ये तो याद नहीं, पर उसके जाने के बाद पहली बार मम्मी ने डांटा था, “जिसका एहसानमंद होना चाहिए, तुम उससे इस लहजे में बात करती हो? इतना घमंड अच्छा नहीं, एक दिन बहुत रुलाएगा तुम्हें।”

पर अपने घमंड में चूर रोहिणी को न कोई नसीहत कभी समझ आई और न ही राहुल के प्यार के अटपटे इजहारों से कभी उसका दिल पसीजा। हां, इतना जरूर हुआ कि बोर्ड में राहुल की मदद का एहसान उतारने के लिए उसने राहुल को कंबाइन स्टडी के लिए अपने ग्रुप में आने की इजाजत दे दी थी।

सब जानते थे कि राहुल सिर्फ रोहिणी के साथ के लिए, उसे एकटक निहारते रहने के लिए उससे बात करने का अवसर पा जाने के लालच में आता है। कॉलेज के दूसरे रिलेशनशिप में पड़े कपल्स की तरह उनका साथ भी बाकियों के मुफ्त का मनोरंजन था।

बोर्ड में भी राहुल की परसेंटेज अच्छी आ गई। तभी उसे ओलंपियाड के लिए कुछ ऐसी बुक्स की जरूरत पड़ी जो लोगों के बताए अनुसार सिर्फ पुरानी किताबों की पटरी मार्केट में मिल सकती थीं। एक किलोमीटर में फैले पटरी मार्केट में किताब विशेष ढूंढ़ना कूड़े के ढेर में सुई ढूंढ़ने जैसा था।

रोहिणी सोच ही रही थी कि क्या करे। तभी कैंटीन में राहुल ने रोहिणी के लिए आकाश से तारे तोड़ने वाला फिल्मी डोयलॉग अपने सुंदर अभिनय के साथ रूमानी अंदाज में बोला और रोहिणी ने तिरछी मुस्कान के साथ अपनी फरमाइश उसके सामने रख दी।

राहुल ने दूसरे ही दिन आकाश और तारे बने गिफ्ट-रैपर में लपेटकर घुटनों पर बैठकर किताबें उसे पेश कर दीं। रोहिणी ने फिर एहसान झटकने के अंदाज में उसे साथ पढ़ने की इजाजत दी।

अब तो राहुल उसकी सभी व्यावहारिक समस्याओं का समाधान बन गया और वो उसकी ट्यूटर। राहुल का प्यार जताना और उसका झिड़ककर मना करना भी साथ-साथ चलता रहता।

कॉलेज में उसने मैथ्स ली और राहुल को ह्यूमैनिटीज के सबसे कम कट-ऑफ वाले सब्जेक्ट्स में एडमिशनमिल ही गया। जिस कंपनी में उसे रिसर्च एंड डेवलपमेंट में काम मिला राहुल भी वहीं डेटा ऑपरेटर हो गया। कॉलेज के ग्रुप ने उनकी लड़ाइयों को लवफाइट का नाम दे दिया था। सब यही समझते थे कि वे रिलेशनशिप में हैं।

सावन और शीरीन की लव-स्टोरी मुकम्मल हुई और उन्होंने पार्टी दी। कॉलेज के ग्रुप की हंसी-ठिठोली पीक पर थी कि राहुल के रूमानी डॉयलॉग पर रोहिणी ने उसे बुरी तरह झिड़क दिया, “ग्रो-अप राहुल, रिलेशनशिप के लिए बराबरी होनी चाहिए।”

“बराबर नहीं पूरक होने चाहिए जीवन-साथी,” राहुल तपाक से बोला और आदतानुसार फिल्मी अंदाज में घुटनो पर बैठकर बोलता ही गया, “तो क्या हुआ जो तुम्हारी सैलरी मेरी सैलरी की दस गुना ज्यादा है। तो क्या हुआ जो....”

सब उसकी बातें उत्सुक मुस्कान के साथ सुनने लगे और रोहिणी की चिढ़ती जा रही थी। “...तुम रिसर्च करोगी और मैं तुम्हारे फैक्ट्स कंपाइल करके डेटा बनाउंगा। तुम गाड़ी खरीदोगी और मैं ड्राइवर बनकर तुम्हें तुम्हारी मंजिल पर पहुंचाऊंगा। तुम घर खरीदोगी और मैं उसे तुम्हारी ख्वाहिशों जैसा सजाने के लिए सारे कंट्रैक्टरों से निपटूंगा। तुम नौकर रखोगी और मैं उन्हें मैनेज करूंगा...”

अचानक रोहिणी फट पड़ी और जाने क्या-क्या सुनाने के बाद बहुत समय बाद फिर उसकी जुबान पर घमंड आ बैठा, ‘यूजलेस फेलो’ शब्द का हथौड़ा मारकर रोहिणी वहां से चली गई।

कभी उसकी बातों का बुरा न मानने वाले राहुल ने उस दिन से उससे दूरियां बना लीं और सकीना के साथ दिखाई देने लगा। उसके दूर होने के बाद धीरे-धीरे रोहिणी को उसके प्रति अपनी भावनाएं समझ में आना शुरू हुईं और आज..?

तभी दरवाजे पर दस्तक से उसका ध्यान टूटा। कॉलेज का पूरा ग्रुप था। उसकी सूजी पलकें किसी से छिपी न रह सकीं।

“अरे, तुझे तो खुश होना चाहिए कि तेरा पीछा छूट रहा है,” रायना ने शुरू किया तो सब उसे छेड़ने लगे जब तक वह चीख न उठी।

तभी सकीना आ गई। रोहिणी ने बेमन से मुबारकबाद दी, तो सकीना ने कहा, “मुझे किस बात की मुबारकबाद दे रही हो?”

रोहिणी के आंसू थमे नहीं थे। “शादी की और किसकी?”

तिरछी मुस्कान के साथ सकीना ने कार्ड पर क्लिक कर दिया। अरे ये क्या? इसमें तो उसका नाम है! तभी राहुल आ गया और रोहिणी आंसू, चिढ़, गुस्से के साथ मुस्कान और तृप्ति लिए दोनो मुट्ठियां भींचकर उसके सीने पर मुक्के जमाने लगी।

रोहिणी ने उसके सीने में अपना चेहरा छिपाते हुए कहा, “फिर कभी ऐसा मजाक मत करना। तुम मेरी लाइफ के सबसे ‘यूजफुल पर्सन’ हो। मैं तुम्हारे बिना जी नहीं पाऊंगी।”

- भावना प्रकाश

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