60 लाख बच्चों की प्रीमैच्योर डिलीवरी:एयर पॉल्यूशन से गर्भ में पल रहे बच्चे को खतरा, सेफ रखने के लिए अपनाएं ये तरीके...

20 दिन पहलेलेखक: राधा तिवारी
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  • एयर पॉल्यूशन से खतरे में बच्चे
  • बचपन में ही हो सकती हैं अस्थमा और हार्ट से जुड़ी बीमारियां
  • एयर पॉल्यूशन से बच्चों को कैसे बचाएं

कैलिफोर्निया यूनिवर्सिटी की स्टडी में कहा गया कि एयर पॉल्यूशन का असर गर्भवती महिलाओं और उनके होने वाले बच्चों पर काफी खतरनाक ढंग से दिख रहा है। रिसर्च की मानें तो साल 2019 में समय से पहले जन्मे 60 लाख बच्चे दरअसल एयर पॉल्यूशन की देन थी। इस शोध में 204 देशों के आंकड़ों को शामिल किया गया था।

प्री-मेच्योर डिलीवरी का कारण एयर पॉल्यूशन
प्री-मेच्योर डिलीवरी का कारण एयर पॉल्यूशन

प्रदूषण के मामले में भारत में क्या हैं हालात?

दुनियाभर के पॉल्यूटेड शहरों की रैंकिंग में भारतीय शहरों की संख्या बढ़ी है। जहरीली हो रही हवा से हर साल लाखों लोगों की मौत हो रही है। दुनिया के दूसरे शहरों के मुकाबले उत्तर भारत में पॉल्यूशन का स्तर 10 गुना ज्यादा खतरनाक है। वहीं एक डेटा बताता है कि भारत समेत पाकिस्तान और बांग्लादेश में एयर पॉल्यूशन के कारण हर साल 3.49 लाख महिलाएं गर्भपात का शिकार हो रही हैं।

एयर पॉल्यूशन से बचें गर्भवती महिलाएं
एयर पॉल्यूशन से बचें गर्भवती महिलाएं

ये हवा बढ़ा रही खतरा

हवा में प्रदूषण के लिए जिम्मेदार पीएम 2.5 प्रेगनेंसी के दौरान बुरा असर डालते हैं। पीएम 2.5 बेहद बारीक कण होते हैं जो बाल से भी पतले होते हैं, जिसे इंसान नंगी आंखों से देख नहीं सकता। एयर पॉल्यूशन के लिए सिर्फ ट्रैफिक और पावर प्लांट्स से निकलने वाला धुआं और गैस ही नहीं, इनडोर पॉल्यूशन भी जिम्मेदार है।

एयर पॉल्यूशन से बच्चे को खतरा
एयर पॉल्यूशन से बच्चे को खतरा

जन्म के कुछ महीनों के भीतर मौत

विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) का कहना है कि दुनियाभर में हर साल समय से पहले जन्म लेने वाले 10 लाख बच्चों की मौत हो जाती है। ऐसे बच्चे कमजोर होते हैं और इनका वजन भी कम होता है, इसलिए इनमें कई बीमारियों का खतरा हमेशा बना रहता है। अगली पीढ़ी को सुरक्षित रखना है तो वायु प्रदूषण को कंट्रोल करना होगा।

गर्भ पर एयर पॉल्यूशन से क्या है खतरा

ऑटिज्म : हार्वर्ड की स्टडी के अनुसार गर्भावस्था के तीसरे महीने ज्यादा पॉल्यूटेड एयर में सांस लेने से बच्चे में ऑटिज्म का दोगुना खतरा रहता है।

जहरीली हवा से बच्चों में ऑटिज्म होने का खतरा 78 प्रतिशत
जहरीली हवा से बच्चों में ऑटिज्म होने का खतरा 78 प्रतिशत

अस्थमा : प्रेगनेंसी में अस्थमा की वजह हाई ब्लड प्रेशर हो सकता है और लिवर और किडनी में कई तरह की दिक्कत हो सकती है। ये प्रीमैच्योर बर्थ और लो बर्थ वेट का भी कारण बन सकता है।

एयर पॉल्यूशन से लिवर और किडनी में परेशानी
एयर पॉल्यूशन से लिवर और किडनी में परेशानी

मिसकैरेज का खतरा : रिसर्च की मानें तो लंबे समय तक एयर पॉल्यूशन में रहने का संबंध मिसकैरेज से होता है। एयर पॉल्यूशन से महिलाओं और पुरुषों की फर्टिलिटी भी कम होती है।

क्या कहती हैं एक्सपर्ट

कर्नाटक के श्री त्रिनेत्र इंटरनेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ योगिक साइंसेज की प्रीनेटल एक्सपर्ट श्रीललिता अविनाश कहती हैं कि प्रेगनेंसी के दौरान महिलाओं को ज्यादा सतर्क रहने की जरूरत है। पॉल्यूटेड हवा में सांस लेने का असर प्रेग्नेंट महिलाओं पर हो रहा है। इससे प्री-मेच्योर डिलीवरी और बच्चे में कुपोषण की समस्या हो सकती है। इसे टालने की कोशिश करते हुए अपनी डायट पर खास ध्यान दें। केमिकल से बचाव के लिए ज्यादा से ज्यादा ऑर्गेनिक फूड, फल और सब्जियां खाएं। गाय-भैंस में दूध को बढ़ाने के लिए कई तरह के इंजेक्शन दिए जाते हैं, जिसको पीने से गर्भवती में हार्मोनल दिक्कतें हो सकती है। इससे ओवेरियन सिस्ट की भी दिक्कत हो सकती है. तो ऑर्गेनिक मिल्क या रागी मिल्क पी सकते हैं, ये कैल्शियम और प्रोटीन से भरपूर होता है।

प्रीमैच्योर बच्चों की देखभाल कैसे करें:

NICU: नियोनेटल इंटेंसिव केयर यूनिट (NICU) उन बच्चे की विशेष देखभाल करता है , जिन्हें गंभीर स्वास्थ्य समस्याएं हैं। वे बच्चे को सांस लेने, खिलाने और उन्हें गर्म रखने में मदद कर सकते हैं।

कंगारू मदर केयर: यह एक ऐसी तकनीक है, जिसमें लंबे समय तक त्वचा से त्वचा का संपर्क होता है, जिसमें मां शिशु को सीने से लगाकर रखती है।इस तकनीक से मां और बच्चे के बीच एक मजबूत रिश्ता बन जाता है।

कंगारू मदर केयर
कंगारू मदर केयर

इंफेक्शन से बचाएं: प्रीमेच्योर बच्चों में इंफेक्शन का खतरा सबसे ज्यादा होता है इसलिए उनके आसपास का वातावरण पूरी तरह से साफ रखें। बच्चे को इंफेक्शन और एलर्जी से बचाकर रखना महत्वपूर्ण है। बच्चे को सांस लेने में तकलीफ न हो, इसके लिए वेंटीलेशन बैग या मास्क का उपयोग किया जा सकता है।

ब्रेस्टफीडिंग: मां का दूध बच्चे के लिए सबसे अच्छा माना जाता है । इसलिए बच्चे के जन्म के साथ ब्रेस्टफीडिंग कराएं अगर मां के लिए ये मुमकिन नहीं तो बोतल से दूध देते हुए बोतल को संक्रमणरहित करने का पूरा खयाल रखें।

बोतल से दूध देते समय रखें ख्याल
बोतल से दूध देते समय रखें ख्याल

बच्चे की नींद का ध्यान रखें: बच्चे के लिए नींद पूरी होने का पूरा ख्याल रखें,उसके आसपास शोर-शराबा ना हो। बच्चों के कमरे की लाइट हल्की रखें ताकि उसे अच्छी नींद आए।

कमरे का तापमान सही रखें: कमरे का तापमान सही रखें। न वो ज्यादा गर्म हो और न ही ठंडा।

पॉल्यूशन से बचने के तरीके

  • बाहर निकलते हुए एयर पॉल्यूशन से बचने के लिए बढ़िया क्वालिटी का पॉल‍यूशन मास्क पहने।
  • घर के अंदर की हवा को शुद्ध करने के लिए एयर प्यूरीफाइंग गुण वाले पौधे लगाएं, जैसे रबर प्लांट, तुलसी।
  • प्रेग्नेंसी के दौरान योग करने को रुटीन में शामिल करें।
  • प्रेग्नेंसी के दौरान चाय और कॉफी न पियें।
  • खाने के साथ कोई भी खट्टी चीजें खाएं। जैसे, टमाटर , आंवला, धनिया और पुदीने का रोजाना उपयोग करना प्रेग्नेंट वुमन के लिए फायदेमंद होगा।
खाने के साथ कोई भी खट्टी चीजें खाएं
खाने के साथ कोई भी खट्टी चीजें खाएं
  • गुड़ का उपयोग रोज करें। इसमें एंटी एलर्जिक गुण शामिल होते हैं, साथ ही आयरन की भी अच्छी मात्रा होती है।
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