तुम्हारा प्यार सजा है:नीलेश जब भी उसके शरीर को छूता केतकी को चिढ़ होने लगती, वह इससे बचने का रास्ता तलाशने लगी

10 दिन पहले
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“तुम बहुत सुंदर हो,” नीलेश, केतकी के कान में फुसफुसाते हुए बोला।

“मैं तुमसे बहुत प्यार करता हूं, बहुत-बहुत प्यार।” केतकी को उसने कसकर बांहों में जकड़ा कि वह कसमसा उठी। वह जानती है कि नीलेश उससे बहुत प्यार करता है, लेकिन उसका प्यार कभी-कभी उसे बंधन लगने लगता है। उसे महसूस होता है तब कि वह उसे जकड़े हुए है। प्यार तो उड़ने के लिए पंख और खुला आसमान छूने की आजादी देता है, पर उसका बस चले तो वह केतकी को खिड़की खोल आसमान भी न देखने दे।

“मैं सुंदर हूं, इसलिए तुम मुझसे प्यार करते हो। यह बात मैं जानती हूं,” उसकी बांहों की कैद से स्वयं को छुड़ाते हुए वह बोली। उसका दम घुटता है अब नीलेश की बांहों में। प्यार नहीं, बल्कि वह उसके मालिक होने का एहसास कराता है। जैसे कि वह कोई बंधुआ मजदूर हो।

“तुम कितनी बार बता चुके हो कि बहुत सारी लड़कियों को रिजेक्ट करने के बाद तुमने मुझे पसंद किया था। हर लड़की में तुम्हें कमी नजर आती थी, न जाने मैं कैसे पसंद आ गई। हालांकि मुझमें भी तुम दिन-रात कमियां गिनाते रहते हो।” केतकी के मन कर रहा था कि वह नीलेश से कहे कि वह खुद अपनी कमियों पर कभी ध्यान नहीं देता। पर चुप रही।

कहां कुछ बोल पाती है? बोलेगी तो वह मार-पीट पर उतर आएगा, गालियां देने लगेगा। उस क्षण जब वह क्रोध में पागल होता है तो कितना वीभत्स लगता है! वह सुंदर है, स्मार्ट है और बहुत गोरा भी। काले घने बाल हैं, चेहरे की गढ़न ऐसी है कि उसे देखते रहने को मन चाहता है। इस बात का उसे अभिमान भी है और फिर जो विदेश से उच्च शिक्षा पाकर आया हो, जिसका इतना मोटा पैकेज हो, उसके भीतर सुपीरियरटी कांप्लेक्स आना स्वाभाविक होगा, ऐसा उसकी मां उससे कहती है और चुप रहने की सीख देती है। लेकिन उसका वही सुंदर चेहरा तब कुरूप लगने लगता है जब केतकी सवाल करने लगती है।

वह जानती है कि उससे शादी नीलेश ने उसकी सुंदरता की वजह से की है। पढ़ी-लिखी वह भी है। नौकरी भी करती थी, लेकिन नीलेश की शर्त थी कि वह शादी के बाद नौकरी नहीं करेगी। नीलेश का कहना है कि उससे शादी कर उसने एहसान किया है। शायद ठीक ही कहता है, क्योंकि उसके पिता की आर्थिक स्थिति ऐसी नहीं थी कि वह बेटी के ब्याह के लिए दहेज जुटा सकें या किसी संपन्न घराने में उसका रिश्ता कर सकें। शादी के बाद वह उसके पिता की किसी न किसी बहाने से बेशक धन से मदद करता रहता है, लेकिन केतकी को नौकरी नहीं करने देता। नौकरी क्या, वह तो उसका घर से बाहर जाना भी पसंद नहीं करता।

शादी के बाद केतकी नीलेश के इस पजेसिवनेस को प्यार ही समझती थी, पर अब वह खुद को जंजीरों से बंधा महसूस करती है। नीलेश का प्यार अजीब है, वह नहीं चाहता कि कोई उसे देखे, उसकी खूबसूरती की तारीफ करे। वह अपने दोस्तों को घर नहीं बुलाता, उसे बाहर पार्टियों में नहीं ले जाता। अगर कहीं जाना पड़ जाए तो हर समय उसका हाथ पकड़े रहता है। यहां तक कि घर के बाहर टहलते हुए उसका हाथ पकड़े रहता है। लोगों को लगता है कि कितना केयरिंग और प्यार करने वाला पति। वह जानती है कि नीलेश के लिए वह उसकी जागीर की तरह जिसे वह हमेशा अपने पास चाहता है।

वह अकेली कहीं नहीं जा सकती। उसकी सारी फ्रेंड्स छूट गई हैं। मायके जाती है तो साथ नीलेश होता है।

“सुंदरता से तो हर कोई प्यार करता है,” नीलेश ने उसकी बात का जवाब देते हुए बेवजह ठहाका लगाया। “तुम मेरी हो, सिर्फ मेरी। तुम्हें तो इस बात से खुश होना चाहिए। आखिर कौन-सी सुख-सुविधा मैंने तुम्हें नहीं दी है। ऐशो-आराम की जिंदगी है। हर चीज लाकर देता हूं। न जाने क्यों कुढ़ती रहती हो? इस तरह रहोगी तो रूप-लावण्य सब नष्ट हो जाएगा।” केतकी के गालों पर उसने बेशर्मी से चिकोटी काटी।

“प्यार एक एहसास है, सुंदरता से उसका कोई मतलब नहीं है,” वह चिढ़ते हुए बोली।

“है क्यों नहीं? जब मैं तुम्हारे रेशमी जिस्म को छूता हूं तो उस हर पल का मजा लेता हूं। तुम्हारे कोमल शरीर पर मेरी अंगुलियां जब फिसलती हैं तो लगता है कि मैं किसी धुन को बजा रहा हूं। गजब की चीज हो तुम केतकी। इसीलिए तो तुम पर मरता हूं।”

नीलेश के शब्द केतकी के मन पर हथौड़े की तरह पड़ रहे थे। बेडरूम में वह उसके लिए मात्र एक जिस्म है, तभी तो उसकी छुअन से केतकी को लगता है मानो असंख्य कीड़े उसके शरीर पर रेंग रहे हैं। उसकी अंगुलियों का स्पर्श उसे एक लिजलिजे एहसास से भर देता है। वह निस्पंद लेटी बस उसे अपने ऊपर हावी होते देखती रहती है।

कैसे कर सकता है कोई ऐसे इंसान से प्यार? वह उसे अपने से दूर करने की कोशिश करती है तो वह उसे और जकड़ लेता है मानो सांप ने अपनी केंचुल कस दी हो और धमकाता है कि अभी उसकी मां को फोन कर बता देगा कि उनकी बेटी उसके साथ कैसे सुलूक करती है। वह नहीं चाहती कि उसके मां-पिता परेशान हों, इसलिए बेजान सी लेटी रहती है।

अपने मां-पिता के कारण वह कहीं भागकर जा भी नहीं सकती। न जाने तब नीलेश उनके साथ कैसा व्यवहार करे। कई बार उसका मन किया कि आत्महत्या कर ले, लेकिन नहीं कर पाई। वह अब ही कौन-सा जी रही है? हर रात तो उसका मर्डर होता है, बिस्तर पर उसकी भावनाओं के साथ खिलवाड़ किया जाता है। उसकी मर्जी पूछे बिना जबरदस्ती की जाती है।

“चाय बनाकर लाती हूं,” वह नीलेश के पास से हटने के बहाने ढूंढती रहती है।

“मुझे नहीं पीनी,” वह उसके होंठों को चूमने के लिए उस पर झुकने लगा।

“मुझे पीनी है,” कहकर वह तेज कदमों से रसोई की ओर बढ़ गई। सिंक का नल खोल दिया उसने ताकि आवाज बाहर न जाए। जोर-जोर से रोने लगी केतकी। शायद ये आंसू ही उसकी नियति हैं। उसकी सुंदरता उसकी सबसे बड़ी दुश्मन बन गई थी। काश! वह सुंदर न होती, काश! उसके पिता गरीब न होते, काश! नीलेश के व्यक्तित्व, पैसे और ओहदेसे उसके पिता प्रभावित न हुए होते, तो आज उसकी इच्छाएं यूं मर न रही होतीं। उसकी भावनाओं को छलनी न किया जा रहा होता।

वह रोज मरती है। बेडरूम में रोज उसे कुचला जाता है। वह इस उम्मीद के साथ कभी नहीं उठती कि कल की सुबह कुछ नया लेकर आएगी। वह जानती है कि रात को जब बिस्तर पर उसकी भावनाओं का मर्डर किया जाएगा तो सुबह बेरौनक ही होगी। नीलेश रोज की तरह घर के बाहर ताला लगाकर जाएगा और रात को आकर फिर उसको एक लाश बना देगा।

वह चीख-चीखकर पूछना चाहती है,“नीलेश, अगर तुम मुझसे प्यार करते हो तो मुझे भी सांस लेने दो, मुझे भी जीने दो। क्यों मेरा दम घोंटते हो?”

“मैं तुम्हारा इंतजार कर रहा हूं। चाय बनाने में क्या इतनी देर लगती है?” नीलेश की आवाज में घुली कड़वाहट और गुस्से को सुन वह कांप उठी।

वह बेडरूम में गई और चुपचाप बिस्तर पर लेट गई और अपनी आंखें बंद कर लीं।

- सुमना. बी

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