E-इश्क:तूने फूल मांगा, ऊपर वाले ने पूरा गुलदस्ता भेज दिया, ये सब स्कूटी पर बैठकर तुझे किस करने आई हैं

6 महीने पहलेलेखक: कमला बडोनी
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अपने दोस्त रोहित की बहन रोली के संगीत में शुभम आ तो गया, लेकिन वहां उसका मन नहीं लग रहा था, वो जल्द से जल्द मुंबई लौटना चाहता था।

रोहित ने उसे छेड़ते हुए कहा, “शुभम, कल लड़की देखने गया था ना, क्या हुआ? लड़की में ऐसा क्या देखा कि उल्टे पांव भागना चाहता है यहां से।” रोहित के साथ सारे दोस्त हंसने लगे।

अब शुभम को गुस्सा आने लगा था। बोला, “प्लीज यार, जले पर नमक मत छिड़को।”

“बता तो सही, हुआ क्या?”

“मत पूछ यार, बड़ी बी टाइप लड़की थी, न कोई क्लास, न कम्पेटिबिलिटी! मैंने मां से पहले ही कहा था, मुंबई में लड़कियों का अकाल है जो जबलपुर जाकर लड़की देखूं। यार, आज की डेट में कोई इतना घोंचू कैसे हो सकता है? झूठ बोलने की भी हद होती है। साफ पता चल रहा था कि घरवालों का सिखाया संस्कारी टेपरिकॉर्डर बजा रही है... 'जी, मैं जॉब इसलिए नहीं करना चाहती, ताकि शादी के बाद ससुराल में सबकी सेवा कर सकूं, मुझे पार्टीज में जाना पसंद नहीं, मैं लड़कों से दोस्ती नहीं करती...' हिप्पोक्रेसी में पीएचडी लग रही थी। मन तो किया मुंह पर ही मना कर दूं, बहुत मुश्किल से खुद को रोक पाया। उनके घर से निकलते ही मैंने मां से कह दिया कि अब मैं किसी बी टाउन लड़की को देखने नहीं जाऊंगा।”

“एक लड़की के लिए सारी बी टाउन लड़कियों की बुराई क्यों कर रहा है? मत भूल कि तू भी इसी शहर में बड़ा हुआ है।” रोहित को उस पर गुस्सा आने लगा था।

“सॉरी यार, मैं कुछ ज्यादा ही बोल गया।”

माहौल को हल्का बनाने के लिए दोनों का दोस्त देवेश बीच में कूद कर बोला, “यार शुभम, ये तो बता तुझे कैसी लड़की पसंद है।”

शुभम समझ गया कि उसने सबका मूड बिगाड़ दिया है इसलिए उसने भी मौके की नजाकत को समझते हुए फिल्मी अंदाज में कहा, “यार, मेरी वाली तो '3 इडियट्स' फिल्म की करीना कपूर की तरह सजी-धजी स्कूटी पर बैठकर आएगी, हेल्मेट उतारेगी और... मुंह खोलकर मत देख... किस नहीं करेगी, पहले मंडप पर मेरे साथ बैठेगी, फिर शादी के बाद ही सबकुछ होगा।”

माहौल हल्का हो चुका था। एक-एक कर सारे लड़के 'अपनी वाली' के लिए अपनी इच्छाओं का पिटारा खोल रहे थे। जैसा कि दोस्तों की बीच होता ही है, लड़की को देखने से लेकर हनीमून तक की सारी बातें डिस्कस होने लगी थीं।

तभी रोली की कुछ सहेलियां स्कूटी लेकर वहां पहुंच गईं। बहन की सहेलियों को देख, रोहित ने शुभम को छेड़ा, “देख, तूने फूल मांगा, ऊपर वाले ने पूरा गुलदस्ता भेज दिया। ये सब स्कूटी पर बैठकर तुझे किस करने आई हैं।”

सारे लड़के एक साथ हंसने लगे।

तभी स्कूटी से वही लड़की उतरी जिसे कल शुभम देखने गया था, लेकिन आज वो बिल्कुल नए अवतार में थी। लॉन्ग स्कर्ट और डेनिम जैकेट में वो लड़की कहर ढा रही थी। एक पल को शुभम का मुंह खुला का खुला रह गया, “क्या ये वही कल वाली सलोनी है?”

उसका मोबाइल नंबर तो था शुभम के पास, लेकिन पहले वो तसल्ली कर लेना चाहता था कि आखिर कल इस लड़की ने संस्कारों का जामा क्यों ओढ़ रखा था।

उसने सलोनी को छेड़ने के लिए व्हाट्सएप किया, “हेलो, मैं छिछोरा इश्क।”

सलोनी के चेहरे पर मुस्कान थी, जैसे वह जानती थी कि शुभम का मैसेज जरूर आएगा।

उसने जवाब में लिखा, “हेलो, मैं जहरीली मोहब्बत।”

“मेरा स्वैग तुम्हें पागल कर देगा।”

“मेरा जहर तुम्हारी जान ले लेगा।”

“अभी-अभी प्यार हुआ है तुमसे।”

“ऐसा मुझे रोज ही होता है।”

“लेकिन मुझे इस बार सच्चा वाला हुआ है।”

“इसका मतलब अब तुम बूढ़े हो गए हो, कोई अपने टाइप की ढूंढ़कर शादी रचा लो।”

“मेरे टाइप की तो तुम ही हो।”

“लेकिन तुम मुझे कल नापसंद कर चुके हो।”

“आज अपनी गलती कबूल रहा हूं। कान पकड़कर माफी मांगने को तैयार हूं।”

“लेकिन मैं तुम्हारी माफी कबूलने को तैयार नहीं।”

“अच्छा बताओ, कल सादगी की ड्रामा क्वीन क्यों बनी थीं?”

“क्योंकि तुमसे शादी नहीं करनी थी।”

“आखिर क्यों?”

“बी टाउन लड़की हूं, तुम्हारी सोच जानती थी।”

“अब सोच बदल गई है, समझ गया हूं कि स्वैग शहर में नहीं सोच में होता है।”

“लेकिन मुझे बदलने में टाइम लगेगा।”

“मैं तुम्हारे बदलने का इंतजार करूंगा।”

“कब तक?”

“आखिरी दम तक।”

“शादी का तो पता नहीं, पर छिछोरे इश्क का साथ अभी अच्छा लग रहा है।”

सलोनी ने मैसेज भेजकर फोन ऑफ किया और बैग में डाल दिया।

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