नेशनल एपिलेप्सी डे:भारत में 1.2 करोड़ मिर्गी के मरीज, सेक्स लाइफ पर पड़ता है अजीब असर, झाड़-फूंक नहीं है इसका इलाज

नई दिल्ली9 महीने पहलेलेखक: निशा सिन्हा
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  • हिस्टिरिया और एपिलेप्सी दो अलग-अलग बीमारियां हैं, इसे लेकर कंफ्यूज नहीं हो।

आज भी मिर्गी की पेशेंट की शादियों में दिक्कतें आती हैं लेकिन मेडिकल एक्सपर्ट्स मानते हैं कि सही इलाज से मिर्गी की बीमारी को काबू में किया जा सकता है। अनमैरिड लड़कियों और प्रेग्नेंट वुमन के लिए यह रोग अब टैबू नहीं रहा है।

लड़कियों को आत्मनिर्भर बनाएं, ज्यादा रोकटोक नहीं करें
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मल्टीपल सेक्स पार्टनर के चांसेज भी यह मिथ है कि जिन महिलाओं की शादी नहीं होती है उनमें मिर्गी के दौरे पड़ते हैं। सेक्सुअल डेविएशन पुस्तक के लेखक डॉ. विकास धिकाव कहते हैं कि पुराने समय में ऐसा माना जाता था कि जो लड़कियां सेक्स डिजायर को मन में ही दबा कर रखती हैं, उनको दौरे आते हैं। यह सही नहीं है। इसे कुछ हद तक हिस्टरिया से जोड़ कर देखा जा सकता है क्योंकि वह साइकोलॉजिकल और इमोशनल उतार-चढ़ावों की वजह से होता है। डॉ. विकास के अनुसार, "स्टडीज में यह पाया गया है कि आंशिक एपिलेप्सी (साइकोमोटर एपिलेप्सी ) के कुछ मामलों में सेक्स डिजायर बढ़ने की आशंका होती है। इससे मल्टीपल पार्टनर के चांसेज बन सकते हैं लेकिन ऐसे मामले न के बराबर ही होते हैं। डॉ. विकास धिकाव स्वीकारते हैं कि आज भी गांवों में जागरूकता की कमी की वजह से लोग एपिलेप्सी के इलाज में झाड़-फूंक सहारा लेते हैं जबकि आज सही इलाज मिलने से दौरे की आशंका घटकर केवल 5 प्रतिशत तक ही रह जाती है।"

एक से अधिक सेक्स पार्टनर भी हो सकते हैं
एक से अधिक सेक्स पार्टनर भी हो सकते हैं

मां और बेबी को छू भी नहीं पाएगी यह बीमारी
ज्यादातर चिकित्सकों का मानना है कि विवाह की उम्र में पहुंचने से पहले ही लड़की का सही डॉक्टरी इलाज कराना चाहिए। प्रेग्नेंसी के पहले मिर्गी को कंट्रोल कर लिया जाए, तो किसी तरह की दिक्कत प्रेग्नेंसी में नहीं होती। नई दिल्ली स्थित अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान में न्यूरोलॉजी विभाग की अध्यक्ष डाॅ. मंजरी त्रिपाठी के अनुसार, “प्रेग्नेंसी के सालभर पहले से ही सही दवाइयां शुरू करने से शिशु पर भी बुरा असर नहीं पड़ता। आज ऐसी दवाएं उपलब्ध है, जिनसे गर्भ के समय मां और शिशु को किसी तरह का नुकसान नहीं पहुंचाता है।
पहले 3 महीनों में भ्रूण का आरंभिक विकास हो रहा होता है, लेकिन जागरूकता की कमी के कारण महिलाएं इन शुरुआती महीनों में अस्पताल नहीं जाती। ज्यादातर महिलाएं उस समय अस्पताल आती हैं जब आखिरी महीने चल रहे होते हैं, जब स्थिति में सुधार की गुंजाइश न के बराबर होती है या भ्रूण में कमी आ चुकी होती है। ”

रेगुलर दवाई से इलाज संभव
रेगुलर दवाई से इलाज संभव

दुनिया के 5 करोड़ मरीजों में से 1.2 अकेले भारत में
मेडिकल जर्नल लांसेट की एक रिपाेर्ट के अनुसार दुनिया भर में करीब 5 करोड़ लोग एपिलेप्सी के शिकार हैं। इसमें से करीब एक से 1.2 करोड़ भारतीय हैं। साल 2019 में करीब एक हजार लोगों में से इनकी संख्या 3 से 12 तक पाई गई। यह भी पता चला कि जानकारी की कमी और दूसरे कारणों से मरीजों का सही इलाज नहीं हो पाता है। चिकित्सक स्वीकारते हैं कि गांवों और छोटे शहरों में मिर्गी के रोग को छूआछूत से जोड़कर देखा जाता है। कुछ लोग इसका इलाज कराने के लिए झाड़-फूंक या टोना-टोटके तक का सहारा लेते हैं। इसे पिछले जन्म के बुरे कर्मों से जोड़कर तक भी देख जाता है। चिकित्सक ऐसी धारणाओं को एक सिरे से नकारते हैं।

रिश्ता करने से पहले बीमारी पर खुलकर बात करें
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सत्तर प्रतिशत मामलों में इस पर काबू
प्रो. मंजरी के अनुसार, जिन लड़कियों को दौरे आते हैं, उनको समाज में अच्छी नजर से नहीं देखा जाता है। लोगाें को लगता है कि ऐसी लड़कियां मां नहीं बन सकती है। जबकि ऐसा नहीं है। बिना नागा किए रोज सही दवाइयां लेने से 70% एपिलेप्सी के मामलों पर काबू पाया जा सकता है। बाकी 30 % मामलों में एम्स जैसे बड़े अस्पतालों में जांच की जाती है। एपिलेप्सी को सर्जरी से भी कंट्रोल किया जाता है। कीटोजेनिक डायट से भी इसका इलाज किया जाने लगा है। इस बीमारी में डॉक्टर जिस बात पर जोर देते हैं कि वह है दवा की नियमितता, जो रोगी को काफी हद तक सुधार देती है।

बात छिपाने का बुरा असर बाद की जिंदगी पर
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बीमारी छिपाकर शादी नहीं करे
साइकोलॉजिस्ट और डॉक्टर्स दोनों इस बात से इत्तेफाक रखते हैं कि लड़का और लड़की दोनों शादी के मामलों में मिर्गी की बात नहीं छिपाएं। साइकोलॉजिस्ट यह मानते हैं कि तनाव में मिर्गी के दौरे अधिक आते हैं। इसलिए परिवार को चाहिए कि ऐसे मरीजों को तनाव से दूर रखें। पारस हॉस्पिटल की सीनियर कंसल्कटेंट साइकोलॉजिस्ट डॉ. प्रीती सिंह के अनुसार, कई बार पेशेंट यह सोचकर ही परेशान हो जाते हैं कि उनको मिर्गी के दौरे आते हैं, वे दूसरों की तरह बाहर नहीं जा सकते, नौकरी नहीं कर सकते। ऐसे तनाव से बचना चाहिए। इससे दौरे बढ़ने की आशंका होती है।

शादी की बातचीत के दौरान इस पहलू को कभी भी नहीं छिपाना चाहिए। इससे शादी के बाद विश्वास कायम करना मुश्किल हो जाता है। संभव हो, तो दूसरे पक्ष को कहें कि वह उस न्यूरोलॉजिस्ट से मिल लें, जो उनका इलाज कर रहे हैं। डॉक्टर इस बात पर खास जोर देते हैं कि दिमाग से यह बात निकाल दें, कि यह न तो छूआछूत है और न ही इसका भूत-प्रेत से कोई लेना देना है। डॉ. मंजरी के अनुसार मिर्गी की नई दवाओं को सेक्स लाइफ पर कोई बुरा असर नहीं होता। व्यक्ति की मैरिड लाइफ सामान्य रहती है।