डिलीवरी के बाद घटाएं पेट:मां बनने के बाद महिलाएं कॉटन साड़ी से बांधती हैं पेट, एक्सपर्ट से जानें इसके फायदे

16 दिन पहलेलेखक: कमला बडोनी
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बच्चे को जन्म देना मां के लिए भी एक नया जन्म होता है इसलिए, मां बनने के बाद महिलाओं के शरीर को खास देखभाल की जरूरत होती है। महाराष्ट्र में मां बनने के बाद महिलाएं पेट पर कॉटन साड़ी बांधती हैं। क्या है ऐसा करने की वजह और इसके फायदे, ये जानने के लिए हमने बात की गायनाकोलॉजिस्ट डॉ. नंदिता पालशेतकर और पीडियाट्रीशन डॉ. गीतांजलि शाह से।

कमर में साड़ी बांधने के फायदे

मां बनने के बाद महिलाओं की मालिश से लेकर पौष्टिक आहार तक, हर तरह से उनकी विशेष देखभाल की जाती है। महाराष्ट्र में मां बनने के बाद महिलाएं पेट पर पूरी साड़ी बांधती हैं। इसके बारे में बताते हुए ब्लूम आईवीएफ की मेडिकल डायरेक्टर गायनाकोलॉजिस्ट नंदिता पालशेतकर कहती हैं, “मां बनने के बाद महिलाओं की पेट की मसल्स ढीली हो जाती हैं और पेट को बांधने से वो अपनी जगह पर फिट हो जाती हैं और उन्हें हील होने में मदद मिलती है। महाराष्ट्र में मां की मालिश के बाद दाई उसके पेट पर पूरी साड़ी (नौ वारी साड़ी) को टाइट बांध देती है, जिससे महिला को आराम मिलता है। कॉटन साड़ी का फायदा है कि ये कंफर्टेबल होती हैं और इनसे महिला को कोई नुकसान नहीं होता और वह चाहे तो इसे रात में पहनकर भी सो सकती है। अब साड़ी की जगह बेल्ट ने ले ली है, लेकिन महाराष्ट्र में अभी भी कई घरों में महिलाएं पेट पर कॉटन साड़ी ही बांधती हैं। अब तो साड़ी से बनी रेडीमेड बेल्ट भी मिलने लगी हैं और महिलाएं साड़ी की जगह उन्हें पहनने लगी हैं। नॉर्मल डिलीवरी के चार दिन बाद और सीजेरियन डिलीवरी के आठ दिन बाद महिलाएं पेट पर साड़ी या बेल्ट बांध सकती हैं, इससे उन्हें काफी सपोर्ट और आराम मिलता है। डिलीवरी के बाद दो-तीन महीने तक हम महिलाओं को बेल्ट पहनने की सलाह देते हैं।”

एक्सरसाइज भी है जरूरी

अश्विनी और गर्भसंस्कार हॉस्पिटल, मुंबई की पीडियाट्रीशन डॉ. गीतांजलि शाह कहती हैं, “पहले बेल्ट उपलब्ध नहीं थीं इसलिए महिलाएं पेट पर साड़ी बांध लेती थीं, लेकिन अब अधिकतर महिलाएं बेल्ट पहनना पसंद करती हैं। डिलीवरी के बाद पेट बांधना बहुत जरूरी है, इससे पेट की मसल्स को सपोर्ट मिलता है और महिला को आराम आता है। इसलिए, हम उन्हें बेल्ट बांधने की सलाह देते हैं। लेकिन इतना काफी नहीं है, साड़ी या बेल्ट बांधने से पेट की मसल्स अंदर नहीं जातीं, इसके लिए योग व एक्सरसाइज भी जरूरी है। इसे हम ऐसे समझ सकते हैं, जैसे अलमारी में कपड़े अस्त-व्यस्त रखने के बाद दवाजा बंद कर देने से कपड़े बाहर तो नहीं गिरेंगे, लेकिन उन्हें सही जगह पर रखने के लिए पहले कपड़ों को अच्छी तरह तह करके रखना होगा। इसी तरह डिलीवरी के बाद पेट बांधने से मसल्स को आराम तो मिलता है, लेकिन उन्हें सही जगह पर फिट करने के लिए कपालभाति, एब्डोमिनल क्रंचेस, पेल्विक फ्लोर, कीगल जैसी योग व एक्सरसाइज बहुत जरूरी हैं।"

नॉर्मल डिलीवरी के एक महीने बाद और सीजेरियन के तीन महीने बाद महिला को एक्सरसाइज करना शुरू कर देना चाहिए।

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