सौम्या प्रेमी से बोली- मेरे फंडे क्लियर हैं:तुम मेरे लिए इंतजार नहीं कर सकते, तो तुम किसी और से शादी कर लो

2 महीने पहले
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‘‘इस वीकेंड पर तो मिल रहे हैं न हम?’’ रोनित ने मैसेज भेजा।

मैसेज की बीप सुन मैसेज पढ़ तो लिया, पर जवाब देने का उसे टाइम नहीं मिला। बॉस दो बार उसे बुला चुके थे। वह फोन अपने केबिन की टेबल पर ही छोड़ लैपटॉप उठाकर उनके कमरे की ओर बढ़ गई।

मैसेज का जवाब नहीं आया, इसका मतलब है कि सौम्या बहुत बिजी है और हो सकता है अब वह घर पहुंचकर ही मैसेज करे। हालांकि अकसर रोनित ही उसे तब रात को फोन कर लेता था। सौम्या को, उसकी काम की जिम्मेवारियों को वह अच्छे से समझता था। काम को लेकर उसके जुनून और महत्वाकांक्षाओं को भी…

दो साल हो गए हैं उन्हें मिले हुए। दोनों ही जानते हैं कि आगे की पूरी जिंदगी वे एक-दूसरे के साथ ही बिताना चाहते हैं। रोनित से कम प्यार नहीं करती सौम्या, लेकिन प्यार है तो इसका मतलब यह तो नहीं कि काम छोड़कर हमेशा प्रेमी की ही बांहों में झूलते रहो, ऐसा वह हंसते हुए अकसर कहती है। उसकी हंसी की जुंबिश में कैद रोनित चुपचाप उसके इस फंडे को सह जाता है, बिना यह जताए कि इस बात से उसके दिल को चोट पहुंचती है। पर प्यार है तो उसकी सोच को भी तो स्वीकारना होगा, ऐसा वह मानता है।

‘‘वीकेंड पर नहीं मिल पाऊंगी। ऑफिशयल वर्क, जा रही हूं शहर से बाहर और फिर मंगलवार को सिंगापुर के लिए निकलना है। सॉरी, यार। वापस आकर प्लान करते हैं।’’ रोनित उसे फोन मिलाने ही लगा था कि मैसेज आ गया।

‘‘क्यों इस लड़की के चक्कर में पड़ा है? ऐसी लड़कियां मैरिज मैटिरियल नहीं होतीं, सिर्फ कैरियर बनाना ही इनके जीवन का लक्ष्य होता है,’’ रोनित की मां उसे कितनी बार यह बात कह चुकी हैं। उनके इंजीनियर बेटे के लिए क्या लड़कियों की कमी है!

‘‘माना सौम्या अच्छी लड़की है, पर अगर वह अगले पांच साल तक शादी नहीं करेगी तो क्या कुंआरा बैठा रहेगा?’’

‘‘ओह मम्मी, आपको लगता है भाई को कुछ भी समझाने का कोई फायदा है? ही इज मैडली इन लव विद सौम्या।’’ मां को तो कुछ नहीं कहता वह, लेकिन बहन के कान खींच देता है।

सच है कि उसका मन करता है कि सौम्या उसके साथ समय बिताए। काम वह भी करता है, कितने नई ऐप्लीकेशन बना चुका है, पर खुद के लिए समय निकालना जानता है। और सौम्या जब उससे मिलने के लिए कहती है तो अपनी प्रायोरिटी लिस्ट में कभी भी उसे नीचे नहीं रखता।

सिंगापुर से लौटने के बाद, संडे रात वे मिले थे। ‘‘बता नहीं सकता, हाओ मच आई मिस्ड यू,’’ उसने उसके हाथों को कसकर थामते हुए कहा था। वह खुशी से उसके गले लग गई थी और गालों पर चुंबन देते हुए बोली थी, ‘‘आई एम सो हैप्पी रोनित। मुझे नए प्रोजेक्ट का हेड बना दिया गया है। अब तो समझ लो, मेरे पैरों में पंख लगने वाले हैं। मैं बहुत ज्यादा बिजी होने वाली हूं।’’

‘‘तुम्हें नहीं लगता कि तुम बहुत तेज दौड़ रही हो? खाना काने का समय तुम्हारे पास नहीं है, सोती हो तो लैपटॉप खुला रहता है, फोन पर अंगुलियां चलती रहती हैं। तुम्हें तो यह भी याद नहीं होगा कि पिछली बार कब हम दोनों ने साथ समय बिताया था। अपने पेरैंट्स से मिले एक साल हो गया है शायद तुम्हें। चेहरे की नैसर्गिक सुंदरता खोती जा रही हो। मेकअप की परतों में अपने को गुम कर दोगी तो खुद को ही पहचानना मुश्किल हो जाएगा।’’

‘‘रोनित, तुम आज एक टिपीकल पुरुष की तरह बात कर रहे हो। शादी हो गई तो जिम्मेदारियां बढ़ जाएंगी, कैरियर पर भी हो सकता है ब्रेक लग जाए कुछ समय के लिए। यही समय है कैरियर बनाने का और पैसा कमाने का भी…’’ सौम्या उसे हैरानी से देख रही थी।

‘‘मैं तुम्हें कैरियर बनाने से नहीं रोक रहा हूं, बस इतनी तेज गति से भागने की बजाय, थोड़ा धीमा होकर चलन के लिए कह रहा हूं। ताकि तुम जीवन की खूबसूरती को एन्ज्वॉय कर सको। जो पैसा कमा रही हो, उससे मिलने वाले सुख को भी जी सको। मेरे लिए तुम्हारे पास वक्त नहीं है, कोई बात नहीं, पर अपने लिए ही समय निकालो। कुछ देर सिर्फ यूं ही बैठी रहो, न पास में मोबाइल हो, न लैपटॉप, न दिमाग में चलती काम की ता-ता- धिन्ना, बस तुम हो और केवल तुम…भागदौड़ को विराम देकर देखो, बहुत सुकून मिलेगा। आंखें बंद कर बस यूं ही शांत मन से प्रकृति की आवाजों को सुनो… रिलैक्स रहना सीखो, फूलों की खुशबू को अपने भीतर उतारो, ठंडी हवा के झोंको को महसूस करो, हाथ फैलाकर खुद तितली बन जाने के एहसास से मुस्कराओ। नरम घास पर चहलकदमी करो। गहरी सांस लो और जीवन का आनंद उठाना सीखो। हर दिन को जीना चाहिए।’’

‘‘देखो रोनित, बड़ी मुश्किल से तुमसे मिलने का टाइम निकाल पाई हूं। तुम फिलॉसफर बनने की कोशिश मत करो। मुझे ऐसे ज्ञान की जरूरत नहीं। लाइफ में मेरे फंडे क्लियर हैं। तुम अगर मेरे लिए इंतजार नहीं कर सकते, तो मैं तुम्हें किसी और से शादी करने से रोकूंगी नहीं।’’

‘‘मेरे प्यार का मजाक मत उड़ाओ सौम्या। जब तुम्हारे पांव चलते-चलते थक जाएं, जब तुम्हारा मन काम के बोझ से भावनाओं को कुचलने लगे, मैं तब भी तुम्हारा हाथ थाम तुम्हें नरम घास पर चहलकदमी कराने ले जाऊंगा। जानती हो इसके लिए 19 जून को खास दिन भी मनाया जाता है, वर्ल्ड सौंटरिंग डे। यानी बहुत शांत गति से एकदम रिलैक्स रहते हुए धीरे-धीरे चलना।’’

सौम्या, रोनित की बात सुन तो रही थी पर उसकी नजरें मोबाइल पर ही टिकी थीं। रात के साढ़े दस बज गए थे। बॉस के मैसेज आ रहे थे कि वह मेल चेक करे। उसे सुबह आठ बजे की फ्लाइट से मुंबई जाना है।

‘‘चलें क्या?’’ वह उठ खड़ी हुई।

रोनित रास्ते भर चुप ही रहा। उसे घर छोड़ते हुए बस इतना बोला, ‘‘अपना ध्यान रखना।’’

सौम्या के चेहरे पर हमेशा पसरी रहनी वाली थकान उसे दिखाई देती है, इसलिए वह परेशान रहने लगा है। सौम्या क्यों नहीं महसूस कर पा रही है यह सब। खाना खाने का समय नहीं मिलता, इसलिए फूड सप्लीमेंटेस से काम चलाती है, खुद खाना कौन बनाए, इसलिए बाहर से ही खाना मंगवाती है। दो दिन तक उनकी कोई बात नहीं हुई।

सुबह वह ऑफिस के लिए निकल रहा था कि एक फोन आया। ‘‘रोनित मल्होत्रा, मैं मुंबई के पैलेस होटल के रिसेप्शन से बोल रही हूं। हमारे यहां एक गेस्ट ठहरी हुई हैं, मिस सौम्या वर्मा। वह होटल की ल़ॉबी में बैठी हुई थीं कि अचानक उनकी तबियत खराब हो गई। शी इज टोटली लॉस्ट। वह कुछ समझ नहीं पा रहीं, कुछ बोल नहीं पा रहीं। उनके फोन में इमरजेंसी नंबर में आपका नाम था। क्या आप यहां सकते हैं? हमने डॉक्टर बुलाया है और उन्हें उनके कमरे में ले गए हैं।’’

रोनित को एक तेज झटका लगा। वह सौम्या को नहीं खो सकता। वह जब पहुंचा तो सौम्या बिस्तर पर लेटी लैपटॉप पर काम कर रही थी। होटल के डॉक्टर से वह जान चुका था कि अत्यधिक तनाव और रिलैक्स न रहने के कारण ऐसा हो जाता है। मरीज को कुछ पता नहीं चलता कि उसके साथ क्या हो रहा है, क्योंकि कुछ घंटे बाद वह सामान्य हो जाता है। मस्तिष्क में तंत्रिका कोशिकाओं के बीच सामान्य कनेक्शन जब बाधित होता है तो ऐसे दौरे पड़ते हैं।

‘‘हम वापस जा रहे हैं।’’ गुस्से से तमतमाते रोनित के चेहरे को देख सौम्या ने कोई तर्क नहीं किया। बल्कि उस पर ढेर सारा प्यार आया। इतनी चिंता करने वाला कोई कहां मिलता है। और वह है कि उसकी हर बात का मजाक उड़ाती है।

‘‘रोज सुबह वॉक करें और स्लो डाउन,’’ ड़ॉक्टर ने दवाइयां लिखने के साथ यह सलाह भी दी।

‘‘कल से हम रोज सुबह वॉक पर जाएंगे,’’ तुम्हारे घर के पास जो पार्क है वहां तुम्हारा इंतजार करूंगा?’’ रोनित ने उसके गालों को चूमते हुए कहा।

‘‘गुड मॉर्निंग, मैं जानता था तुम आओगी,’’ ताजे खिले गुलाब तो देते हुए रोनित ने मुस्कराते हुए कहा।

थोड़ी देर चलने के बाद उसे थकान महसूस होने लगी तो रोनित ने उससे घास पर आंख बंद कर बैठने के लिए कहा। सौम्या के लिए यह सब बहुत अजीब था। बचपन में वह खूब खेलती थी पार्क में, लेकिन फिर…आंखें बंद करते ही उसे पक्षियों की चहचहाहट सुनाई देने लगी। हवा के झोंके ने धीरे से उसकी लटों को सहलाया, धूप की गुनगुनी तपिश वाली किरणें उसके चेहरे पर पड़ीं तो उसने अपने अंदर एक ऊर्जा महसूस की।

धीरे-धीरे उसे खुद अच्छा लगने लगा पार्क में। बहुत सुकून महसूस कर रही थी वह।

पार्क में जब वह मस्ती से सैर करते, गुनगुनाते, खिलखिलाते लोगों और प्रकृति के ढेर सारे रूपों को देखती तो हैरान होती कि आखिर कैसे वह इन चीजों को आज तक नजरअंदाज करती आई है।

नरम, ठंडी घास पर नंगे पैर चलते हुए उसे लगा कि उसके शरीर में कितनी थकान है। उसका दिमाग में केवल काम की गुत्थियां हैं, उसका मन…वह भी प्यार करना जानता है, फिर कहां गुम हो गया वह? जीवन का आनंद लेना, आराम करना, गुलाब को सूंघना, सुंदर प्रकृति को निहारना, आकाश को देखना….कितना सुकून भरा है।

‘‘मैंने लंबी छुट्टी के लिए अप्लाई कर दिया है।’’ अपने हाथों को फैलाते हुए, उन्मुक्त ढंग से आसमान को देखते हुए वह गुनगुनाई,‘‘ पंछी बन, उड़ती फिरूं मस्त गगन में…’’

‘‘तो फिर शादी का कोई चांस हैं?’’ रोनित ने उसके हाथों में हाथ डालते हुए पूछा।

‘‘सोचती हूं कर ही लूं,’’ वह जोर से खिलखिलाई। उसकी उन्मुक्त हंसी हवा में जा घुली।

- सुमन बाजपेयी

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